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Bareilly News: ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक में परिवर्तित होगा डीटीआई, जल्द मिल सकेगा डीएल
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बरेली। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बाद अब टेस्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। परिवहन विभाग की ओर से विकास भवन के पीछे स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीआई) को ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक (एडीटीटी) में परिवर्तित करने की कवायद की जा रही है। दावा है कि जल्द ही विकास भवन के पीछे भी टेस्ट लेने का काम शुरू हो जाएगा।
अब तक एक ही जगह होने की वजह से प्रतिदिन 100 से 150 आवेदकों का ही टेस्ट हो पाता है। इस वजह से वेटिंग भी बढ़ रही है। आवेदन के एक से डेढ़ महीने बाद टेस्ट के लिए स्लॉट मिलता है। इस वजह से आवेदक परेशान होते हैं। इसको लेकर बीते दिनों परिहवन विभाग की ओर से डीटीआई को एडीटीटी में परिवर्तित करने का प्रस्ताव बनाया गया था। इस पर अब शासन की हरी झंडी भी मिल गई है।
डीटीआई के एडीटीटी में परिवर्तित होने के बाद इसका संचालन करने के लिए अब फर्म से बातचीत की जा रही है। इसके साथ ही ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में सेंसर लगाने सहित कई अन्य कार्य भी कराए जाएंगे। परिवहन विभाग मुख्यालय की ओर से स्थानीय अधिकारियों को ये सभी काम जल्द कराने के लिए कहा गया है। स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि ज्यादातर काम हो भी चुका है। जल्द ही काम पूरा कराकर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी जाएगी।
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4.56 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण
परिवहन विभाग की ओर से वाहन चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए यूपी का पहला ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बरेली में बनाया गया था। इसके निर्माण पर 4.56 करोड़ की लागत आई। इसे निजी कंपनी के हैंडओवर किया गया था। इंस्टीट्यूट के सफल न होने पर अब इसे ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक में परिवर्तित किया जा रहा है। संवाद
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डीटीआई में सेंसर आदि लगाए जा रहे हैं। छह से सात महीने में यहां ड्राइविंग टेस्ट लेने का काम शुरू हो जाएगा। - प्रणव झा, आरटीओ (प्रवर्तन)
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अब तक एक ही जगह होने की वजह से प्रतिदिन 100 से 150 आवेदकों का ही टेस्ट हो पाता है। इस वजह से वेटिंग भी बढ़ रही है। आवेदन के एक से डेढ़ महीने बाद टेस्ट के लिए स्लॉट मिलता है। इस वजह से आवेदक परेशान होते हैं। इसको लेकर बीते दिनों परिहवन विभाग की ओर से डीटीआई को एडीटीटी में परिवर्तित करने का प्रस्ताव बनाया गया था। इस पर अब शासन की हरी झंडी भी मिल गई है।
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डीटीआई के एडीटीटी में परिवर्तित होने के बाद इसका संचालन करने के लिए अब फर्म से बातचीत की जा रही है। इसके साथ ही ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में सेंसर लगाने सहित कई अन्य कार्य भी कराए जाएंगे। परिवहन विभाग मुख्यालय की ओर से स्थानीय अधिकारियों को ये सभी काम जल्द कराने के लिए कहा गया है। स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि ज्यादातर काम हो भी चुका है। जल्द ही काम पूरा कराकर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी जाएगी।
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4.56 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण
परिवहन विभाग की ओर से वाहन चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए यूपी का पहला ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बरेली में बनाया गया था। इसके निर्माण पर 4.56 करोड़ की लागत आई। इसे निजी कंपनी के हैंडओवर किया गया था। इंस्टीट्यूट के सफल न होने पर अब इसे ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक में परिवर्तित किया जा रहा है। संवाद
डीटीआई में सेंसर आदि लगाए जा रहे हैं। छह से सात महीने में यहां ड्राइविंग टेस्ट लेने का काम शुरू हो जाएगा। - प्रणव झा, आरटीओ (प्रवर्तन)