{"_id":"592886594f1c1b6403537849","slug":"due-to-a-child-thief-the-police-ran-the-woman-it-was-a-lot-of-drama","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चा चोर समझकर पुलिस ने महिला को दौड़ा लिया, खूब ड्रामा हुआ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चा चोर समझकर पुलिस ने महिला को दौड़ा लिया, खूब ड्रामा हुआ
बरेली।
Updated Sat, 27 May 2017 01:28 AM IST
विज्ञापन
Due to a child thief, the police ran the woman, it was a lot of drama
- फोटो : Due to a child thief, the police ran the woman, it was a lot of drama
बच्चा चोरी होने की दहशत शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल में साफ दिख रही थी। यहां वार्ड में प्रवेश पर तीमारदाराें का प्रतिबंध लगा दिया गया था। पुलिस पूछताछ के लिए सीएमएस कमरे में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी, तभी टीवी पर एक महिला छाता लेकर मुंह को कपड़े से ढक कर निकली। पुलिस को शक हुआ तो वे सीएमएस कमरे से बाहर निकलकर महिला को आवाज लगाने लगे। महिला पुलिस को देखकर ही भागने लगी। पुलिस ने महिला को दौड़ा लिया। भीड़ ने महिला को पकड़ा, लेकिन वह तीमारदार निकली।
पुलिस को देखकर भागी महिला सीधे इमरजेंसी पहुंची। यहां पुलिस को देखकर भीड़ लग गई। महिला पुलिस को देखकर फिर डर गई और जाकर एक कमरे मे खुद को बंद कर लिया। पुलिस के आने तक लोगाें ने कमरे को बाहर से बंद कर दिया। जब पुलिस आई तो उसने कमरा खोला। महिला पर पुलिस को चोरनी होने का शक था। उन्होंने पूछताछ शुरू की तो महिला रोने लगी। वह कहने लगी कि मेरा फोटो मत खिचवाओं। पुलिस ने तुरंत महिला अस्पताल से बच्चा गुम होने के पीड़ित नेकपाल को बुलवाया और पहचान के लिए कहा। महिला ने मुंह ढक कर दिखाया। नेकपाल सिर पकड़ कर बैठ गया लेकिन पहचान न सका और रोने लगा। पुलिस ने महिला से अस्पताल आने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके पिता पुरुष वार्ड में भर्ती हैँ। महिला ने अपने पिता से पुलिस को मिलवाया। संतुष्ट होने पर पुलिस लौट आई। पुलिस ने भागने का कारण पूछा तो उसने बताया कि वह डर गई थी। पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। एक घंटे तक यह ड्रामा चला।
- महिला रोज घूमती है महिला अस्पताल, पुलिस ने पकड़ा भी है
जिला अस्पताल में जिस महिला को पुलिस ने दौड़ाया है वह रोज महिला अस्पताल में देखी जाती हैं। इनका ठिकाना ओपीडी के बाहर और हृदय रोग विभाग के आसपास रहता है। महिला ने भले ही पुलिस को अपने पिता को भर्ती दिखाया हो लेकिन यह कई लोगाें को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए पैसे लेती है। पिछले दिनाें हृदय रोग विभाग में इस महिला का एक मरीज भर्ती था। दो साल पहले इस महिला को तथा कथित दलाल बताकर पुलिस ने हिरासत में लिया था, लेकिन छूटने के बाद यह फिर जिला अस्पताल में आ गई। बच्चा चुराने में इसका कोई हाथ है कि नहीं इसको लेकर पुलिस ने ज्यादा पूछताछ इस महिला से नहीं की।
विज्ञापन
महिला अस्पताल ने बच्चा चोरी कांड से भी नहीं लिया सबक
सुबह 11 से 1 और शाम 5 से 7 बजे तक तीमारदारों का मिलने का समय है। बच्चा चोरी होने की घटना के बाद सख्ती के रूप में केवल महिला सिपाही ने गेट बंद कर रखा है। सिफारिश के बाद उन्हें भी अंदर जाने दिया जा रहा है। कौन सा बच्चा किसका है यह ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों को पता नहीं होता है, लेकिन फिर भी कोशिश रहती है कि बच्चों को उनके पिता व मां ही लेकर जाएं। अगर सामान्य डिलीवरी हुई है तो बच्चा वार्ड से बच्चे को लाने की जगह उसकी मां को ही वहां जाकर दूध पिलाने की जिम्मेदारी है। लेकिन तीमारदार और रिश्तेदार बच्चे को ही इधर- उधर करते रहते हैं। यहां मौजूद सिपाही साधना शर्मा ने बताया कि अगर कोई बच्चे को दूध पिलाने के लिए लाता या ले जाता है तो उसका भर्ती कार्ड देखा जाता है जो एनआईसीयू से बनता है। इसके अलावा न तो किसी की एंट्री होती है और न ही कोई कार्ड जारी होता है।
