Bareilly News: बंद मकान में धमाकों के साथ फटे सिलिंडर... भड़की आग, तंग गली में जूझते रहे दमकलकर्मी
बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में बुधवार रात एक मकान में धमाकों के बाद आग गई। धमाकों की आवाज सुनकर लोग अपने घरों से बाहर आ गए। सूचना मिलते ही दमकल टीम मौके पर पहुंच गई। संकरी गली होने से दमकलकर्मियों को आग बुझाने के लिए तीन घंटे तक जूझना पड़ा।
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बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के बजरिया पूरनमल में तंग गली के बंद मकान में बुधवार रात दो धमाकों के बाद आग भड़क गई। इससे मोहल्ले में अफरातफरी मच गई। मकान में प्रधानाचार्य के फंसे होने की आशंका थी। हालांकि, आधी रात के बाद पुलिस ने इस आशंका को खारिज कर दिया।
प्रेमनगर थाना क्षेत्र के घनी आबादी वाले मोहल्ले बजरिया पूरनमल की एक तंग गली में दीप्ति अग्रवाल (55) का पैतृक मकान है। उनके पिता और पति का निधन हो चुका है। दीप्ति बदायूं जिले के सहसवान में एक विद्यालय की प्रधानाचार्य बताई जा रही हैं।
उनका इकलौता बेटा तुषार अग्रवाल परिवार के साथ नोएडा में रहकर नौकरी करता है। दीप्ति अग्रवाल कभी बदायूं तो कभी नोएडा में रहती हैं। बुधवार रात साढ़े 11 बजे दीप्ति अग्रवाल के मकान में थोड़ी देर के अंतराल में दो धमाके हुए। फिर आग भड़क गई।
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पड़ोसियों की सूचना पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी और पुलिस मौके पर पहुंच गई। रात एक बजे तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। हालांकि, प्रेमनगर इंस्पेक्टर आशुतोष रघुवंशी ने कमरों को अच्छी तरह देख लिया। उन्होंने दावा किया है कि सिलिंडर भी फटे हैं, लेकिन अंदर कोई व्यक्ति नहीं था।
आग बुझाने के लिए लानी पड़ी बाइक
जिस जगह पर दीप्ति अग्रवाल का मकान है, वह बेहद संकरी है। वहां फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ी नहीं जा सकी। आग बुझाने के लिए केवल विशेष बाइक जा सकी। बाइक से पतले पाइप के सहारे फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग बुझाई। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान सिविल डिफेंस के लोग और मोहल्ले वासियों ने भी काफी मदद की।
महिला के मकान में होने की चर्चा से बना असमंजस
मोहल्ले के कुछ लोगों में चर्चा रही कि बुधवार शाम दीप्ति अग्रवाल अपने घर आईं थीं। घर के एक गेट पर ताला पड़ा हुआ था तो दूसरे दरवाजे में अंदर से कुंडी लगी थी। चर्चा थी कि उन्हें आते हुए देखा था, लेकिन जाते हुए नहीं देखा।
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कुछ लोगों ने इस बात का कयास लगाया कि दीप्ति अग्रवाल घर में ही रही होंगी। उनका मोबाइल नंबर बंद जा रहा था और उनके बेटे का नंबर पड़ोसियों के पास नहीं था। पुलिस में दोबारा लोगों से बात की। कुछ लोगों का कहना था कि दीप्ति अग्रवाल अपने घर पर कभी-कभी आती थीं, लेकिन वह यहां रुकती नहीं थी।