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Bareilly News: समय से ठीक नहीं किए फाॅल्ट, रीवैंप के काम भी शुरू नहीं, रैंकिंग में पिछड़ गया जिला

Sat, 28 Oct 2023 02:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 28 Oct 2023 02:47 AM IST
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Faults not rectified on time, revamp work not even started, district lagged behind in ranking
बरेली। बिजली निगम के अफसर समय से फाॅल्ट ठीक कराने के दावे करते रहे पर हकीकत में ऐसा नहीं कर पाए। जिले में झूलते तारों को भी ठीक नहीं कर सके। रीवैंप योजना भी सर्वे में ही उलझी रही। नतीजा सितंबर की रैंकिंग में जिला पिछड़ गया। शहरी क्षेत्र में प्रदेश में 32वीं रैंक आई तो ग्रामीण क्षेत्र में यह रैंक 31वीं रही। बिजली निगम की ओर से पहली बार रैंकिंग जारी की गई है।
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बिजली निगम की सितंबर माह की समीक्षा हुई तो अफसरों के दावों की कलई खुल गई। कुशीनगर और सुल्तानपुर जैसे छोटे जिले भी बरेली से आगे निकल गए। ग्रामीण क्षेत्र में फिरोजाबाद व अमेठी जनपद आगे रहे। दरअसल समीक्षा में इस बात पर फोकस रहा कि फाॅल्ट कितनी जल्दी ठीक किए गए। जिले में झूल रहे बिजली के तारों पर क्या काम किया गया और फुंके हुए ट्रांसफार्मर को कितनी जल्दी बदला गया। जारी रैंकिंग से साफ हो गया है कि शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में फाॅल्ट ठीक करने में तत्परता नहीं दिखाई गई। झूलते तारों को भी नहीं कसा गया। रीवैंप योजना के काम शुरू नहीं हो सके। इन्हीं सब का नतीजा है कि जिले की रैंक पिछड़ी है।
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प्रदर्शन के बाद बदला गया ट्रांसफार्मर
बिलपुर में ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद ग्रामीणों ने शिकायत की। 20 दिन बीत जाने के बाद भी ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया। इसके बाद बिलपुर गांव की महिलाओं ने प्रदर्शन किया। तब जाकर ट्रांसफार्मर बदला गया।
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एक सप्ताह में बदला ट्रांसफार्मर

चठिया फैजु गांव में ट्रांसफार्मर फुंकने से एक सप्ताह तक अंधेरा रहा। ग्रामीण लगातार अफसराें से संपर्क करते रहे, मगर ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया। एक सप्ताह बाद ग्रामीणों ने एक साथ लगातार अफसरों को फोन किए तो ट्रांसफार्मर बदला गया।

ट्रांसफार्मर कम उपलब्ध हुए। बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। इसलिए रैकिंग में पिछड़े। उपभोक्ताओं सेवाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जिले की रैंकिंग में सुधार आएगा। - राजीव कुमार शर्मा, मुख्य अभियंता
क्यूआर कोड योजना भी हुई धड़ाम

फाॅल्ट ठीक करने और चोरी रोकने में इस्तेमाल नहीं कर पा रहे कर्मचारी व अभियंता
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। लाइन लॉस और बिजली चोरी रोकने के लिए निगम ने खंभों पर क्यूआर कोड लगाए थे। योजना यह थी कि जरूरत पर एक क्लिक में पता चल सके कि संबंधित खंभे से कितने कनेक्शन जुड़े हैं। कितना लोड है। अगर लोड ज्यादा है तो चोरी की स्थिति भी सामने आएगी। यह योजना भी धड़ाम हो चुकी है। इसके चलते भी फाॅल्ट ठीक करने में घंटों लग जाते हैं। विभाग के कई कर्मचारियों को इस योजना के बारे में पता ही नहीं है।
रीस्ट्रक्चर्ड एक्सलरेटिड पावर डेवलेपमेंट एंड रिफॉर्म प्रोग्राम (आरएपीडीआरपी) के तहत शहर के साथ मीरगंज, सेंथल, शाही, फतेहगंज पूर्वी व पश्चिमी समेत 16 कस्बों में खंभों पर क्यू आर कोड लगाए गए थे। कई खंभों के क्यूआर कोड वाले स्टीकर खराब हो गए हैं। जिन खंभों पर स्टीकर लगे हैं, उन्हें स्कैन करने पर कुछ अंकों में सूचना मिलती है पर इसका कैसे और क्या इस्तेमाल करना है, इसके बारे में अवर अभियंता और सहायक अभियंता बेखबर हैं। यही वजह है कि जब अधिशासी अभियंता सतेंद्र चौहान से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल से पहले लगे थे। उन्हें सिर्फ इतनी ही जानकारी है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की टैगिंग के लिए क्यूआर कोड लगाए गए थे। इनका क्या इस्तेमाल होना है, यह तो वही बता सकेंगे, जिनके कार्यकाल में ये कोड लगाए गए थे। ग्रामीण क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार चौरसिया ने कहा कि फिलहाल सिस्टम का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। मुख्य अभियंता राजीव कुमार शर्मा भी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके।


अभी तक सर्वे में उलझी 820 करोड़ की रीवैंप योजना

अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 820 करोड़ रुपये की रीवैंप योजना के अधिकतर काम अभी शुरू नहीं हुए हैं। इसका खामियाजा शहर के 50 हजार से अधिक उपभोक्ता भुगत रहे हैं। जो काम शुरू हुए, वे भी अधूरे पड़े हैं। यही वजह है कि 24 घंटे बिजली देने का शेड्यूल शहर के कई हिस्सों में धड़ाम है। इस योजना पर काम हुआ होता तो शायद जिले की रैंकिंग बेहतर होती।

विद्युत वितरण खंड प्रथम में रीवैंप योजना के तहत सुभाषनगर में सिर्फ चार खंभे और थोड़ा सा एबी केबल लगाया गया। वित्तीय वर्ष के पांच महीने बीत चुके। लाइन लाॅस वाले फीडरों पर काम पूरा नहीं हो सका। सुभाषनगर सबस्टेशन से 17 हजार उपभोक्ता जुड़े हैं। वर्षों पुरानी बिजली लाइनें हैं और फाॅल्ट अधिक होते हैं। लाइन लॉस भी औसत से अधिक है। कई ट्रांसफार्मर ओवरलोड हैं। पांच हजार उपभोक्ताओं की आपूर्ति रोज प्रभावित होती है। किला, हरुनगला से जुड़े फीडरों पर भी 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है। अफसर फीडर विशेष में लोकल फाॅल्ट होने की बात कहकर टाल देते हैं। एनओसी न मिलने की वजह से रीवैंप का काम अटका है।
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