{"_id":"62beb3ca4f5910774f23f6fb","slug":"dysformia-the-virtual-world-gave-the-youth-another-psychiatric-disorder","type":"story","status":"publish","title_hn":"डिस्फॉर्मिया : ये युवा... सीरत से बेखबर गढ़ी हुई सूरत के दीवाने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डिस्फॉर्मिया : ये युवा... सीरत से बेखबर गढ़ी हुई सूरत के दीवाने
Fri, 01 Jul 2022 02:13 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
इशिता अग्रवाल, बरेली
इशिता अग्रवाल, बरेली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 01 Jul 2022 02:13 PM IST
सार
कैमरों के फिल्टर के जरिए दिखने वाले नए और खूबसूरत चेहरे की असल जिंदगी में चाहत तनावग्रस्त बना रही है।
विज्ञापन
मोबाइल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कर्मचारी नगर में एक युवती ने अमेरिकी एप स्नैपचैट पर उपलब्ध फिल्टर का इस्तेमाल कर खींची गई अपनी फोटो रिश्ते के लिए भेजा लेकिन युवक ने उसके रंग का मजाक बनाते हुए इन्कार कर दिया। इसके बाद गहरे अवसाद में आ जाने की वजह से मनोरोग विशेषज्ञ से उसका इलाज कराना पड़ रहा है। मनोरोग विशेषज्ञ उसे कुदरती सुंदरता के साथ सीरत और आत्मविश्वास के भी मायने समझा रहे हैं। युवती ने रिश्ता तय करने के लिए फिल्टर से बनाई गई तस्वीर भेजने का नादानी भरा काम किया, उसे मनोरोग विशेषज्ञों ने बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर नाम दिया है।
विज्ञापन
यह डिसऑर्डर दिन-रात आभासी दुनिया में कैद युवाओं की विश्वव्यापी समस्या के रूप में उभरा है। बरेली जैसे सामान्य शहर में भी इस डिसऑर्डर के तमाम केस हैं, जो यह बताने के लिए काफी है कि आभासी दुनिया किस कदर उनके दिलोदिमाग को प्रभावित कर उन्हें असल जीवन और उसकी जरूरतों से दूर ले जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मनोरोग किशोरों और युवाओं में पैदा हो रहा है।
विज्ञापन
वे सोशल मीडिया और तमाम दूसरे प्लेटफार्म पर मौजूद फिल्टरों का इस्तेमाल कर खुद का एक नया और खूबसूरत रूप देख रहे हैं और उससे इस कदर सम्मोहित हो रहे हैं कि असल जिंदगी में भी वैसा ही रूप पाने की नादानी भरी कोशिशें कर रहे हैं। अपना असल चेहरा और शरीर उन्हें नहीं भा रहा है।
विज्ञापन
फितूर इस कदर... दुनिया भर में बढ़े प्लास्टिक सर्जरी के केस
माना जा रहा है कि कोरोना ने दुनिया भर में लोगों की टेक्नोलॉजी पर और ज्यादा निर्भरता बढ़ाई। लंबे लॉकडाउन के दौरान वीडियो कॉल, जूम मीटिंग जैसे एप की बदौलत ठहरी हुई जिंदगी को रफ्तार मिली। मुश्किलें आसान करने के लिए नए-नए एप आते रहे। नया और खूबसूरत चेहरा गढ़ने वाला कैमरा फिल्टर भी इसी दौर में और विकसित हुआ। जूम मीटिंग लोगों के जीवन का हिस्सा बनी तो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ शाडी कौरोष ने 2020-21 में इस मानसिक स्थिति को जूम डिस्मॉर्फिया नाम दिया। 2018 में एक चिकित्सकीय पत्रिका में इसे अमेरिकी एप्लिकेशन स्नैपचैट से जोड़कर स्नैपचैट डिस्मॉर्फिया कहा गया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक 2019 से इसके कारण प्लास्टिक सर्जरी के केस तेजी से बढ़े। कई देशों में ये केस 72 फीसदी तक बढ़े। 2020 में गूगल सर्च ट्रेंड के हालिया विश्लेषण के मुताबिक लोगों ने इस दौरान चेहरे से जुड़ी समस्याओं के निवारण सबसे ज्यादा सर्च किए।
केस-1
मॉडल टाउन में रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी को इंस्टाग्राम के फिल्टर का इस्तेमाल कर रील बनाना पसंद था। वह अपने माता-पिता से अक्सर अच्छे होठों पर चर्चा करने लगी। फिर कहने लगी कि फिल्टर में उसके होठ ज्यादा बड़े और आकर्षक लगते हैं। इसका दोष उसने अपने माता-पिता को देना शुरू कर दिया। किशोरी की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके माता-पिता एक साइकोलॉजिस्ट से इसका काउंसलिंग करा रहे हैं।
केस- 2
नॉर्थ सिटी में रहने वाले 18 साल के यूट्यूबर को अपनी काली आंखें नापसंद थी। वह अक्सर वीडियो बनाने के लिए ऐसा फिल्टर इस्तेमाल करता था जिसमें उसकी आंखें नीली दिखती थीं। उसने अपने माता-पिता से अपनी आंखों के रंग बदलवाने की बात कही। उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया तो उसने सर्जरी के लिए पैसे उधार लेने शुरू कर दिए। इसके बाद उसके माता-पिता उसे एक मनोरोग विशेषज्ञ के पास ले गए। लंबी काउंसलिंग के बाद उसने यह जिद छोड़ी।
ऐसे बढ़ता है ये मनोरोग
बरेली कॉलेज की साइकोलॉजी विभाग की शिक्षक डॉ. सुविधा शर्मा कहती हैं कि सभी खुद को बदलना चाहते हैं लेकिन जब यह इच्छा पागलपन में बदल जाए तो इसे डिस्मॉर्फिया कहते हैं। आजकल युवा कभी घरेलू उपायों तो कभी पार्लर ट्रीटमेंट के जरिए खुद को बदलने की कोशिश करते हैं। नाकामी उन्हें तनाव में ले जाती है। समस्या गंभीर होने पर भूख न लगना, बेचैनी, काम में मन न लगना, दूसरों से खुद की तुलना करना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को खुद को स्वीकार करना और अपने व्यक्तित्व की इज्जत करना सिखाएं। उन्हें बताएं कि ऊपरी सुंदरता से ज्यादा लोग उनकी भीतरी सुंदरता से प्रभावित होते हैं।
अपना कौशल बढ़ाएं
इस मनोस्थिति के शिकार युवाओं को अपना कौशल बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। समझना चाहिए कि प्लास्टिक सर्जरी के क्या नुक़सान हैं और उससे मनचाहे नतीजे की कोई गारंटी नहीं होती। इंटरनेट पर उपलब्ध फिल्मी सितारों की असल जीवन के बारे में भी पढ़ना चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि उनमें कुछ अलग नहीं है।