ईद पर भी बाजार, गारमेंट नहीं खुला तो हालात होंगे और बदतर
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अगले सप्ताह है त्योहार, बाजार खुलना अभी तक तय नहीं
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तहसीलों और आसपास जिलों में खुल रहे हैं प्रतिष्ठान
बरेली। लॉकडाउन- 4 की घोषणा होने के साथ यह लगभग तय हो गया कि इस बार ईद भी लॉकडाउन में ही गुजरेगी। पिछले करीब दो महीने में सैकड़ों करोड़ की पहले ही चपत खा चुका गारमेंट बाजार सरकार के इस फैसले से और ज्यादा मायूस हो गया है। हालांकि गारमेंट बाजार लॉकडाउन से मुक्ति मिलने की भी बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहा था लेकिन यह उम्मीद जरूर थी कि जिला प्रशासन अपने स्तर से इतनी राहत दे देगा कि उनके कुछ आंसू पोछने के साथ ईद पर नए कपड़े पहनने की लोगों की तमन्ना भी पूरी हो जाए लेकिन इसका कोई रास्ता बनता फिलहाल नहीं दिख रहा है।
चार दिन बाद लॉकडाउन अपने दो महीने पूरा कर लेगा। लॉकडाउन- 3 तो खैर रविवार को ही खत्म हो गया लेकिन लॉकडाउन-4 दो महीने की सीमा पार कर और आगे तक जाएगा और इसी बीच अलविदा और ईद भी गुजर जाएंगी। हालांकि ज्यादातर लोग जानते थे कि लॉकडाउन- 4 लागू ही होगा लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों यह कहकर कुछ उम्मीद बंधा दी थी कि लॉकडाउन का चौथा चरण कुछ अलग रंग-ढंग का होगा। गारमेंट कारोबारी तभी से यह आशा कर रहे थे कि शायद सरकार लॉकडाउन- 4 लागू करते वक्त इतनी राहत दे देगी कि उनके कारोबार का पहिया धीमे ही सही कुछ घूमना शुरू हो जाएगा लेकिन यह उम्मीद भी आखिरकार टूट ही गई।
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गारमेंट कारोबारियों को दूसरी उम्मीद जिला प्रशासन से थी लेकिन यह भी फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही। दरअसल पिछले दिनों डीएम की ओर से कई चुनिंदा कारोबारियों को थोक में अपना माल बेचने की इजाजत दे दी थी। इसके बाद कई दूसरे कारोबा री भी लाइन में लग गए थे लेकिन व्यापारी संगठनों के ही एक गुट ने रायता फैलाकर यह रास्ता भी बंद करा दिया। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले में पूरी तरह हाथ खींच लिए हैं।
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सदमे में कारोबारी, ऑफसीजन सेल गई और अब ईद भी
ईद पर कई दिन पहले से ही गारमेंट, रेडिमेड, कपड़ा, ड्राईफ्रूट, सेवईं के बाजार में बूम आना शुरू हो जाता था। इस बार यही तय नहीं हो पाया कि बाजार खुलेगा या नहीं। लॉकडाउन जिस वक्त लागू हुआ वह ऑफसीजन सेल का था। ज्यादातर शोरूम पर सेल शुरू भी हो गई थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से कारोबार बंद होने की वजह से करोड़ों का माल गोदामों में डंप होकर रह गया। कुछ उम्मीद ईद से बंधी थी लेकिन वह भी हाथ से निकली जा रही है। गारमेंट कारोबारी इस वजह से भारी तनाव में हैं। उनका कहना है कि ज्यादातर माल उधार और ब्याज पर लिया जाता है। माल क्लियर न होने का साफ मतलब है कि करोड़ों की देनदारी उनके सिर पर बोझ बन जाएगी। कारोबारी कह रहे हैं कि एक-दो दिन में अगर बाजार न खुले तो हालात बदतर हो जाएंगे। सीजन हो तो गारमेंट, रेडीमेड, कपड़ा सेक्टर में हर महीने छह सौ करोड़ तक का कारोबार होता है। इस हिसाब से उनका 11 सौ करोड़ दांव पर लगा हुआ है।
लॉकडाउन नोटबंदी से ज्यादा बड़ा झटका
