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रिस्क लेने से बचते रहे डॉक्टर, वापस कर दिए दो लाख के इंजेक्शन
बरेली।
Updated Sun, 29 Oct 2017 01:38 AM IST
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अचानक ब्रेन स्ट्रोक होने पर मरीजों को चार घंटे के अंदर लगने वाले 50 हजार रुपये कीमत के इंजेक्शन का जिला अस्पताल में एक साल में उपयोग ही नहीं किया जा सका। इसे लगाने में रिस्क के चलते डॉक्टर जरूरत पड़ने पर भी इस्तेमाल करने से बचते रहे। नतीजा यह हुआ शासन की ओर से भेजे गए दो लाख रुपये कीमत के चार इंजेक्शन एक्सपाइर होने की डेट नजदीक आने पर वापस भेज दिए गए।
ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर बढ़ने पर ब्रेन स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। मरीजों के सीधे दिल और दिमाग पर अटैक होता है और वे बेहोश हो जाते हैं। कई मामलों में दौरे भी पड़ते हैं। ऐसे में चार घंटे के अंदर एक इंजेक्शन मरीजों को दिया जाता है, जिससे उनकी मृत्यु की आशंका कम हो जाती है। पिछली सरकार ने सभी मंडलीय अस्पतालाें को अल्टीपेस नामक चार-चार इंजेक्शन खरीदने के लिए कहा था। इनका उपयोग ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए किया जाना था लेकिन यहां जिला अस्पताल में एक साल तक एक भी इंजेक्शन का उपयोग नहीं हुआ। एक्सपायर डेट नजदीक आने पर इंजेक्शन शासन को वापस कर दिए गए हैं।
आखिर क्यों डरते हैं डॉक्टर
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को चार घंटे के अंदर यह इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे पहले उसका सीटी स्कैन कराया जाता है। रिपोर्ट में दिमाग में खून का थक्का जमा होने की पुष्टि होने पर ही इंजेक्शन लगाते हैं। इसके बाद आर्टरी साफ हो जाती है और मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है। 200 में से दो मरीज को इस इंजेक्शन के लगाने से ब्रेन हैमरेज होने का भी खतरा रहता है। इसका एक बड़ा कारण सीटी स्कैैन की रिपोर्ट में सही स्थिति का पता न लग पाना है। जिला अस्पताल में डॉक्टर बस इसी रिस्क से बचने के लिए इंजेक्शन का प्रयोग नहीं करते।
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कोट
पिछले साल इस इंजेक्शन को खरीदा गया था लेकिन इसका उपयोग न होने से इसे एक्सपायर होने की डेट नजदीक आने पर वापस कर दिया गया। जिला अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट न होने से इसका इस्तेमाल नहीं हो पाया। इस बार इसे खरीदने का कोई आदेश नहीं है।
- डॉ. केएस गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक
ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर बढ़ने पर ब्रेन स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। मरीजों के सीधे दिल और दिमाग पर अटैक होता है और वे बेहोश हो जाते हैं। कई मामलों में दौरे भी पड़ते हैं। ऐसे में चार घंटे के अंदर एक इंजेक्शन मरीजों को दिया जाता है, जिससे उनकी मृत्यु की आशंका कम हो जाती है। पिछली सरकार ने सभी मंडलीय अस्पतालाें को अल्टीपेस नामक चार-चार इंजेक्शन खरीदने के लिए कहा था। इनका उपयोग ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए किया जाना था लेकिन यहां जिला अस्पताल में एक साल तक एक भी इंजेक्शन का उपयोग नहीं हुआ। एक्सपायर डेट नजदीक आने पर इंजेक्शन शासन को वापस कर दिए गए हैं।
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आखिर क्यों डरते हैं डॉक्टर
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को चार घंटे के अंदर यह इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे पहले उसका सीटी स्कैन कराया जाता है। रिपोर्ट में दिमाग में खून का थक्का जमा होने की पुष्टि होने पर ही इंजेक्शन लगाते हैं। इसके बाद आर्टरी साफ हो जाती है और मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है। 200 में से दो मरीज को इस इंजेक्शन के लगाने से ब्रेन हैमरेज होने का भी खतरा रहता है। इसका एक बड़ा कारण सीटी स्कैैन की रिपोर्ट में सही स्थिति का पता न लग पाना है। जिला अस्पताल में डॉक्टर बस इसी रिस्क से बचने के लिए इंजेक्शन का प्रयोग नहीं करते।
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पिछले साल इस इंजेक्शन को खरीदा गया था लेकिन इसका उपयोग न होने से इसे एक्सपायर होने की डेट नजदीक आने पर वापस कर दिया गया। जिला अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट न होने से इसका इस्तेमाल नहीं हो पाया। इस बार इसे खरीदने का कोई आदेश नहीं है।
- डॉ. केएस गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक