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ऐसे बढ़ाएं गन्ने की पैदावार: पीलीभीत के किसान शिवेंद्रनाथ और जसकरन ने अपनाई नई विधि, डेढ़ गुना बढ़ा उत्पादन

Tue, 26 Dec 2023 04:00 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 26 Dec 2023 04:00 PM IST
सार

प्रगतिशील किसानों के प्रयोग दूसरे किसानों के लिए भी आमदनी बढ़ाने का तरीका बन सकते हैं। उप गन्ना आयुक्त राजीव कुमार राय ने बताया कि तीन वर्ष से गन्ना विभाग प्रगतिशील किसानों को पुरस्कार और सम्मान दे रहा है। 

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Farmers adopted new technology increased sugarcane production in Bareilly
खेत में खड़ी गन्ने की फसल। संवाद

विस्तार

बरेली मंडल के कई किसानों ने गन्ने की खेती में नए प्रयोग कर सामान्य से अधिक पैदावार की है। इन्हीं में से एक शिवेंद्रनाथ चौबे ने खेती में रिंग पिट विधि तो दूसरे जसकरन सिंह बाजवा ने ट्रंच विधि अपनाकर उपज बढ़ाई है। साथ ही यूपी की प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार के मुकाबले डेढ़ गुना से अधिक गन्ना पैदा किया है। यही नहीं परंपरागत विधियों को छोड़कर गन्ने के साथ चना और मटर की सहफसल भी पैदा की है।

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इन प्रगतिशील किसानों के प्रयोग दूसरे किसानों के लिए भी आमदनी बढ़ाने का तरीका बन सकते हैं। उप गन्ना आयुक्त राजीव कुमार राय ने बताया कि तीन वर्ष से गन्ना विभाग प्रगतिशील किसानों को पुरस्कार और सम्मान दे रहा है।  इसी क्रम में आयोजित संवाद में सम्मान हासिल करने वाले किसानों को ऑनलाइन जोड़ा जाएगा, ताकि वे एक-दूसरे की अपनी विधि बता सकें। 
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बरेली मंडल से 40 किसान इस संवाद में जुड़ेंगे। बाद में संवाद में आए सुझावों के साथ ही बेहतर उत्पादन विधियों को संकलित कर एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। अमर उजाला से बातचीत में जसकरन व शिवेंद्र ने अपनी विधि साझा की।

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रिंग पिट विधि अपनाकर कमाई बढ़ाई
मझगवां विकास खंड के शिवनगर निवासी शिवेंद्र नाथ चौबे तीन वर्ष से रिंग पिट विधि से गन्ने की खेती करते हैं। प्रति बीघा 100 क्विंटल की पैदावार है। रिंग पिट विधि में दो फुट दायरे में डेढ़ फुट गहरा गड्ढा खोदा जाता है। वह बताते हैं कि प्रत्येक गड्ढे में 250 ग्राम डीएपी, 100 ग्राम सुपर फॉस्फेट, 100 ग्राम पोटाश व 50 ग्राम सागरिका डालते हैं। इससे तीन वर्ष तक के लिए गड्ढा तैयार हो जाता है। शिवेंद्र नाथ चौबे गन्ने के साथ मटर की सहफसल करते हैं।

उपज बढ़ाने में मददगार है ट्रंच विधि 
अमरिया क्षेत्र के पस्तोर गांव के प्रगतिशील किसान जसकरन सिंह बाजवा कहते हैं कि उनके पास 22 हेक्टेयर खेती है। वह ट्रंच विधि से गन्ना पैदा करते हैं। बुआई के वक्त एक से दूसरी क्यारी के बीच की दूरी 56 इंच होती है। छोटे ट्रैक्टर से मिट्टी चढ़ाने का काम करते हैं। इस विधि से उनके खेत में 17 फुट तक ऊंची गन्ने की फसल तैयार होती है। उपज बढ़ाकर वह गन्ना विभाग से पुरस्कार पा चुके हैं। यूपी में औसतन 830 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार है जबकि जसकरन सिंह 1200-1500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार ले रहे हैं। जसकरन ने गन्ने के साथ चने की सहफसल भी करते हैं। 

घर बैठे 50-70 हजार रुपये तक कमा लेती हैं कुसुम
गन्ने की पौध बेचकर गुरसौली की कुसुम प्रत्येक सीजन में 50 से 70 हजार रुपये तक कमा लेती हैं। कोरोना काल में गन्ने की पौध तैयार करने की विधि उन्हें गन्ना विभाग ने ही सिखाई थी। उन्होंने गांव की 21 महिलाओं को जोड़कर अन्नपूर्णा स्वयं सहायता समूह बनवाया। समूह ने तीन वर्ष में सभी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। गन्ना उत्पादक क्षेत्र में कैसे दूसरी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं? कुसुम भी संवाद में जुड़ेंगी और अपनी विधि महिलाओं के संग साझा करेंगी।

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