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बरेलीः रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी 18 घंटे लटकी रही अस्पताल से युवती की छुट्टी

Sat, 18 Apr 2020 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2020 12:24 AM IST
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Even after the report came negative, the girl was discharged from the hospital for 18 hours.
कोरोना संक्रमित रहे लोगों को फूलमाला पहनाकर घर को रवाना करते चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
कोरोना संक्रमित परिवार ने दो निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी डिस्चार्ज न करने का लगाया आरोप
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परिजन बोले- स्वास्थ्य विभाग के अफसर छिपाए रहे रिपोर्ट, हंगामा होने पर मौके पर पहुंची पुलिस
बरेली। कोरोना संक्रमित दपंती को स्वस्थ होने पर घर भेजने के बाद परिवार की एक युवती को दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आने के बाद भी डिस्चार्ज नहीं किया गया। गुरुवार शाम रिपोर्ट आने के बाद भी शुक्रवार दोपहर तक जब युवती को घर नहीं भेजा गया तो उसके परिजन ने हंगामा करते हुए अफसरों से जवाब मांगा। वार्ड में तैनात स्टाफ ने सीएमएस से जानकारी मांगी तो उन्होंने सीएमओ को पत्र लिख दिया। सीएमओ ने देर रात रिपोर्ट की जानकारी मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। शुक्रवार पूर्वान्ह 11 से दोपहर तीन बजे तक चली अफसरों की लिखा-पढ़ी के बाद युवती को घर भेजने पर सहमति बनी।
दरअसल, सुभाषनगर का कोरोना संक्रमित युवक और उसके पांच परिजन को जिला अस्पताल में आइसोलेट कर इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल का स्टाफ मरीजों की देखभाल और इलाज में जुटा है। कोरोना संक्रमित युवक और उसकी पत्नी को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज करने के दौरान जिला अस्पताल के सीएमएस और अन्य अफसरों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। सीएमओ और नोडल अफसर समेत आईडीएसपी की टीम की अगुवाई में दंपती को बुके देकर घर भेज दिया गया। बताया जाता है कि मामले की जानकारी पर सीएमएस ने वार्ड में तैनात डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। वहीं, गुरुवार की शाम इसी परिवार की युवती की दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आई। सीएमओ का कहना है कि देर रात ही उन्होंने युवती को डिस्चार्ज करने के लिए सीएमएस को मेल भेजा था। वहीं, सीएमएस का कहना है कि भर्ती युवती की निगेटिव रिपोर्ट की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसमें उसे डिस्चार्ज करने का जिक्र नहीं था।
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दूसरी ओर, निगेटिव रिपोर्ट की जानकारी भी वार्ड में भर्ती मरीजों को नहीं दी गई। परिजन का आरोप है कि स्टाफ ने रिपोर्ट के बारे में कुछ नहीं बताया। सुबह समाचार पत्रों से रिपोर्ट निगेटिव आने की जानकारी हुई तो उन्होंने स्टाफ से पूछा। स्टाफ ने रिपोर्ट निगेटिव आने की पुष्टि की तो परिजन ने डिस्चार्ज करने के बाबत पूछा, लेकिन वह जवाब नहीं दे सके। सीएमएस ने बगैर सीएमओ के आदेश के डिस्चार्ज न करने की बात कही तो परिजन भड़क गए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर रिपोर्ट छिपाने का आरोप लगाया। मामला बढ़ता देख सीएमएस ने पुलिस बुला ली। परिजन ने पुलिस को भी अस्पताल के अफसरों पर सवाल उठाए। आपस में ही मामला सुलझाने की बात कहकर पुलिसकर्मी चले गए।
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रिपोर्ट निगेटिव आने पर क्यों नहीं दिया डिस्चार्ज करने का आदेश
सीएमएस डॉ. टीएस आर्या ने मामला बढ़ता देख सीएमओ को पत्र लिखकर निगेटिव रिपोर्ट आने पर भी डिस्चार्ज न करने की वजह पूछी। साथ ही, डिस्चार्ज करने की अनुमति देने को भी कहा। पत्र में लिखा है कि रिपोर्ट निगेटिव आने की जानकारी होने पर भर्ती मरीज हंगामा कर रहे हैं। ऐसे में किसी तरह की अप्रिय घटना होने पर उसकी जिम्मेदारी सीएमओ की होगी। पत्र भेजने के बाद लिखित जवाब आने तक वह डिस्चार्ज संबंधी मामले पर खामोश रहे।
रात में ही डिस्चार्ज करने का कहा गया था
सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल का कहना है कि निगेटिव रिपोर्ट आने पर सीएमएस को मेल पर डिस्चार्ज करने की जानकारी देनेे के निर्देश दिए थे। मेल आईडीएसपी सेल की ओर से जिला अस्पताल की ऑफिसियल आईडी पर भेजा गया था। बताया कि लगातार दो रिपोर्ट निगेटिव आने पर सिर्फ युवती को डिस्चार्ज करने को कहा गया था, जबकि परिवार के अन्य सदस्य का एक बार और सैंपल भेजा जाएगा। रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें भी डिस्चार्ज किया जाएगा।