नोटबंदी से कारोबारी उबर नहीं पाए कि लॉकडाउन आ गया। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में दूसरे जिलों के ज्यादातर बाजारों में काम हो रहा है। बरेली जिले की तहसीलों में भी काम हो रहा है। अब ईद में कुछ ही दिन बचे हैं इसलिए जिला प्रशासन कुछ प्रतिबंधों के साथ गारमेंट, रेडिमेड, कपड़ा, ड्राई फ्रूट बाजार को खोलने की अनुमति दे देनी चाहिए। - हरदीप सिंह, रेडिमेड गारमेंट कारोबारी
गारमेंट कारोबारियों के लिए हालात बदतर
अब तक बाजार खुलने को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। प्रशासन के अफसर व्यापार और व्यापारियों की स्थिति अच्छी तरह जानते हैं। दूसरे जिलों में लगभग सभी बाजार कुछ शर्तों के साथ खुल रहे हैं। जिला प्रशासन दूसरे जिलों की तरह ईद का त्योहार को देखते हुए जल्द व्यापार और जनहित में फैसला ले तो बेहतर है। व्यापारी भी जानते हैं कि जान है जहान है। - राकेश सेठी, होजरी कारोबारी
समझ नहीं आ रहा क्या करे कारोबारी
हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं। लॉकडाउन में बाजार बंद हुए दो महीने होने जा रहे हैं। करोड़ों रुपये की देनदारी और डंप माल देखकर समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। कुछ ही दिनों बाद ईद का त्योहार आने वाला है, जब गारमेंट, रेडीमेड, कपड़ा, ड्राईफ्रूट, फुटवियर का बाजार ज्यादा चमकता है। इसको देखते हुए कारोबारियों ने होली से पहले ही माल मंगा लिया था। जिला प्रशासन बाजार खोलने की सशर्त छूट दे। - नरेेंद्र गुप्ता पप्पू, गारमेंट व्यापारी
प्रशासन व्यापार हित बाजार खुलवाए
लॉकडाउन से सभी सेक्टरों में अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई है। ईद पर बाजार खोलने के लिए लोगों के फोन तक आ रहे हैं। जिला प्रशासन को कारोबारियों के हित में बाजार खोलने की सीमित अनुमति देना चाहिए। इससे ईद मनाने वालों की खुशियां दोगुनी हो जाएंगी। कई जिलों में प्रशासन ने सशर्त छूट दी है। -योगेश लखानी, साड़ी-गारमेंट शोरूम
डीएम ने कहा.. राहत के लिए करना होगा इंतजार
बरेली। लॉकडाउन- 4 में केंद्र सरकार ने यह तो घोषणा कर दी कि किन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगी लेकिन किस जिले में क्या राहत दी जाएगी, यह प्रदेश शासन की गाइड लाइन जारी होने के बाद ही साफ हो पाएगा। अफसर यह भी उम्मीद जता रहे हैं कि कोरोना के नए केस मिलने और बरेली के महत्वपूर्ण जंक्शन होने की वजह से बरेली के फिलहाल रेड जोन में ही रहने के आसार हैं। ऐसे में लॉकडाउन में खास ढील की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
लोगों में रविवार सुबह से ही लॉकडाउन-4 की घोषणा को लेकर उत्सुकता थी, हालांकि यह भी साफ ही था कि जिस तरह कोरोना के केस जिले में बढ़ रहे हैं, उसकी वजह से इस जिले को सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिलने वाली। शाम को केंद्र सरकार ने लॉकडाउन-4 को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए लेकिन इसमें क्या राहत दी जा सकती है, यह फैसला राज्यों पर ही छोड़ दिया। अफसरों का कहना है कि यूपी के जिलों में प्रतिबंध और छूट को लेकर शासन की गाइड लाइन जारी होने तक कुछ कहना मुश्किल है। लिहाजा अभी लॉकडाउन की पुरानी स्थिति बनी रहेगी।
खास यह है कि अब राज्य को ही जिलों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन की घोषणा करनी है। 14 दिन पहले केंद्र सरकार की ओर से जारी लिस्ट में बरेली को रेड जोन में रखा गया था। इसके बाद कुछ संक्रमितों के स्वस्थ हो जाने के बाद जिले के ऑरेंज या ग्रीन जोन में जाने की आशा थी लेकिन सिरौली, मीरगंज और बरेली में चार केस मिलने से यह संभावना फिर कमजोर हो गई।
