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विकास का पहिया डगमगाया तो डीएम को गुस्सा आया
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हाईवे की मरम्मत न शुरू होने पर एनएचएआई अफसरों की ली क्लास
सीतापुर फोरलेन और सितारगंज हाईवे को तत्काल ठीक कराने को कहा
बरेली। विकास के काम लगातार लटके रहने से डीएम नितीश कुमार के तेवर सख्त होने लगे हैं। लखनऊ हाईवे पर बरेली से सीतापुर के बीच हाईवे का निर्माण शुरू न होने पर उन्होंने एनएचएआई अफसरों पर सख्ती दिखाते हुए जल्द निर्माण शुरू करने को कहा है। सितारगंज हाईवे भी ठीक कराने को कहा है।
हाल ही में दो दिवसीय दौरे पर आए प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने बरेली-सितारगंज हाईवे पर खतरनाक गड्ढों को देखकर प्रशासन और एनएचएआई के रवैये पर नाराजगी जताई थी। अधिकारियों ने सफाई दी थी कि सितारगंज हाईवे के लिए 1.80 करोड़ का बजट मंजूर होते ही ठेकेदार को काम सौंप दिया गया है। बरेली-सीतापुर फोरलेन के लिए भी सात अरब का कांट्रेक्ट दिया जा चुका है। दोनों हाईवे का निर्माण न शुरू होने पर डीएम ने एनएचएआई अधिकारियों पर नाराजगी जताई है। डीएम का कहना है कि एनएचएआई अधिकारियों ने बताया है कि सीतापुर फोरलेन पर काम शुरू हो चुका है। मौसम ठीक होते ही हॉटमिक्स रोड बनना शुरू हो जाएगा। सितारगंज हाईवे की मरम्मत के लिए भी ठेकेदार को रिमाइंडर भेजा गया है।
नए सिरे से तैयार होगी टॉप-10 भूमाफिया की लिस्ट
सभी विभागों को एक महीने के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश
बरेली। करोड़ों-अरबों की सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए भू-माफिया की टॉप 10 लिस्ट तैयार करने के लिए फिर कसरत शुरू हो गई है। डीएम ने सभी विभागों से एक महीने के अंदर माफिया की सूची मांगी है। करीब दो साल पहले योगी सरकार की सख्ती के बाद प्रशासन ने फर्जी सूची शासन को भेज दी थी, जिसके बाद अफसरों की काफी किरकिरी हुई थी। प्रमुख सचिव की नाराजगी के बाद प्रशासन ने फिर सूची तैयार करनी शुरू कर दी है। बता दें कि बीडीए की महायोजना में चिह्नित ग्रीन लैंड पर भी भूमाफिया ने कब्जे कर रखे हैं। अफसरों ने बड़ा बाईपास, सीबीगंज सहित कई जगहों पर ग्रीन लैंड पर विकसित अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया है, लेकिन अभी भी बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जेदारों को हटाया नहीं जा सका हैं। पीलीभीत बाईपास के पास भी नहर विभाग की जमीन पर कालोनियां बन गई हैं। नकटिया नदी के अतिक्रमणकारियों को नहीं चिह्नित किया जा सका है।
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भूमाफिया की सूची नए सिरे से तैयार होगी। इसके लिए सभी विभागों को एक महीने के अंदर अतिक्रमणकारियों की सूची भेजने के निर्देश दिए गए हैं।’
- नितीश कुमार, डीएम
सरकारी जमीनों का रिजर्व पूल.. ताकि न फंसे विकास का कोई प्रोजेक्ट
बरेली। विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी का अड़ंगा न लगे, इसके लिए प्रशासन ने सदर तहसील में 44 हेक्टेयर का भूमि रिजर्व पूल बनाया है। यह भूमि तहसील, स्थानीय निकाय और ग्रामसभाओं की है। नदी के किनारे भी जमीन चिह्नित कर उसका रिकार्ड बनाया जा रहा है। मकसद यह है कि किसी परियोजना में वन विभाग से एनओसी मांगने पर क्षतिपूर्ति पौधरोपण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराई जा सके।
सेतु निगम की कई परियोजनाओं पर सर्विस रोड बनाने, सड़क चौड़ीकरण, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सहित विकास की कई योजनाओं में प्रशासन को फॉरेस्ट सहित कई विभागों को दूसरी जगहों पर भूमि उपलब्ध करानी थी, लेकिन प्रशासन के पास सरकारी लैंड ही न उपलब्ध होने से विकास के प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई समस्याओं के साथ देरी भी हुई, जिसके चलते परियोजनाओं की लागत बढ़ने की भी संभावना बनी रही। यह सारी कवायद इसी समस्या से निपटने के लिए है।
