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प्रशासन के पेच में फंस गया फीस अध्यादेश
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 25 Apr 2018 06:45 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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कान्वेंट और निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लाया गया फीस अध्यादेश प्रशासन के पेच में फंसकर रह गया है। अध्यादेश के नियमों के मुताबिक, पैरेंट्स की शिकायतों का समाधान न कर अफसर उन्हें इधर से उधर घुमा रहे हैं। जिला कमेटी अध्यादेश का पालन कराने की बात मंडलीय कमेटी पर टाल रही है। मंडलीय कमेटी ने इसमें नया पेच फंसा दिया है। अभिभावक जिस स्कूल की लिखित या मौखिक शिकायतें करेंगे, वह संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को भेजी जाएंगी। 15 दिन में प्रिंसिपल संबंधित अभिभावक को जवाब देकर संतुष्ट करेगा। अगर प्रिंसिपल ऐसा नहीं करता है तब शिकायत पर मंडलीय कमेटी सुनवाई करेगी। मतलब, अभिभावक जिस प्रक्रिया से बचना चाह रहे थे, प्रशासन वहीं उन पर थोप रहा है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्राइवेट स्कूलों की फीस, यूनिफार्म, किताबों में कमीशन से संबंधित समस्याओं के समाधान की औपचारिकता निभाने के लिए डीआईओएस दफ्तर में कंट्रोल रूम खोला गया है। इसमें अब तक 20 से ज्यादा अभिभावक निजी स्कूलों की फीस संबंधी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। अब तक प्रशासन कहता रहा है कि कंट्रोल रूम में जो भी अभिभावक फोन पर या लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे, उनका नाम गोपनीय रखा जाएगा। मगर, अब मंडलीय कमेटी की ओर से बताया गया है कि अभिभावकों को अपने नाम से स्कूल की शिकायत करनी होगी। डीआईओएस दफ्तर में दर्ज शिकायतों को सीधे संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल के पास निस्तारण के लिए भेजा जाएगा। अगर प्रिंसिपल 15 दिन के अंदर शिकायतों का निस्तारण नहीं करते हैं तो मंडलीय कमेटी उन पर सुनवाई करेगी। प्रशासन के इस पेच से अभिभावकों की शिकायतों का समाधान होने की उम्मीद नहीं रह गई है। प्रशासन जानबूझकर अभिभावकों को इतना हतोत्साहित करना चाहता है कि वे स्कूलों की मनमानी को खामोशी से स्वीकार कर लें और फिर राज्य सरकार के अध्यादेश के नियमों का पालन कराने की हिम्मत ही न जुटा सकें।
कंट्रोल रूम में 35 शिकायतें आ चुकीं
डीआईओएस दफ्तर में प्राइवेट स्कूल की मनमानी पर अध्यादेश के नियमों का पालन न करने के संबंध में दो दिन में 35 शिकायतें आ चुकी हैं। पहले दिन 17 शिकायतें आई थीं। दूसरे दिन 18 शिकायतें दर्ज की गईं। 50 से ज्यादा फोन ऐसे आए, जिन पर अभिभावक अपना नाम गोपनीय रखकर स्कूल की फीस, यूनिफार्म, किताबों में कमीशन के अलावा अन्य शुल्क चार्ज की शिकायत कर रहे थे, लेकिन जब कंट्रोल रूम के कर्मचारी ने नाम समेत शिकायत दर्ज कराने को कहा तो अभिभावकों ने फोन काट दिया। अधिकांश अभिभावक फोन पर यही पूछ रहे हैं कि फलां स्कूल इतनी फीस वसूल रहे हैं। अगर अध्यादेश के हिसाब से फीस 20 हजार रुपये हो जाए तो वह अभी फीस न जमा करें। कंट्रोल रूम के कर्मचारी अभिभावकों के इस सवाल का जवाब देने की स्थिति में नहीं होते।
