जब बच्चे नहीं स्कूल में तो कौन खाएगा मील
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जब स्कूल में बच्चे ही नहीं आएंगे तो कौन खाएगा मिड-डे मील और किसके लिए बनेगा मील ? यह सवाल चुनौती है प्रशासन के सामने। गर्मी की छुट्टी में भी मिड-डे मील बंटवाने का सरकार का आदेश पहले ही दिन लगभग फेल नजर आया। शनिवार को जिले के कुछ ही स्कूलों में मिड-डे मील बंट पाया। कई स्कूलों में ताला लटका था तो कई स्कूलों में खुले होने के बावजूद भी बच्चे नहीं आये। मिड-डे मील बांट रही संस्था ने भी शिक्षा अधिकारियाें को पत्र सौंपकर निवेदन किया है कि वह स्थिति स्पष्ट करें, ताकि खाना बर्बाद न हो। शनिवार को शहर में सौ से कम बच्चों ने ही खाना खाया।
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की ओर से सूखा और बाढ़ ग्रस्त इलाकों में मिड-डे मील बंटवाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य में शिक्षकाें की मदद ली जाएगी। शुक्रवार से मिड-डे मील बंटना था, लेकिन आदेश सभी प्रधानाध्यापकाें तक न पहुंचने से इसे शनिवार से लागू किया गया। पहले ही दिन मिड-डे मील खाने के लिए बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे। वहीं कई स्कूलों में शिक्षकाें के नहीं आने के चलते ताला लगा रहा। खंड शिक्षा अधिकारियाें ने भी कई स्कूलों के दौरे कर मिड-डे मील वितरण की स्थिति जानी।
नगर के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिंह पवार ने बताया कि उन्होंने आठ स्कूलों का दौरा किया। जिसमें केवल एक स्कूल में केवल दो बच्चों ने मिड-डे मील खाया, बाकी स्कूलों में छात्र ही नहीं आए थे। जूनियर हाईस्कूल भूड़, प्राथमिक विद्यालय शाहाबाद, सैदपुरिया, कोहाड़ापीर और बानखाना में एक भी बच्चे नहीं आए।
एमडीएम वितरण संस्था भी परेशान
मिड-डे मील बांटने वाली संस्था राष्ट्रीय निर्मल उत्थान समिति ने शनिवार की स्थिति देखते हुए एक पत्र बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी को लिखा है। इसमें कहा गया है कि मिड-डे मील खाने को स्कूल में बच्चे नहीं आ रहे हैं। इससे खाना बर्बाद हो रहा है। संस्था प्रमुख सुरेश का कहना है कि शनिवार को बचा खाना गरीबाें में बंटवाया गया, स्कूल में बच्चे ही नहीं थे।