आईडीएसपी की मेल में डिस्चार्ज करने की बात नहीं

जिला अस्पताल के एमएस डॉ. एके गौतम ने बताया कि आईडीएसपी की ओर से भेजे गए मेल में सिर्फ रिपोर्ट की जानकारी दी गई थी। मरीज को डिस्चार्ज करने के बाबत कोई निर्देश नहीं दिया गया था। ऐसे में बगैर अनुमति के डिस्चार्ज करने पर मामला गंभीर हो सकता है। लिहाजा, कोरोना संक्रमित परिजन की ओर से हंगामा होने पर मामले पर सीएमओ का पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई थी।

दोपहर तीन बजे युवती को किया डिस्चार्ज

निगेटिव रिपोर्ट आने के करीब 18 घंटे बाद तक स्वास्थ्य विभाग ने युवती को कोरोना वार्ड में ही कैद रखा। शुक्रवार दोपहर तक चली अधिकारियों की आपसी लिखापढ़ी खत्म होने के बाद युवती को एंबुलेंस के जरिए सीएमओ, सीएमएस, नोडल अफसर डॉ. रंजन गौतम ने घर भेजा। अफसरों के बीच चल रही यह नोंकझोंक जिला अस्पताल समेत सीएमओ कार्यालय में भी चर्चा का विषय बनी रही।

एक पल गुजारना भी मुश्किल

कोरोना वार्ड में भर्ती संक्रमित युवक ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उनका परिवार करीब 20 दिनों से एक ही कमरे में बंद है। ऐसे में पहले भाई और भाभी की रिपोर्ट निगेटिव आई और फिर उन्हें घर भेज दिया गया। दो सदस्यों के घर जाने के बाद भर्ती अन्य सदस्यों में बहन की रिपोर्ट भी निगेटिव आने की जानकारी मिली। ऐसे में उसकी दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आने पर उसके घर जाने की संभावना थी, लेकिन रात भर उन्हें रिपोर्ट की जानकारी नहीं दी गई। इसे लेकर वह रात भर सो नहीं सके। सुबह स्टाफ से जब उन्होंने पूछा तो भी सही जानकारी नहीं मिल सकी। अफसरों से पूछा तो वे भी कुछ बताने को तैयार नहीं थे। बताया कि रो-रोकर वह अफसरों से बहन को घर भेजने की गुहार लगा रहे थे लेकिन किसी ने नहीं सुनी। हंगामा करने के बाबत पूछने पर कहा कि उन्होंने कोई हंगामा नहीं किया, अफसर अपनी गलती छिपाने के लिए बातें बना रहे हैं।

सीएमएस के साथ समन्वय में कोई कमी नहीं है। हम लोग कंधे से कंधा मिलाकर लगातार काम कर रहे हैं। हो सकता है लोवर लेवल के स्टाफ की अतिव्यवस्तता के कारण कोई गैप ऑफ कम्यूनिकेशन हो गया हो, पर हम लोग साथ साथ हैं और साथ साथ मिलकर कोरोना को हराएंगे। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

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