अभी केंद्र की गाइड लाइन ही मिली है जबकि बाजार खोलने और यातायात समेत दूसरी सेवाओं को शुरू करने में क्या राहत और शर्तें रहेगी, यह शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही तय होगा। लिहाजा अभी लॉकडाउन-थ्री की व्यवस्था और प्रतिबंध लागू रहेंगे। -नितीश कुमार, जिलाधिकारी
पुलिस अफसरों का संकेत.. और बढ़ेगी सख्ती, प्रवासी मजदूरों के जरिये सामुदायिक संक्रमण रोकने की चुनौती सामने लिहाजा रियायत की उम्मीद न करें
बरेली।पुलिस अफसरों ने भी साफ किया है कि उनका सबसे ज्यादा जोर फिलहाल इस बात पर रहेगा कि प्रवासी मजदूरों से कोरोना संक्रमण समाज के बड़े वर्ग में न फैल जाए। लिहाजा यह सुनिश्चित करने के लिए चेकिंग में सख्ती और बढ़ाई जा सकती है।
देश में 31 मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ गया है लेकिन राज्यों को नीति निर्धारण करने के ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। इसका असर आगे दिखाई दे सकता है। बिना मास्क लगाए या बिना मुंह ढके घर से बाहर निकले पर 500 रुपये तक का और लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर 1000 रुपये तक का जुर्माना भरना होगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर यह जुर्माना और बढ़ाने का प्रावधान है। वाहन चेकिंग में भी जुर्माना बढ़ाया गया है। सीएम योगी ने सख्ती बरकरार रखने की बात कही है। लिहाजा पुलिस भी उसी मूड में है।
केंद्र सरकार ने इस मामले में राज्य सरकारों को कई अधिकार दिए हैं। एक-दो दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। डीएम भी अपने स्तर से कई निर्णय ले सकेंगे। पुलिस उस व्यवस्था को लागू कराएगी। - अविनाश चंद्र, एडीजी जोन
जिले में प्रवासी मजदूरों से संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इसलिए ज्यादा ढील की संभावना नहीं है। नए लॉकडाउन में कुछ और प्रकार की दुकानें खोलने का प्रावधान है पर पुलिस कहीं भीड़ नहीं लगने देगी। - राजेश पांडेय, डीआईजी
फिलहाल जिले में पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। नए लॉकडाउन में जिला प्रशासन कोई सख्ती या रियायत देगा तो उसका अनुपालन कराया जाएगा। - शैलेश पांडेय, एसएसपी
तहसीलों और आसपास जिलों में खुल रहे हैं प्रतिष्ठान बरेली। लॉकडाउन- 4 की घोषणा होने के साथ यह लगभग तय हो गया कि इस बार ईद भी लॉकडाउन में ही गुजरेगी। पिछले करीब दो महीने में सैकड़ों करोड़ की पहले ही चपत खा चुका गारमेंट बाजार सरकार के इस फैसले से और ज्यादा मायूस हो गया है। हालांकि गारमेंट बाजार लॉकडाउन से मुक्ति मिलने की भी बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहा था लेकिन यह उम्मीद जरूर थी कि जिला प्रशासन अपने स्तर से इतनी राहत दे देगा कि उनके कुछ आंसू पोछने के साथ ईद पर नए कपड़े पहनने की लोगों की तमन्ना भी पूरी हो जाए लेकिन इसका कोई रास्ता बनता फिलहाल नहीं दिख रहा है।
चार दिन बाद लॉकडाउन अपने दो महीने पूरा कर लेगा। लॉकडाउन- 3 तो खैर रविवार को ही खत्म हो गया लेकिन लॉकडाउन-4 दो महीने की सीमा पार कर और आगे तक जाएगा और इसी बीच अलविदा और ईद भी गुजर जाएंगी। हालांकि ज्यादातर लोग जानते थे कि लॉकडाउन- 4 लागू ही होगा लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों यह कहकर कुछ उम्मीद बंधा दी थी कि लॉकडाउन का चौथा चरण कुछ अलग रंग-ढंग का होगा। गारमेंट कारोबारी तभी से यह आशा कर रहे थे कि शायद सरकार लॉकडाउन- 4 लागू करते वक्त इतनी राहत दे देगी कि उनके कारोबार का पहिया धीमे ही सही कुछ घूमना शुरू हो जाएगा लेकिन यह उम्मीद भी आखिरकार टूट ही गई।
