संक्रमण की पुष्टि के बाद से बुजुर्ग सदमे में, अपनों ने फोन करके भी नहीं पूछा हालचाल
संक्रमित होने के बाद घर की याद आई तो भर आईं आंखें
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तीन बुजुुर्गों का बढ़ गया रक्तचाप, आईसीयू में शिफ्ट
बरेली। उम्र के आखिरी पड़ाव पर वृद्धाश्रम का एकांतवास ही उनके लिए किसी सजा से कम नहीं है, उस पर अब कोरोना संक्रमण की पुष्टि ने बुजुर्गों को सदमे में धकेल दिया है। अपनों की बेरुखी के जिन जख्मों को वक्त बमुश्किल भर पाया था, उन्हें कोरोना ने कुरेद दिया है। वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के कोरोना संक्रमित होने की खबर उनके घरवालों को दी गई, लेकिन उधर से उनका हालचाल पूछने के लिए किसी ने फोन तक नहीं किया। अपनों की इस बेरुखी से बुजुर्गों की आंखें भर आईं।
शनिवार को कांधरपुर स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे 70 बुजुर्गों में से सात की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उम्रदराज होने की वजह से लक्षण न होने के बावजूद तत्काल सभी को तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया। उधर, आश्रम की देखभाल करने वालों ने बुजुर्गों के घर फोन करके इसकी सूचना दे दी। इधर, बुजुुर्गों का संक्रमित होना सुर्खियां बना तो आश्रम और अस्पताल संचालकों को आस थी कि सालों से घर से दूर रह रहे बुजुर्गों के घरवाले कम से कम फोन करके जरूर उनका हालचाल पूछेंगे। इससे संक्रमण को लेकर मानसिक तनाव से गुजर रहे बुजुर्गों को राहत मिलेगी, 24 घंटे से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी एक भी बुजुर्ग की उनके परिजन ने फोन कर सुध नहीं ली तो सालों से दबा अपनों की बेरुखी का जख्म फिर हरा हो गया। बुजुर्ग अस्पताल स्टाफ से अपनी तकलीफ साझा कर मन हल्का करने का असफल प्रयास करते रहे।
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देखभाल के लिए तैनात किया स्टाफ
बुजुर्गों को अपनों से दूरी का एहसास न हो इसके लिए अलग से स्टाफ तैनात किया गया है। जो उनकी सभी जरूरतें पूरी कर रहा है। बुजुर्गों से बात हुई तो उन्होंने अस्पताल में किसी तरह की कोई दिक्कत न होने की बात कही। रात में देखरेख में लगे सचिन भारद्वाज ने बताया कि बुजुर्ग घर के बारे में बेहद कम बात कर रहे हैं। जैसे ही कोई उनसे परिवार के बारे में चर्चा करता है तो वे दुखी हो जाते हैं। इसलिए उन्हें खुश रखने का प्रयास किया जा रहा है।
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बुजुर्गों के लिए मानसिक तनाव घातक
सीएमएस डॉ. वागीश वैश के मुताबिक बुजुर्गों के हालचाल लेने के लिए किसी के भी परिजन ने कॉल नहीं की और न ही कोई मिलने पहुंचा। संक्रमण की में मानसिक तनाव से रक्तचाप बढ़ सकता है जो बुजुर्गों के लिए घातक है। उम्र अधिक होने से आमतौर पर उनका ब्लड प्रेशर ज्यादा ही रहता है। तीन बुजुर्गों का ब्लडप्रेशर बढ़ा मिला। कोई दिक्कत न हो इसलिए उन्हें आईसीयू में रखकर देखभाल हो रही है।
आशंका: बाहरी व्यक्ति से पहुंचा वायरस
वृद्धाश्रम के मैनेजर सुधीर मिश्र के मुताबिक शनिवार को बुजुर्गों की सेवा में तैनात स्टाफ के सभी 16 लोगों के सैंपल हुए। सभी निगेटिव हैं। ऐसे में आशंका जताई कि आश्रम में मौजूद 70 बुजुर्गों में से कुछेक के परिजन उनसे मिलने आते हैं। ऐसे में उन्हीं में से कोई संक्रमित रहा होगा, जिनके संपर्क में आने से बुजुुर्ग भी संक्रमित हो गए हैं। बताया कि महीना भर पहले ही शासन ने सैनिटाइजेशन के निर्देश दिए थे। ग्राम प्रधान यह कार्य करा रहे हैं।
बुजुर्गों से बातचीत:
परिवार से किसी का भी फोन नहीं आया है। जब वृद्धाश्रम में भेज ही दिया है तो तबियत की किसे फिक्र है। मुझे परिवार से अब कोई उम्मीद भी नहीं है। सब सुख से रहें यह कामना है। - मेवाराम, बुजुर्ग
हेडपोस्ट ऑफिस में लंबे समय तक सर्विस की। दो बेटियां हैं दोनों की शादी करने के बाद कहीं आसरा नहीं मिला तो वृद्धाश्रम में आ गया। अब तक किसी का फोन नहीं आया है। - हेमंत कुमार, बुजुर्ग
