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...ताकि और जानें न ले पाएं आदमखोर कुत्ते
बरेली
Updated Thu, 26 Feb 2015 12:22 AM IST
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एडीएम ने निर्देश दिया कि हमला करने वाले कुत्तों की फोटोग्राफी भी कराई जाए और यह रिकार्ड नगर पालिका प्रशासन अपने पास रखे। यह भी कहा कि भविष्य में कुत्तों के हमले में कोई मौत होने पर पोस्टमार्टम कराने के बाद ही अंत्येष्टि की अनुमति दी जाए ताकि मौत की सही वजह सामने आ सके और पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जा सके।
कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कार्य योजना बनाने में वन विभाग के अधिकारी भी मदद करेंगे। बैठक में बताया गया कि स्थानीय लोगों ने 20 आक्रामक कुत्तों को मार डाला है जबकि वन विभाग और पालिका प्रशासन ने ऐसे 16 कुत्तों को उत्तराखंड की सीमा पर ले जाकर छोड़ा। कुत्तों को पकड़ने के नाम पर दिखावा किए जाने पर नगर पालिका और वन विभाग के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी गई।
अभी तय नहीं कुत्ते आवारा हैं या जंगली
अभी तक वन विभाग के अधिकारी दावा कर रहे थे कि बहेड़ी इलाके में मासूमों की जान लेने वाले कुत्ते जंगली नहीं आवारा हैं लेकिन कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में वे यह दावा करने से कतरा गए। बैठक में बताया गया कि ये कुत्ते आवारा हैं या जंगली यह भी तय नहीं है। बैठक में निर्देश दिया गया कि कुत्तों की सही तौर पर पहचान कराई जाए।
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स्लाटर हाउस से न फेंके जाएं अपशिष्ट
जिला प्रशासन की बैठक में इलाके के स्लाटर हाउसों से पशुओं के अपशिष्टों को खुले में फेंके जाने और उन्हें खाकर कुत्तों के आदमखोर बनने की बात का भी गंभीर संज्ञान लिया गया। तहसील और नगर पालिका प्रशासन को निर्देश दिया गया कि वे सुनिश्चित करें कि आगे से पशुओं के अपशिष्टों का सही ढंग से निस्तारण हो ताकि वह आवारा कुत्तों का निवाला न बने।
कुत्तों के काटने से होने वाली मौत के मामले में पोस्टमार्टम होना चाहिए। इसी से किसी मामले में मौत की सही वजह के साथ यह भी पता चलेगा कि मौत एक कुत्ते के काटने से हुई है या एकाधिक कुत्तों के काटने से। तर्कसंगत चिकित्सकीय बिंदु पता चलने से ही सही तस्वीर सामने आ सकती है। उसी आधार पर पीड़ित परिवार को शासन या प्रशासन के स्तर पर आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जा सकती है। - अरुण कुमार, एडीएम प्रशासन
कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कार्य योजना बनाने में वन विभाग के अधिकारी भी मदद करेंगे। बैठक में बताया गया कि स्थानीय लोगों ने 20 आक्रामक कुत्तों को मार डाला है जबकि वन विभाग और पालिका प्रशासन ने ऐसे 16 कुत्तों को उत्तराखंड की सीमा पर ले जाकर छोड़ा। कुत्तों को पकड़ने के नाम पर दिखावा किए जाने पर नगर पालिका और वन विभाग के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी गई।
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अभी तय नहीं कुत्ते आवारा हैं या जंगली
अभी तक वन विभाग के अधिकारी दावा कर रहे थे कि बहेड़ी इलाके में मासूमों की जान लेने वाले कुत्ते जंगली नहीं आवारा हैं लेकिन कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में वे यह दावा करने से कतरा गए। बैठक में बताया गया कि ये कुत्ते आवारा हैं या जंगली यह भी तय नहीं है। बैठक में निर्देश दिया गया कि कुत्तों की सही तौर पर पहचान कराई जाए।
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स्लाटर हाउस से न फेंके जाएं अपशिष्ट
जिला प्रशासन की बैठक में इलाके के स्लाटर हाउसों से पशुओं के अपशिष्टों को खुले में फेंके जाने और उन्हें खाकर कुत्तों के आदमखोर बनने की बात का भी गंभीर संज्ञान लिया गया। तहसील और नगर पालिका प्रशासन को निर्देश दिया गया कि वे सुनिश्चित करें कि आगे से पशुओं के अपशिष्टों का सही ढंग से निस्तारण हो ताकि वह आवारा कुत्तों का निवाला न बने।
कुत्तों के काटने से होने वाली मौत के मामले में पोस्टमार्टम होना चाहिए। इसी से किसी मामले में मौत की सही वजह के साथ यह भी पता चलेगा कि मौत एक कुत्ते के काटने से हुई है या एकाधिक कुत्तों के काटने से। तर्कसंगत चिकित्सकीय बिंदु पता चलने से ही सही तस्वीर सामने आ सकती है। उसी आधार पर पीड़ित परिवार को शासन या प्रशासन के स्तर पर आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जा सकती है। - अरुण कुमार, एडीएम प्रशासन