गारमेंट कारोबारियों को दूसरी उम्मीद जिला प्रशासन से थी लेकिन यह भी फिलहाल पूरी होती नहीं दिख रही। दरअसल पिछले दिनों डीएम की ओर से कई चुनिंदा कारोबारियों को थोक में अपना माल बेचने की इजाजत दे दी थी। इसके बाद कई दूसरे कारोबा री भी लाइन में लग गए थे लेकिन व्यापारी संगठनों के ही एक गुट ने रायता फैलाकर यह रास्ता भी बंद करा दिया। इसके बाद प्रशासन ने इस मामले में पूरी तरह हाथ खींच लिए हैं।
सदमे में कारोबारी, ऑफसीजन सेल गई और अब ईद भी
ईद पर कई दिन पहले से ही गारमेंट, रेडिमेड, कपड़ा, ड्राईफ्रूट, सेवईं के बाजार में बूम आना शुरू हो जाता था। इस बार यही तय नहीं हो पाया कि बाजार खुलेगा या नहीं। लॉकडाउन जिस वक्त लागू हुआ वह ऑफसीजन सेल का था। ज्यादातर शोरूम पर सेल शुरू भी हो गई थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से कारोबार बंद होने की वजह से करोड़ों का माल गोदामों में डंप होकर रह गया। कुछ उम्मीद ईद से बंधी थी लेकिन वह भी हाथ से निकली जा रही है। गारमेंट कारोबारी इस वजह से भारी तनाव में हैं। उनका कहना है कि ज्यादातर माल उधार और ब्याज पर लिया जाता है। माल क्लियर न होने का साफ मतलब है कि करोड़ों की देनदारी उनके सिर पर बोझ बन जाएगी। कारोबारी कह रहे हैं कि एक-दो दिन में अगर बाजार न खुले तो हालात बदतर हो जाएंगे। सीजन हो तो गारमेंट, रेडीमेड, कपड़ा सेक्टर में हर महीने छह सौ करोड़ तक का कारोबार होता है। इस हिसाब से उनका 11 सौ करोड़ दांव पर लगा हुआ है।लॉकडाउन नोटबंदी से ज्यादा बड़ा झटका
नोटबंदी से कारोबारी उबर नहीं पाए कि लॉकडाउन आ गया। दिल्ली और उत्तर प्रदेश में दूसरे जिलों के ज्यादातर बाजारों में काम हो रहा है। बरेली जिले की तहसीलों में भी काम हो रहा है। अब ईद में कुछ ही दिन बचे हैं इसलिए जिला प्रशासन कुछ प्रतिबंधों के साथ गारमेंट, रेडिमेड, कपड़ा, ड्राई फ्रूट बाजार को खोलने की अनुमति दे देनी चाहिए। - हरदीप सिंह, रेडिमेड गारमेंट कारोबारीगारमेंट कारोबारियों के लिए हालात बदतर
अब तक बाजार खुलने को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। प्रशासन के अफसर व्यापार और व्यापारियों की स्थिति अच्छी तरह जानते हैं। दूसरे जिलों में लगभग सभी बाजार कुछ शर्तों के साथ खुल रहे हैं। जिला प्रशासन दूसरे जिलों की तरह ईद का त्योहार को देखते हुए जल्द व्यापार और जनहित में फैसला ले तो बेहतर है। व्यापारी भी जानते हैं कि जान है जहान है। - राकेश सेठी, होजरी कारोबारीसमझ नहीं आ रहा क्या करे कारोबारी
हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं। लॉकडाउन में बाजार बंद हुए दो महीने होने जा रहे हैं। करोड़ों रुपये की देनदारी और डंप माल देखकर समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। कुछ ही दिनों बाद ईद का त्योहार आने वाला है, जब गारमेंट, रेडीमेड, कपड़ा, ड्राईफ्रूट, फुटवियर का बाजार ज्यादा चमकता है। इसको देखते हुए कारोबारियों ने होली से पहले ही माल मंगा लिया था। जिला प्रशासन बाजार खोलने की सशर्त छूट दे। - नरेेंद्र गुप्ता पप्पू, गारमेंट व्यापारीप्रशासन व्यापार हित बाजार खुलवाए
लॉकडाउन से सभी सेक्टरों में अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई है। ईद पर बाजार खोलने के लिए लोगों के फोन तक आ रहे हैं। जिला प्रशासन को कारोबारियों के हित में बाजार खोलने की सीमित अनुमति देना चाहिए। इससे ईद मनाने वालों की खुशियां दोगुनी हो जाएंगी। कई जिलों में प्रशासन ने सशर्त छूट दी है। -योगेश लखानी, साड़ी-गारमेंट शोरूमडीएम ने कहा.. राहत के लिए करना होगा इंतजार