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मंडलीय कमेटी में छह से दस अभिभावकों को शामिल किया जाना हैं। इसमें तीन महिलाएं और तीन पुरुष होंगे। पैरेंट्स को पहले अपनी शिकायतें प्रिंसिपल को देनी होंगी। अगर वह 15 दिन के अंदर उनका निस्तारण नहीं करते तो मंडलीय कमेटी उनकी सुनवाई करेगी। डीआईओएस दफ्तर की शिकायतें भी संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को भेजी जाएंगी। 15 दिन में जवाब न देने की स्थिति में स्कूल की जांच होगी, फिर अध्यादेश के नियमों के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. पीवी जगनमोहन, कमिश्नर
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जिलाधिकारी के निर्देश पर प्राइवेट स्कूलों की फीस, यूनिफार्म, किताबों में कमीशन से संबंधित समस्याओं के समाधान की औपचारिकता निभाने के लिए डीआईओएस दफ्तर में कंट्रोल रूम खोला गया है। इसमें अब तक 20 से ज्यादा अभिभावक निजी स्कूलों की फीस संबंधी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। अब तक प्रशासन कहता रहा है कि कंट्रोल रूम में जो भी अभिभावक फोन पर या लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे, उनका नाम गोपनीय रखा जाएगा। मगर, अब मंडलीय कमेटी की ओर से बताया गया है कि अभिभावकों को अपने नाम से स्कूल की शिकायत करनी होगी। डीआईओएस दफ्तर में दर्ज शिकायतों को सीधे संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल के पास निस्तारण के लिए भेजा जाएगा। अगर प्रिंसिपल 15 दिन के अंदर शिकायतों का निस्तारण नहीं करते हैं तो मंडलीय कमेटी उन पर सुनवाई करेगी। प्रशासन के इस पेच से अभिभावकों की शिकायतों का समाधान होने की उम्मीद नहीं रह गई है। प्रशासन जानबूझकर अभिभावकों को इतना हतोत्साहित करना चाहता है कि वे स्कूलों की मनमानी को खामोशी से स्वीकार कर लें और फिर राज्य सरकार के अध्यादेश के नियमों का पालन कराने की हिम्मत ही न जुटा सकें।
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कंट्रोल रूम में 35 शिकायतें आ चुकीं
डीआईओएस दफ्तर में प्राइवेट स्कूल की मनमानी पर अध्यादेश के नियमों का पालन न करने के संबंध में दो दिन में 35 शिकायतें आ चुकी हैं। पहले दिन 17 शिकायतें आई थीं। दूसरे दिन 18 शिकायतें दर्ज की गईं। 50 से ज्यादा फोन ऐसे आए, जिन पर अभिभावक अपना नाम गोपनीय रखकर स्कूल की फीस, यूनिफार्म, किताबों में कमीशन के अलावा अन्य शुल्क चार्ज की शिकायत कर रहे थे, लेकिन जब कंट्रोल रूम के कर्मचारी ने नाम समेत शिकायत दर्ज कराने को कहा तो अभिभावकों ने फोन काट दिया। अधिकांश अभिभावक फोन पर यही पूछ रहे हैं कि फलां स्कूल इतनी फीस वसूल रहे हैं। अगर अध्यादेश के हिसाब से फीस 20 हजार रुपये हो जाए तो वह अभी फीस न जमा करें। कंट्रोल रूम के कर्मचारी अभिभावकों के इस सवाल का जवाब देने की स्थिति में नहीं होते।
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मंडलीय कमेटी में छह से दस अभिभावकों को शामिल किया जाना हैं। इसमें तीन महिलाएं और तीन पुरुष होंगे। पैरेंट्स को पहले अपनी शिकायतें प्रिंसिपल को देनी होंगी। अगर वह 15 दिन के अंदर उनका निस्तारण नहीं करते तो मंडलीय कमेटी उनकी सुनवाई करेगी। डीआईओएस दफ्तर की शिकायतें भी संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को भेजी जाएंगी। 15 दिन में जवाब न देने की स्थिति में स्कूल की जांच होगी, फिर अध्यादेश के नियमों के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. पीवी जगनमोहन, कमिश्नर