{"_id":"6a25ae327b02beee0a04dcd2","slug":"dont-take-tumors-lightly-early-detection-can-prevent-serious-risks-bareilly-news-c-4-bly1053-900414-2026-06-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: हल्के में न लें ट्यूमर, समय पर पहचान से टाल सकता है बड़ा खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: हल्के में न लें ट्यूमर, समय पर पहचान से टाल सकता है बड़ा खतरा
विज्ञापन
बरेली। लगातार सिरदर्द या शरीर के किसी अंग में गांठ है तो इसे सामान्य न समझें। डॉक्टर के मुताबिक, ट्यूमर की समय पर जांच जरूरी है ताकि बेहतर इलाज मिल सके। लक्षणों की अनदेखी और जांच में लेटलतीफी गांठ को गंभीर बना सकती है। यह कैंसर की वजह भी बन सकती है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. एमपी सिंह के मुताबिक, ट्यूमर शरीर में कहीं भी हो सकता है। यह कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंट), गैर कैंसरयुक्त (बिनाइन) दो तरह का होता है। शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखने पर मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी स्थान पर लगातार गांठ बढ़ती रहे, लंबे समय तक सिरदर्द रहे, दिखने या सुनने की क्षमता में बदलाव हो, वजन कम होने लगे, थकान बढ़े, शरीर में कहीं लगातार दर्द हो, निगलने या बोलने में परेशानी हो, बार-बार उल्टी या चक्कर जैसे असामान्य बदलाव की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सभी गांठें कैंसर नहीं होतीं, पर समय पर जांच जरूरी है। धूम्रपान, तंबाकू सेवन, प्रदूषण, फास्ट फूड, शारीरिक निष्क्रियता, आनुवंशिक कारण, बढ़ती उम्र ट्यूमर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक बरकरार संक्रमण और हार्मोनल बदलाव भी वजह बनते हैं।
विज्ञापन
सीटी स्कैन जांच में ज्यादातर बिनाइन के मरीज
सीटी स्कैन यूनिट के टेक्नीशियन शमसुल के मुताबिक, जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर मरीज जांच के लिए आते हैं। करीब दो साल से चल रही जांच में अब तक सिर्फ बिनाइन के मामले सामने आए हैं। इसमें दिमाग, पेट, गर्दन, सीने की ज्यादातर जांच होती है।
बचाव के उपाय
तंबाकू और धूम्रपान से बचें। संतुलित भोजन करें। वजन नियंत्रित रखें। नियमित व्यायाम, शारीरिक गतिविधि करें। साल में एक बार स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं। लक्षणों की अनदेखी न करें।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. एमपी सिंह के मुताबिक, ट्यूमर शरीर में कहीं भी हो सकता है। यह कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंट), गैर कैंसरयुक्त (बिनाइन) दो तरह का होता है। शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखने पर मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी स्थान पर लगातार गांठ बढ़ती रहे, लंबे समय तक सिरदर्द रहे, दिखने या सुनने की क्षमता में बदलाव हो, वजन कम होने लगे, थकान बढ़े, शरीर में कहीं लगातार दर्द हो, निगलने या बोलने में परेशानी हो, बार-बार उल्टी या चक्कर जैसे असामान्य बदलाव की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सभी गांठें कैंसर नहीं होतीं, पर समय पर जांच जरूरी है। धूम्रपान, तंबाकू सेवन, प्रदूषण, फास्ट फूड, शारीरिक निष्क्रियता, आनुवंशिक कारण, बढ़ती उम्र ट्यूमर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक बरकरार संक्रमण और हार्मोनल बदलाव भी वजह बनते हैं।
विज्ञापन
सीटी स्कैन जांच में ज्यादातर बिनाइन के मरीज
सीटी स्कैन यूनिट के टेक्नीशियन शमसुल के मुताबिक, जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर मरीज जांच के लिए आते हैं। करीब दो साल से चल रही जांच में अब तक सिर्फ बिनाइन के मामले सामने आए हैं। इसमें दिमाग, पेट, गर्दन, सीने की ज्यादातर जांच होती है।
बचाव के उपाय
तंबाकू और धूम्रपान से बचें। संतुलित भोजन करें। वजन नियंत्रित रखें। नियमित व्यायाम, शारीरिक गतिविधि करें। साल में एक बार स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं। लक्षणों की अनदेखी न करें।