मैने कह रखा है कि आने और जाने वालाें का एक रजिस्टर तैयार हो और उनका आईकार्ड जमा किया जाए। जब वे वार्ड से बाहर जाएं तो कार्ड वापस दें। किसी को भी एक साथ न जाने दें। स्तनपान कराने बच्चों को न लाएं बल्कि माताएं वहां जाएं। अब इसे सख्ती से लागू करवाया जाएगा।
डॉ. प्रमिला गौड़, एडी हेल्थ
परिजनों को पहले ही मिलने से रोका जाता है। एक साथ नहीं जाने देते हैं। रजिस्टर तैयार नहीं होता है। अब किसी भी परिजन को अंदर जाने नहीं दिया जाएगा सिर्फ बच्चे के साथ मां के अलावा तीमारदार रहेगा।
डॉ. अनीता धस्माना, सीएमएस
विज्ञापन
पुलिस को देखकर भागी महिला सीधे इमरजेंसी पहुंची। यहां पुलिस को देखकर भीड़ लग गई। महिला पुलिस को देखकर फिर डर गई और जाकर एक कमरे मे खुद को बंद कर लिया। पुलिस के आने तक लोगाें ने कमरे को बाहर से बंद कर दिया। जब पुलिस आई तो उसने कमरा खोला। महिला पर पुलिस को चोरनी होने का शक था। उन्होंने पूछताछ शुरू की तो महिला रोने लगी। वह कहने लगी कि मेरा फोटो मत खिचवाओं। पुलिस ने तुरंत महिला अस्पताल से बच्चा गुम होने के पीड़ित नेकपाल को बुलवाया और पहचान के लिए कहा। महिला ने मुंह ढक कर दिखाया। नेकपाल सिर पकड़ कर बैठ गया लेकिन पहचान न सका और रोने लगा। पुलिस ने महिला से अस्पताल आने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके पिता पुरुष वार्ड में भर्ती हैँ। महिला ने अपने पिता से पुलिस को मिलवाया। संतुष्ट होने पर पुलिस लौट आई। पुलिस ने भागने का कारण पूछा तो उसने बताया कि वह डर गई थी। पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। एक घंटे तक यह ड्रामा चला।
विज्ञापन
- महिला रोज घूमती है महिला अस्पताल, पुलिस ने पकड़ा भी है
जिला अस्पताल में जिस महिला को पुलिस ने दौड़ाया है वह रोज महिला अस्पताल में देखी जाती हैं। इनका ठिकाना ओपीडी के बाहर और हृदय रोग विभाग के आसपास रहता है। महिला ने भले ही पुलिस को अपने पिता को भर्ती दिखाया हो लेकिन यह कई लोगाें को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए पैसे लेती है। पिछले दिनाें हृदय रोग विभाग में इस महिला का एक मरीज भर्ती था। दो साल पहले इस महिला को तथा कथित दलाल बताकर पुलिस ने हिरासत में लिया था, लेकिन छूटने के बाद यह फिर जिला अस्पताल में आ गई। बच्चा चुराने में इसका कोई हाथ है कि नहीं इसको लेकर पुलिस ने ज्यादा पूछताछ इस महिला से नहीं की।
विज्ञापन
महिला अस्पताल ने बच्चा चोरी कांड से भी नहीं लिया सबक
सुबह 11 से 1 और शाम 5 से 7 बजे तक तीमारदारों का मिलने का समय है। बच्चा चोरी होने की घटना के बाद सख्ती के रूप में केवल महिला सिपाही ने गेट बंद कर रखा है। सिफारिश के बाद उन्हें भी अंदर जाने दिया जा रहा है। कौन सा बच्चा किसका है यह ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों को पता नहीं होता है, लेकिन फिर भी कोशिश रहती है कि बच्चों को उनके पिता व मां ही लेकर जाएं। अगर सामान्य डिलीवरी हुई है तो बच्चा वार्ड से बच्चे को लाने की जगह उसकी मां को ही वहां जाकर दूध पिलाने की जिम्मेदारी है। लेकिन तीमारदार और रिश्तेदार बच्चे को ही इधर- उधर करते रहते हैं। यहां मौजूद सिपाही साधना शर्मा ने बताया कि अगर कोई बच्चे को दूध पिलाने के लिए लाता या ले जाता है तो उसका भर्ती कार्ड देखा जाता है जो एनआईसीयू से बनता है। इसके अलावा न तो किसी की एंट्री होती है और न ही कोई कार्ड जारी होता है।
मैने कह रखा है कि आने और जाने वालाें का एक रजिस्टर तैयार हो और उनका आईकार्ड जमा किया जाए। जब वे वार्ड से बाहर जाएं तो कार्ड वापस दें। किसी को भी एक साथ न जाने दें। स्तनपान कराने बच्चों को न लाएं बल्कि माताएं वहां जाएं। अब इसे सख्ती से लागू करवाया जाएगा।
डॉ. प्रमिला गौड़, एडी हेल्थ
परिजनों को पहले ही मिलने से रोका जाता है। एक साथ नहीं जाने देते हैं। रजिस्टर तैयार नहीं होता है। अब किसी भी परिजन को अंदर जाने नहीं दिया जाएगा सिर्फ बच्चे के साथ मां के अलावा तीमारदार रहेगा।
डॉ. अनीता धस्माना, सीएमएस