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Bareilly News: ट्रायल में अनुशासन धराशायी, समय पर न कोच आए न खिलाड़ी

Fri, 12 Dec 2025 02:05 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Fri, 12 Dec 2025 02:05 AM IST
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Discipline broke down during trials, neither the coach nor the players arrived on time.
बरेली। खेल प्रतिभाओं को उभारने की बड़ी-बड़ी बातें तो खूब होती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कोच, खिलाड़ी और स्टेडियम प्रशासन ही समय के पाबंद नहीं हैं। ऐसे में खेल प्रतिभाएं आखिर कैसे निखर पाएंगी। बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित विभिन्न खेलों के जिला स्तरीय ट्रायल की पड़ताल की तो बड़ी लापरवाही सामने आई।
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ट्रायल में हॉकी, टेनिस, बॉक्सिंग और जिम्नास्टिक को शामिल किया गया था। स्टेडियम प्रशासन की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार हॉकी, टेनिस और जिम्नास्टिक के ट्रायल दोपहर दो बजे से शुरू होने थे, लेकिन हकीकत यह रही कि तीन बजे तक कोच, खिलाड़ी और जिम्मेदार अधिकारी नहीं आए। मैदान खाली पड़ा रहा और ऐसा लगा जैसे यहां कोई ट्रायल ही नहीं होना है।
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और तो और ट्रायल के समय पर हॉल और कोर्ट बंद थे। हॉकी का मैदान खाली पड़ा हुआ था। टेनिस के लिए चयनित खिलाड़ियों की सूचना जारी ही नहीं की गई और ट्रायल के बारे में कोच तक बेखबर रहे।
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- समय पर हुआ बॉक्सिंग का ट्रायल, लेकिन रिंग बदहाल

बॉक्सिंग का ट्रायल समय पर हुआ, लेकिन कई वर्षों से बॉक्सिंग रिंग की हालत बदहाल है। पहले रिंग खुले में रखी थी, तब भी उसकी हालत खराब थी। इसके बाद उसे टीन शेड के नीचे शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन सुधार आज तक नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि खिलाड़ियों को मजबूरन खुले मैदान में ही ट्रायल देना पड़ा। रिंग की दयनीय हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके ऊपर से मैट पूरी तरह हट चुकी थी। एक कोने में मैट के फटे-पुराने टुकड़े पड़े मिले, जबकि पंचिंग बैग भी किनारे धूल फांकता नजर आया। खिलाड़ियों ने बताया कि खुले मैदान में अभ्यास करना और असली रिंग में मुकाबला करना दो अलग-अलग चीजें हैं। प्रतियोगिता के समय जब वह रिंग में उतरते हैं, तो परिस्थितियां बिल्कुल अलग होती हैं। ऐसे में वह प्रतियोगिता में प्रभावी प्रदर्शन करने में नाकाम रहते हैं।

वर्जन



ट्रायल के लिए एक औपचारिक समय निश्चित किया जाता है। कोच और सभी खिलाड़ियों के पहुंचने के बाद ही ट्रायल प्रक्रिया प्रारंभ की जाती है। - चंचल मिश्रा, आरएसओ
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