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15 दिन बाद कंपोजिट ग्रांट की होगी जांच, घपला तो नपेंगे बीएसए और बीएसए
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बरेली। डीएम की समीक्षा में बेसिक शिक्षा विभाग में व्याप्त गड़बड़ियां और घपले एक के बाद एक उजागर हुए। स्कूल मरम्मत के लिए मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट की रकम की भी सभी स्कूलों में एबीएसए से जांच कराने को कहा गया है। गौरतलब है कि प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश पर सीडीओ ने कंपोजिट ग्रांट की जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां पकड़ी थीं। डीएम ने चेतावनी दी है कि 15 दिन बाद फिर से जांच होगी। गड़बड़ी मिली तो टीचर तो जाएंगे ही, बीएसए और एबीएसए पर भी कार्रवाई होगी। इसके अलावा बीएसए तनुजा त्रिपाठी को समय सीमा के अंदर सौ फीसदी स्वेटर वितरण सुनिश्चित करने के लिए सप्लायर को बुलाने के निर्देश दिए। डीएम ने बच्चों को यूनिफार्म वितरण की जांच करके उसकी रिपोर्ट देने को कहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग में एक के एक बाद गड़बड़ी के उजागर होने के बाद डीएम नितीश कुमार ने बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में बीएसए सहित कई अधिकारियों को बुलाया था। स्वेटर वितरण के मामले में डीएम को बताया गया कि प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के 3.37 लाख बच्चों के लिए प्रति स्वेटर 200 रुपये का बजट निर्धारित है। इस तरह करीब पौने सात करोड़ से यह खरीद होनी है। सर्दी शुरू होने के बावजूद बच्चों को स्वेटर न मिलने पर डीएम को बताया गया कि अभी तीन ब्लॉकों के लिए करीब 58 हजार स्वेटर मिल गए हैं। स्वेटर वितरण की समय सीमा एक नवंबर से बढ़ाकर 24 नवंबर तक कर दी गई है। डीएम ने कहा कि इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। बच्चों को यूनिफार्म न मिलने का मामला उठा तो बताया गया कि 90 फीसदी बच्चों को यूनिफार्म दे दी गई है। डीएम ने वितरण की हकीकत जानने के लिए सभी स्कूलों में यूनिफार्म वितरण की जांच के आदेश दिए। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने डीएम को बताया कि प्रभारी मंत्री के आदेश के बाद 2183 प्राइमरी स्कूलों को पांच हजार और 794 जूनियर हाईस्कूलों को 10 हजार रुपये की कंपोजिट ग्रांट मिली थी। इसमें 10 फीसदी स्कूलों की जांच में कई गड़बड़ी मिली हैं। इस पर डीएम ने बीएसए से सभी स्कूलों के जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
ट्रेनिंग, आउटडोर एक्टिविटी सहित कई मद का आठ करोड़ दबाए हैं अफसर
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की ट्रेनिंग, बच्चों के लिए आउटडोर एक्टिविटी सहित दूसरे मदों के लिए शासन से करीब आठ करोड़ रुपये जारी हुआ था, इसे अब तक खर्च नहीं किया गया है। डीएम ने इस पर नाराजगी जाहिर की है।
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प्रत्येक स्कूल के दो कक्षों में लगेंगे टाइल्स, 600 स्कूलों की बनेगी बाउंड्रीवाल
डीएम ने बीएसए को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्कूल के दो क्लास रूम में टाइल्स लगवाएं। करीब छह सौ स्कूलों की बाउंड्रीवाल भी नहीं बनी हैं। सीडीओ को निर्देशित किया कि यह काम ग्राम निधि या मनरेगा से कराया जाए।
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बेसिक शिक्षा विभाग में एक के एक बाद गड़बड़ी के उजागर होने के बाद डीएम नितीश कुमार ने बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में बीएसए सहित कई अधिकारियों को बुलाया था। स्वेटर वितरण के मामले में डीएम को बताया गया कि प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के 3.37 लाख बच्चों के लिए प्रति स्वेटर 200 रुपये का बजट निर्धारित है। इस तरह करीब पौने सात करोड़ से यह खरीद होनी है। सर्दी शुरू होने के बावजूद बच्चों को स्वेटर न मिलने पर डीएम को बताया गया कि अभी तीन ब्लॉकों के लिए करीब 58 हजार स्वेटर मिल गए हैं। स्वेटर वितरण की समय सीमा एक नवंबर से बढ़ाकर 24 नवंबर तक कर दी गई है। डीएम ने कहा कि इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। बच्चों को यूनिफार्म न मिलने का मामला उठा तो बताया गया कि 90 फीसदी बच्चों को यूनिफार्म दे दी गई है। डीएम ने वितरण की हकीकत जानने के लिए सभी स्कूलों में यूनिफार्म वितरण की जांच के आदेश दिए। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने डीएम को बताया कि प्रभारी मंत्री के आदेश के बाद 2183 प्राइमरी स्कूलों को पांच हजार और 794 जूनियर हाईस्कूलों को 10 हजार रुपये की कंपोजिट ग्रांट मिली थी। इसमें 10 फीसदी स्कूलों की जांच में कई गड़बड़ी मिली हैं। इस पर डीएम ने बीएसए से सभी स्कूलों के जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
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ट्रेनिंग, आउटडोर एक्टिविटी सहित कई मद का आठ करोड़ दबाए हैं अफसर
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की ट्रेनिंग, बच्चों के लिए आउटडोर एक्टिविटी सहित दूसरे मदों के लिए शासन से करीब आठ करोड़ रुपये जारी हुआ था, इसे अब तक खर्च नहीं किया गया है। डीएम ने इस पर नाराजगी जाहिर की है।
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प्रत्येक स्कूल के दो कक्षों में लगेंगे टाइल्स, 600 स्कूलों की बनेगी बाउंड्रीवाल
डीएम ने बीएसए को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्कूल के दो क्लास रूम में टाइल्स लगवाएं। करीब छह सौ स्कूलों की बाउंड्रीवाल भी नहीं बनी हैं। सीडीओ को निर्देशित किया कि यह काम ग्राम निधि या मनरेगा से कराया जाए।