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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Durga on untouchability is hit

छुआछूत पर प्रहार है चंडालिका

Sun, 31 Jan 2016 01:36 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 31 Jan 2016 01:36 AM IST
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बरेली। सदियों से चली आ रही छुआछूत, ऊंचनीच, भेदभाव, जातपात की प्रथा आज भी कायम है। भले ही समय अनुसार उसका रूप और तरीका बदल गया है। जाति और धर्म के आधार पर चुनाव जीता जाता है। अपने और पराय के आधार पर लोग पहचाने जाते हैं। इसी सोच पर प्रहार करता नाटक चंडालिका संवादों के माध्यम से नई व्यवस्था नई सोच लाने को प्रेरित करता है।
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नाटक में चंडालिका की बेटी प्रकृति द्वारा बोला गया संवाद जो मुझे मानता है मैं उसे मानती हूं। जो समाज हमें मानता मैं उसे मानती हूं। जो धर्म मेरा सम्मान करता है मैं उसका सम्मान करती हूं। वो धर्म किस काम का जो बांटता है अपमानित करता है। यह संवाद छुआछूत के खिलाफ क्रांति का आह्वान है। इसमें ही पूरे नाटक का सार छुपा हुआ है।
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यह भगवान गौतम बुद्ध के दौर की घटना पर आधारित नाटक है। इसमें जादू टोना करने वाली चंडालिका मुख्य भूमिका में है। उसकी एक कन्या प्रकृति भी होती। जिसे समाज अछूत मान कर अपने पास नहीं आने देता। वह दही बेचने वाला हो, चूड़ी या अन्य वस्तु बेचने वाली महिलाएं वह भी उससे दूर रहते हैं। इस कहानी में एक बार गौतम बुद्ध जाते हुए पानी पीने के लिए चंडालिका के घर आ जाते हैं। पीने को पानी मांगते हैं मगर वह खुद को अछूत बता कर पानी पिलाने से झिझकती है। फिर भी वह उसके हाथों से पानी पीते हैं और चले जाते हैं।
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इस बात पर खुद के प्रति सम्मान महसूस करते हुए प्रकृति उनसे प्रेम करने लगती है। वह उनके दुबारा आने के इंतजार करती है। मां उसे समझाती है। एक बार फिर भगवान बुध उसके घर के सामने से गुजरते हैं और उसकी ओर देखे बिना ही चले जाते हैं। इसका उसे बहुत दुख होता है। वह इसे अपना अपमान समझती है और अपनी मां से नागपाश मंत्र के जरिए उन्हें बुलाने की जिद करती है। मां चंडालिका मंत्र का जतन करती है। मंत्र के तेज प्रभाव से वह मूर्छित हो जाती है। अंत में भगवान बुद्ध आते हैं और फिर दोनों ही सन्यासिनी के तौर पर उनकी शरण में चली जाती हैं। नाटक यहीं पर खत्म होता है।
ठाकुर रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा 1933 में लिखी गई इस नाटक की कहानी आज भी उनती ही सच लगती है।  नाटक को अपने निर्देशन से सजया प्रसिद्ध निर्देशक उषा गांगुली ने। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और संगीत श्रेष्ट रहा। नाटक का मंचन  रंगकर्मी थियेटर ग्रुप कोलकाता की ओर से विंडरमेयर में प्रस्तुत किया गया। अंत में आरबीएमआई की निदेशक बीना माथुर ने उषा गांगुली को शाल और बुके देकर सम्मानित किया।   

थियेटर फेस्ट का सफलता पूर्वक समापन  
बरेली। दया दृष्टि रंगविनायक रंगमंडल की ओर से विंडरमेयर में चल रहे थियेटर फेस्ट का समापन हो गया। दया दृष्टि के चेयरमैन डा. ब्रिजेश्वर सिंह के संयोजन में होने वाला यह नाट्य महोत्सव सफल रहा। इसमें सीईओ शिखा सिंह, डा. गरिमा सिंह, डा. शालिनी अरोड़ा, शिवानी रेकी, भुवनेश्वर सिंह, चरन कमल जीत सिंह, संजीव अग्रवाल, नवीन कालरा, दानिश खान, स्मिता श्री, रईस खान, विनोद यजुर्वेदी, गोपिका आदि कार्यक्रम की रीढ़ रहे।  
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