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जुलूस-ए-मोहम्मदी और उर्स में डीजे, नाच-गाना नाजायज : मौलाना शहाबुद्दीन
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बरेली। आजकल कुछ मुस्लिम नौजवान धार्मिक जुलूसों खास कर जुलूस-ए-मोहम्मदी और उर्स के दिनों में डीजे का खूब इस्तेमाल करते हैं। नात शरीफ की आवाज पर हाथों में रुमाल लेकर लहराते हुए डांस करते हैं। ये तमाम कार्य शरीयत की नजर में नाजायज है। शरीयत ने गाने-बाजे और डांस वाली चीजों को शैतानी अमल करार दिया गया है। यह कहना है ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का।
उन्होंने सोमवार को कहा कि मजहबी जुलूसों में डीजे की आवाज पर थिरकने, रुमाल हवा में लहराने और हुल्लड़बाजी का चलन बढ़ता जा रहा है। जुलूस-ए-मोहम्मदी में गलत कार्य का करना और खुदा के मुकद्दस वालियों सूफियों के उर्स में चादर के जुलूसों में इन शैतानी कामों का करना उसकी बुराई को बढ़ा देता है।
उन्होंने कहा कि जुलूस-ए मोहम्मदी का मकसद पैगंबरे इस्लाम के जन्मदिन की खुशी मनाना है और एक मुसलमान के लिए इस खुशी से बढ़कर कोई दूसरी खुशी नहीं हो सकती। इसलिए इस बड़े दिन की खुशी का इजहार अपने धार्मिक स्थलों और अपने घरों को सजावट करके करें।
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मौलाना ने अंजुमन के तमाम जिम्मेदारों को हिदायत देते हुए कहा कि जुलूस में किसी भी तरह का भड़काऊ बयान या नारा न लगाएं। नमाज को उनके वक्त पर अदा करें। अगर कोई जबरदस्ती डीजे लेकर आता है तो उसको जुलूस से बाहर कर दें। संवाद
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उन्होंने सोमवार को कहा कि मजहबी जुलूसों में डीजे की आवाज पर थिरकने, रुमाल हवा में लहराने और हुल्लड़बाजी का चलन बढ़ता जा रहा है। जुलूस-ए-मोहम्मदी में गलत कार्य का करना और खुदा के मुकद्दस वालियों सूफियों के उर्स में चादर के जुलूसों में इन शैतानी कामों का करना उसकी बुराई को बढ़ा देता है।
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उन्होंने कहा कि जुलूस-ए मोहम्मदी का मकसद पैगंबरे इस्लाम के जन्मदिन की खुशी मनाना है और एक मुसलमान के लिए इस खुशी से बढ़कर कोई दूसरी खुशी नहीं हो सकती। इसलिए इस बड़े दिन की खुशी का इजहार अपने धार्मिक स्थलों और अपने घरों को सजावट करके करें।
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मौलाना ने अंजुमन के तमाम जिम्मेदारों को हिदायत देते हुए कहा कि जुलूस में किसी भी तरह का भड़काऊ बयान या नारा न लगाएं। नमाज को उनके वक्त पर अदा करें। अगर कोई जबरदस्ती डीजे लेकर आता है तो उसको जुलूस से बाहर कर दें। संवाद