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बाह्य विशेषज्ञों के चक्कर में अटकी पीएचडी की प्रवेश परीक्षा
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Mon, 26 Sep 2016 12:37 AM IST
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा का इंतजार कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों को अभी और इंतजार करना होगा। विवि प्रशासन अभी तक शोध उपाधि समिति (आरडीसी) का कार्य पूरा नहीं कर सका है और जबतक आरडीसी गठित नहीं होंगी तबतक रिक्त सीटों का आंकड़ा साफ नहीं होगा। इन्हीं रिक्त सीटों पर ही विवि को इंट्रेंस करना है। विवि प्रशासन अब अक्टूबर में आरडीसी का कार्य पूरा कर नवंबर में पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारी में है।
विवि प्रशासन के सामने आरडीसी गठित करने में सबसे बड़ी बाधा बाह्य विशेषज्ञों का न आना और आधा दर्जन विषयों के संयोजक न मिल पाना बन रहा है। करीब 70 फीसद विषयों की आरडीसी हो चुकी हैं। अब तीस फीसद ऐसे विषय बचे हैं जिनके लिए बाह्य विशेषज्ञ नहीं मिल पा रहे हैं। कई को भेजे गए बुलावे वापस आ गए। किसी का पता बदल गया तो कोई विदेश चला गया। यूजीसी के नियमानुसार बिना बाह्य विशेषज्ञों से आरडीसी का कार्य पूरा ही नहीं हो सकता। वहीं कुछ विषयों के संयोजक इसी साल सेवानिवृत्त हो गए, अब विवि प्रशासन को इनकी जगह नए संयोजक बनाने हैं, इसमें भी वक्त लगेगा। विवि में पीएचडी प्रोग्राम पहले से ही एक साल पीछे चल रहा है और अब कोर्स वर्क होने के बावजूद पीएचडी प्रोग्राम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। छह माह पहले विवि प्रशासन का कहना था कि आरडीसी गठित कर सितंबर में रिक्त सीटों पर इंट्रेंस कराया जाएगा पर अबतक स्थिति वैसे ही बनी हुई है। अब विवि प्रशासन का कहना है अक्टूब में हर हाल में आरडीसी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। नवंबर में रिक्त सीटों की प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।
-वर्जन
-आरडीसी का 70 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। कुछ विषयों के बाह्य विशेषज्ञ और कुछ विषयोें के संयोजक न मिल पाने से कुछ विलंब हो रहा है। अक्टूबर में आरडीसी का कार्य पूरा करके नवंबर में रिक्त सीटों पर पीएचडी की प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी।
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-प्रोफेसर वीपी सिंह, प्रति कुलपति विवि
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विवि प्रशासन के सामने आरडीसी गठित करने में सबसे बड़ी बाधा बाह्य विशेषज्ञों का न आना और आधा दर्जन विषयों के संयोजक न मिल पाना बन रहा है। करीब 70 फीसद विषयों की आरडीसी हो चुकी हैं। अब तीस फीसद ऐसे विषय बचे हैं जिनके लिए बाह्य विशेषज्ञ नहीं मिल पा रहे हैं। कई को भेजे गए बुलावे वापस आ गए। किसी का पता बदल गया तो कोई विदेश चला गया। यूजीसी के नियमानुसार बिना बाह्य विशेषज्ञों से आरडीसी का कार्य पूरा ही नहीं हो सकता। वहीं कुछ विषयों के संयोजक इसी साल सेवानिवृत्त हो गए, अब विवि प्रशासन को इनकी जगह नए संयोजक बनाने हैं, इसमें भी वक्त लगेगा। विवि में पीएचडी प्रोग्राम पहले से ही एक साल पीछे चल रहा है और अब कोर्स वर्क होने के बावजूद पीएचडी प्रोग्राम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। छह माह पहले विवि प्रशासन का कहना था कि आरडीसी गठित कर सितंबर में रिक्त सीटों पर इंट्रेंस कराया जाएगा पर अबतक स्थिति वैसे ही बनी हुई है। अब विवि प्रशासन का कहना है अक्टूब में हर हाल में आरडीसी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। नवंबर में रिक्त सीटों की प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।
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-वर्जन
-आरडीसी का 70 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। कुछ विषयों के बाह्य विशेषज्ञ और कुछ विषयोें के संयोजक न मिल पाने से कुछ विलंब हो रहा है। अक्टूबर में आरडीसी का कार्य पूरा करके नवंबर में रिक्त सीटों पर पीएचडी की प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी।
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-प्रोफेसर वीपी सिंह, प्रति कुलपति विवि