आश्रम में पांच साल से रह रही हूं। दिवाली पर मुझसे कोई भी मिलने नहीं आया। वृृद्धाश्रम और अस्पताल दोनों ही जगहों पर मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई है। सब लोगों से बात हो रही है। - अर्चना सक्सेना, बुजुर्ग
तीन बुजुुर्गों का बढ़ गया रक्तचाप, आईसीयू में शिफ्ट बरेली। उम्र के आखिरी पड़ाव पर वृद्धाश्रम का एकांतवास ही उनके लिए किसी सजा से कम नहीं है, उस पर अब कोरोना संक्रमण की पुष्टि ने बुजुर्गों को सदमे में धकेल दिया है। अपनों की बेरुखी के जिन जख्मों को वक्त बमुश्किल भर पाया था, उन्हें कोरोना ने कुरेद दिया है। वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के कोरोना संक्रमित होने की खबर उनके घरवालों को दी गई, लेकिन उधर से उनका हालचाल पूछने के लिए किसी ने फोन तक नहीं किया। अपनों की इस बेरुखी से बुजुर्गों की आंखें भर आईं।
शनिवार को कांधरपुर स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे 70 बुजुर्गों में से सात की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उम्रदराज होने की वजह से लक्षण न होने के बावजूद तत्काल सभी को तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया। उधर, आश्रम की देखभाल करने वालों ने बुजुर्गों के घर फोन करके इसकी सूचना दे दी। इधर, बुजुुर्गों का संक्रमित होना सुर्खियां बना तो आश्रम और अस्पताल संचालकों को आस थी कि सालों से घर से दूर रह रहे बुजुर्गों के घरवाले कम से कम फोन करके जरूर उनका हालचाल पूछेंगे। इससे संक्रमण को लेकर मानसिक तनाव से गुजर रहे बुजुर्गों को राहत मिलेगी, 24 घंटे से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी एक भी बुजुर्ग की उनके परिजन ने फोन कर सुध नहीं ली तो सालों से दबा अपनों की बेरुखी का जख्म फिर हरा हो गया। बुजुर्ग अस्पताल स्टाफ से अपनी तकलीफ साझा कर मन हल्का करने का असफल प्रयास करते रहे।
देखभाल के लिए तैनात किया स्टाफ
बुजुर्गों को अपनों से दूरी का एहसास न हो इसके लिए अलग से स्टाफ तैनात किया गया है। जो उनकी सभी जरूरतें पूरी कर रहा है। बुजुर्गों से बात हुई तो उन्होंने अस्पताल में किसी तरह की कोई दिक्कत न होने की बात कही। रात में देखरेख में लगे सचिन भारद्वाज ने बताया कि बुजुर्ग घर के बारे में बेहद कम बात कर रहे हैं। जैसे ही कोई उनसे परिवार के बारे में चर्चा करता है तो वे दुखी हो जाते हैं। इसलिए उन्हें खुश रखने का प्रयास किया जा रहा है।बुजुर्गों के लिए मानसिक तनाव घातक
सीएमएस डॉ. वागीश वैश के मुताबिक बुजुर्गों के हालचाल लेने के लिए किसी के भी परिजन ने कॉल नहीं की और न ही कोई मिलने पहुंचा। संक्रमण की में मानसिक तनाव से रक्तचाप बढ़ सकता है जो बुजुर्गों के लिए घातक है। उम्र अधिक होने से आमतौर पर उनका ब्लड प्रेशर ज्यादा ही रहता है। तीन बुजुर्गों का ब्लडप्रेशर बढ़ा मिला। कोई दिक्कत न हो इसलिए उन्हें आईसीयू में रखकर देखभाल हो रही है।आशंका: बाहरी व्यक्ति से पहुंचा वायरस
वृद्धाश्रम के मैनेजर सुधीर मिश्र के मुताबिक शनिवार को बुजुर्गों की सेवा में तैनात स्टाफ के सभी 16 लोगों के सैंपल हुए। सभी निगेटिव हैं। ऐसे में आशंका जताई कि आश्रम में मौजूद 70 बुजुर्गों में से कुछेक के परिजन उनसे मिलने आते हैं। ऐसे में उन्हीं में से कोई संक्रमित रहा होगा, जिनके संपर्क में आने से बुजुुर्ग भी संक्रमित हो गए हैं। बताया कि महीना भर पहले ही शासन ने सैनिटाइजेशन के निर्देश दिए थे। ग्राम प्रधान यह कार्य करा रहे हैं।बुजुर्गों से बातचीत:
परिवार से किसी का भी फोन नहीं आया है। जब वृद्धाश्रम में भेज ही दिया है तो तबियत की किसे फिक्र है। मुझे परिवार से अब कोई उम्मीद भी नहीं है। सब सुख से रहें यह कामना है। - मेवाराम, बुजुर्ग
हेडपोस्ट ऑफिस में लंबे समय तक सर्विस की। दो बेटियां हैं दोनों की शादी करने के बाद कहीं आसरा नहीं मिला तो वृद्धाश्रम में आ गया। अब तक किसी का फोन नहीं आया है। - हेमंत कुमार, बुजुर्ग
आश्रम में पांच साल से रह रही हूं। दिवाली पर मुझसे कोई भी मिलने नहीं आया। वृृद्धाश्रम और अस्पताल दोनों ही जगहों पर मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई है। सब लोगों से बात हो रही है। - अर्चना सक्सेना, बुजुर्ग