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कक्षा में बच्चे को फीस डिफाल्टर कहकर चिढ़ाया तो मामला गरमाया

Tue, 10 Sep 2019 02:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2019 02:42 AM IST
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सीबीगंज। समय पर फीस जमा न कर पाने पर डीपीएस में चौथी में पढ़ने वाले एक बच्चे को जब उसके साथियों ने फीस डिफाल्टर कहकर चिढ़ाया और इसके बाद प्रबंधन ने भी उसके स्कूल आने पर पाबंदी लगा दी तो क्षुब्ध होकर उसकी मां उसके साथ स्कूल गेट पर ही धरने पर बैठ गई। इसके बाद अभिभावक संघ के जरिये यह मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा तो स्कूल प्रबंधन बैकफुट पर आ गया। हालांकि बच्चे की मां स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई पर अड़ गई है।
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डीपीएस में चौथी में पढ़ने वाले बच्चे की मां का आरोप है कि दूसरे क्वार्टर की फीस जमा करने पर कुछ देरी होने पर उनके बेटे को स्कूल आने से रोक दिया गया। बच्चे की फीस जमा न होने की बात भी सार्वजनिक कर दी गई। इस वजह से क्लास के दूसरे बच्चों ने उसे फीस डिफाल्टर कहकर चिढ़ाना शुरू कर दिया। ट्रांसपोर्ट इंचार्ज ने उनके बेटे को बस में चढ़ने तक से रोक दिया गया। महिला का आरोप है कि सोमवार को वह अपने बेटे को लेकर स्कूल पहुंची तो वहां उनकी बात सुनने के बजाय उनसे बदसलूकी की गई। उनसे यह तक कहा गया कि डीपीएस की फीस देने की हैसियत नहीं है तो उसे यहां क्यों पढ़ा रही हो। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने उन्हें गेट से बाहर निकाल दिया। महिला इसके बाद बेटे के साथ स्कूल गेट पर ही धरने पर बैठ गई। अभिभावक संघ के पदाधिकारियों को फोन किया तो अध्यक्ष अंकुर सक्सेना समेत कई लोग स्कूल पहुंचे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई गई। अंकुर ने कहा कि दोबारा इस तरह की घटना हुई तो अभिभावक संघ विरोध करेेगा।
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स्कूल ने कहा- पिछले साल की भी फीस बकाया, महिला बोली- झूठ बोल रहे हैं
स्कूल के प्रिंसिपल वेदप्रकाश मिश्रा ने बताया कि बच्चे पर इस सत्र में सेकेंड क्वार्टर की ही नहीं, पिछले सालों की भी फीस का करीब 37-38 हजार रुपये बकाया हैं। उन्होंने बच्चे की मां से फीस के लिए कहा तो उन्होंने जमा करने का वादा तो किया लेकिन जब इसके लिए प्रार्थनापत्र मांगा तो विरोध शुरू कर दिया। प्रिंसिपल का कहना है कि अगर फीस नहीं मिलेगी तो स्कूल कैसे चलेगा। बच्चे को फीस डिफाल्टर कहकर चिढ़ाने के आरोपों को उन्होंने गलत बताया। कहा, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। किसी शिक्षक ने बच्चे से ऐसा नहीं बोला। उधर, बच्चे की मां का कहना है कि स्कूल के आरोप गलत हैं। सिर्फ सेकेंड सेमेस्टर की फीस बाकी है। स्कूल में तमाम और बच्चों पर भी फीस बकाया है लेकिन स्कूल सिर्फ उन्हें प्रताड़ित कर रहा है।
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फीस डिफाल्टर गलत शब्द
वैसे फीस बकाया होना बड़ी समस्या है क्योंकि इसकी वजह से स्कूल चलाना मुश्किल हो जाता है। फिर भी ऐसे मामले बहुत ही गंभीरता से लिए जाने चाहिए। बच्चों को फीस डिफाल्टर तो नहीं बोलना चाहिए। इस तरह की घटनाओं पर स्कूल को ध्यान देना चाहिए। - डॉ. आरके शर्मा, डायरेक्टर, एसआर इंटरनेशनल स्कूल

गलत हैं महिला के आरोप
मैंने इस मामले की जांच की है। स्कूल प्रबंधन बच्चे की मां से सिर्फ यह जानना चाह रहा था कि वह उसकी फीस कब तक जमा करेंगी। बगैर फीस के स्कूल को अपनी जरूरी जिम्मेदारियां पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। बच्चे को फीस डिफाल्टर बोलने के आरोप गलत हैं। - पारुष अरोरा, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन

बच्चे को बाहर नहीं निकाल सकते
फीस न जमा होने पर भी स्कूल बच्चे को बाहर नहीं निकाल सकता है। स्कूल प्रबंधन को इस बारे में स्पष्ट कह दिया गया है। अगर भविष्य में दोबारा ऐसा किया जाएगा तो अभिभावक संघ स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगा। - अंकुर शर्मा, अध्यक्ष, अभिभावक संघ


मनोवैज्ञानिक की राय 
कुंठित हो जाएगा बच्चा
ऐसी घटनाओं से बच्चों में हीनभावना आती है और सहपाठियों से उनके स्वस्थ संबंध नहीं रहेंगे। पढ़ाई में भी बच्चे का मन नहीं लगेगा। इससे उसके सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक संबंध खराब होंगे और उस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बच्चा अगर इस घटना को मन पर गहराई से ले लेगा तो उससे व्यक्तित्व पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- डॉ. सुविधा शर्मा, मनोवैज्ञानिक
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