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Bareilly News: खूंखार कुत्तों ने पांच साल में चार मासूमों की ली जान, 12 जिंदगियां निगल गया रेबीज

Fri, 21 Aug 2026 12:32 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Fri, 21 Aug 2026 12:32 AM IST
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Ferocious dogs have claimed the lives of four innocent children in five years; rabies has claimed 12 lives.
बरेली। शहर की सघन बस्तियों से लेकर पॉश इलाकों तक खूंखार कुत्तों का आतंक है। पांच साल में कुत्ते चार मासूमों की नोचकर जान ले चुके हैं। इसी दौरान 12 लोग रेबीज की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा कुत्ते वर्षभर लोगों को काटते रहते हैं। कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या चिंताजनक बनी हुई है। निगम के पास पकड़े गए कुत्तों को रखने का इंतजाम नहीं है। बधियाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इससे कॉलोनियों व मोहल्लों में उनकी संख्या कम नहीं होती हैं।
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इन इलाकों में है दहशत
सीबीगंज, किला, स्वालेनगर, पुराना शहर, सुभाषनगर, साहूकारा, कालीबाड़ी, सिविल लाइंस, बिहारीपुर, पुराना शहर।
इन मासूमों ने गंवाई जान
- वर्ष 2022 में बंडिया निवासी मोरपाल (8)।
- दो फरवरी 2023 को ट्यूलिया निवासी परी (2) (मूल निवासी सीहोर शीशगढ़)।
- वर्ष 2023 में बंडिया निवासी रोहनी (6)।
- 16 अगस्त 2026 को गांव लटूरी निवासी इनाया (6)।
सीबीगंज में मांस खाकर हिंसक हो रहे कुत्ते
मासूमों की मौत के चारों मामले सीबीगंज इलाके के ही हैं। यहां के लोगों को कहना है कि बंडिया गांव के आसपास मांस की दुकानें हैं। यहां दुकानदार मांस के अवशेष खुले में फेंक देते हैं। कुत्ते इसे खाते हैं। सावन के चलते इन दिनों दुकानें बंद हैं। ऐसे में मांस खाने के आदी हो चुके कुत्ते लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। सहायक आयुक्त खाद्य राहुल सिंह ने बताया कि निगम क्षेत्र में 696 मांस की दुकानें पंजीकृत हैं। इनमें से 88 सीबीगंज में ही हैं। जिलेभर में 2,625 दुकानें हैं। सीबीगंज का तिलियापुर गांव अवैध कटान के लिए भी जाना जाता है।
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दरवाजे पर खेल रही मासूम की ले ली थी जान
ट्यूलिया गांव निवासी अवधेश कुमार ने बताया कि दो फरवरी 2023 को वह ड्यूटी करने फैक्टरी गए थे। वह बंडिया गांव में नहर के पास किराये के मकान में परिवार के साथ रहते थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली की बच्ची परी पर कुत्तों ने हमला कर दिया है। वह घर के पास खेल रही थी। घर वाले उसे लेकर अस्पताल भागे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि नगर निगम की टीम आई, मगर कुत्तों को पकड़े बिना ही लौट गई थी।
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मासूम की मौत से सदमे में दिव्यांग पिता
लटूरी गांव निवासी इसहाक खान ने बताया कि 16 अगस्त को दोपहर एक बजे उनकी छह वर्षीय बेटी इनाया गांव के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। जंगल की तरफ से आए कुत्ते उसे 100 मीटर दूर घसीट ले गए और नोच डाला। इससे उनकी मौत हो गई। तीन माह पूर्व छोटी बेटी आयत पर भी कुत्तों ने हमला कर घायल कर दिया था। इसहाक दिव्यांग हैं और परचून की दुकान चलाते हैं। कुत्तों की दहशत से गांव वालों ने अकेले खेतों पर जाना छोड़ दिया है।
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साल दर साल बढ़ रहे पशुओं के हमले
बरेली। रेबीज जानलेवा है, पर समय से टीकाकरण हो जाए तो खतरा टल सकता है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में रेबीज से आठ, 2023 में तीन, 2024, 2025 में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। 2026 में अब तक कोई मौत नहीं हुई है। वर्ष 2022 में रैबीज से मौत के मामले में बरेली जिला प्रदेश में सबसे ऊपर रहा था।
विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2024 में भमोरा के 40 वर्षीय युवक की, सितंबर 2024 में आलमपुर की गीता देवी (58), फरवरी 2025 में लक्ष्मीपुर के रामदुलारे (40) की भी रेबीज से मौत हुई। मृतकों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट और परिजनों के बयान के अनुसार किसी ने भी पशु के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई थी।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक, शहर और देहात के सभी कोल्ड चेन प्वॉइंट युक्त स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन लग रही है। जागरूकता मुहिम भी चलाई जा रही है। वैक्सीन लगवाने वालों का रिकॉर्ड और फीडबैक भी लिया जा रहा है।

वैक्सीन लगने के बाद थम रहे मौत के मामले
इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के नोडल डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक, एंटी रेबीज वैक्सीन ही इस जानलेवा संक्रमण से बचा सकती है। जो भी मौतें हुईं हैं, उनमें से किसी ने भी वैक्सीन समय पर नहीं लगवाई थी। वर्ष 2023-24 से तीन सौ बेड अस्पताल में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एआरवी मॉडल क्लीनिक शुरू होने के बाद रेबीज संक्रमण से मौत के मामले कम हुए हैं। लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है।
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