बरेली। लॉकडाउन- 4 में केंद्र सरकार ने यह तो घोषणा कर दी कि किन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगी लेकिन किस जिले में क्या राहत दी जाएगी, यह प्रदेश शासन की गाइड लाइन जारी होने के बाद ही साफ हो पाएगा। अफसर यह भी उम्मीद जता रहे हैं कि कोरोना के नए केस मिलने और बरेली के महत्वपूर्ण जंक्शन होने की वजह से बरेली के फिलहाल रेड जोन में ही रहने के आसार हैं। ऐसे में लॉकडाउन में खास ढील की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।लोगों में रविवार सुबह से ही लॉकडाउन-4 की घोषणा को लेकर उत्सुकता थी, हालांकि यह भी साफ ही था कि जिस तरह कोरोना के केस जिले में बढ़ रहे हैं, उसकी वजह से इस जिले को सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिलने वाली। शाम को केंद्र सरकार ने लॉकडाउन-4 को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए लेकिन इसमें क्या राहत दी जा सकती है, यह फैसला राज्यों पर ही छोड़ दिया। अफसरों का कहना है कि यूपी के जिलों में प्रतिबंध और छूट को लेकर शासन की गाइड लाइन जारी होने तक कुछ कहना मुश्किल है। लिहाजा अभी लॉकडाउन की पुरानी स्थिति बनी रहेगी।
खास यह है कि अब राज्य को ही जिलों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन की घोषणा करनी है। 14 दिन पहले केंद्र सरकार की ओर से जारी लिस्ट में बरेली को रेड जोन में रखा गया था। इसके बाद कुछ संक्रमितों के स्वस्थ हो जाने के बाद जिले के ऑरेंज या ग्रीन जोन में जाने की आशा थी लेकिन सिरौली, मीरगंज और बरेली में चार केस मिलने से यह संभावना फिर कमजोर हो गई।
अभी केंद्र की गाइड लाइन ही मिली है जबकि बाजार खोलने और यातायात समेत दूसरी सेवाओं को शुरू करने में क्या राहत और शर्तें रहेगी, यह शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही तय होगा। लिहाजा अभी लॉकडाउन-थ्री की व्यवस्था और प्रतिबंध लागू रहेंगे। -नितीश कुमार, जिलाधिकारी
पुलिस अफसरों का संकेत.. और बढ़ेगी सख्ती, प्रवासी मजदूरों के जरिये सामुदायिक संक्रमण रोकने की चुनौती सामने लिहाजा रियायत की उम्मीद न करें
बरेली।पुलिस अफसरों ने भी साफ किया है कि उनका सबसे ज्यादा जोर फिलहाल इस बात पर रहेगा कि प्रवासी मजदूरों से कोरोना संक्रमण समाज के बड़े वर्ग में न फैल जाए। लिहाजा यह सुनिश्चित करने के लिए चेकिंग में सख्ती और बढ़ाई जा सकती है।देश में 31 मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ गया है लेकिन राज्यों को नीति निर्धारण करने के ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। इसका असर आगे दिखाई दे सकता है। बिना मास्क लगाए या बिना मुंह ढके घर से बाहर निकले पर 500 रुपये तक का और लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर 1000 रुपये तक का जुर्माना भरना होगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर यह जुर्माना और बढ़ाने का प्रावधान है। वाहन चेकिंग में भी जुर्माना बढ़ाया गया है। सीएम योगी ने सख्ती बरकरार रखने की बात कही है। लिहाजा पुलिस भी उसी मूड में है।
केंद्र सरकार ने इस मामले में राज्य सरकारों को कई अधिकार दिए हैं। एक-दो दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। डीएम भी अपने स्तर से कई निर्णय ले सकेंगे। पुलिस उस व्यवस्था को लागू कराएगी। - अविनाश चंद्र, एडीजी जोन
जिले में प्रवासी मजदूरों से संक्रमण के मामले सामने आए हैं। इसलिए ज्यादा ढील की संभावना नहीं है। नए लॉकडाउन में कुछ और प्रकार की दुकानें खोलने का प्रावधान है पर पुलिस कहीं भीड़ नहीं लगने देगी। - राजेश पांडेय, डीआईजी
फिलहाल जिले में पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। नए लॉकडाउन में जिला प्रशासन कोई सख्ती या रियायत देगा तो उसका अनुपालन कराया जाएगा। - शैलेश पांडेय, एसएसपी