रक्षा मंत्रालय ने एक ही जगह मांगी 25 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि
शासन ने रक्षा मंत्रालय से लेटर मिलने के बाद डीएम को प्रतिरक्षा विभाग से आठ विभिन्न परियोजनाओं के लिए ली गई भूमि के बदले एक ही जगह पर 25.579 हेक्टेयर जमीन मांगी है। डीएम ने एडीएम प्रशासन को भूमि चिह्नित कर उप भूमि व्यवस्था आयुक्त को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
विकास के प्रोजेक्ट के लिए सरकारी भूमि जल्द उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसे देखते हुए सरकारी जमीन को चिह्नित कर उसका रिजर्व पूल सभी तहसीलों में बनाया जा रहा है।
-नितीश कुमार, डीएम
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सीतापुर फोरलेन और सितारगंज हाईवे को तत्काल ठीक कराने को कहा
बरेली। विकास के काम लगातार लटके रहने से डीएम नितीश कुमार के तेवर सख्त होने लगे हैं। लखनऊ हाईवे पर बरेली से सीतापुर के बीच हाईवे का निर्माण शुरू न होने पर उन्होंने एनएचएआई अफसरों पर सख्ती दिखाते हुए जल्द निर्माण शुरू करने को कहा है। सितारगंज हाईवे भी ठीक कराने को कहा है।
हाल ही में दो दिवसीय दौरे पर आए प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने बरेली-सितारगंज हाईवे पर खतरनाक गड्ढों को देखकर प्रशासन और एनएचएआई के रवैये पर नाराजगी जताई थी। अधिकारियों ने सफाई दी थी कि सितारगंज हाईवे के लिए 1.80 करोड़ का बजट मंजूर होते ही ठेकेदार को काम सौंप दिया गया है। बरेली-सीतापुर फोरलेन के लिए भी सात अरब का कांट्रेक्ट दिया जा चुका है। दोनों हाईवे का निर्माण न शुरू होने पर डीएम ने एनएचएआई अधिकारियों पर नाराजगी जताई है। डीएम का कहना है कि एनएचएआई अधिकारियों ने बताया है कि सीतापुर फोरलेन पर काम शुरू हो चुका है। मौसम ठीक होते ही हॉटमिक्स रोड बनना शुरू हो जाएगा। सितारगंज हाईवे की मरम्मत के लिए भी ठेकेदार को रिमाइंडर भेजा गया है।
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नए सिरे से तैयार होगी टॉप-10 भूमाफिया की लिस्ट
सभी विभागों को एक महीने के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश
बरेली। करोड़ों-अरबों की सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए भू-माफिया की टॉप 10 लिस्ट तैयार करने के लिए फिर कसरत शुरू हो गई है। डीएम ने सभी विभागों से एक महीने के अंदर माफिया की सूची मांगी है। करीब दो साल पहले योगी सरकार की सख्ती के बाद प्रशासन ने फर्जी सूची शासन को भेज दी थी, जिसके बाद अफसरों की काफी किरकिरी हुई थी। प्रमुख सचिव की नाराजगी के बाद प्रशासन ने फिर सूची तैयार करनी शुरू कर दी है। बता दें कि बीडीए की महायोजना में चिह्नित ग्रीन लैंड पर भी भूमाफिया ने कब्जे कर रखे हैं। अफसरों ने बड़ा बाईपास, सीबीगंज सहित कई जगहों पर ग्रीन लैंड पर विकसित अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया है, लेकिन अभी भी बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जेदारों को हटाया नहीं जा सका हैं। पीलीभीत बाईपास के पास भी नहर विभाग की जमीन पर कालोनियां बन गई हैं। नकटिया नदी के अतिक्रमणकारियों को नहीं चिह्नित किया जा सका है।
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भूमाफिया की सूची नए सिरे से तैयार होगी। इसके लिए सभी विभागों को एक महीने के अंदर अतिक्रमणकारियों की सूची भेजने के निर्देश दिए गए हैं।’
- नितीश कुमार, डीएम
सरकारी जमीनों का रिजर्व पूल.. ताकि न फंसे विकास का कोई प्रोजेक्ट
बरेली। विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी का अड़ंगा न लगे, इसके लिए प्रशासन ने सदर तहसील में 44 हेक्टेयर का भूमि रिजर्व पूल बनाया है। यह भूमि तहसील, स्थानीय निकाय और ग्रामसभाओं की है। नदी के किनारे भी जमीन चिह्नित कर उसका रिकार्ड बनाया जा रहा है। मकसद यह है कि किसी परियोजना में वन विभाग से एनओसी मांगने पर क्षतिपूर्ति पौधरोपण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराई जा सके।
सेतु निगम की कई परियोजनाओं पर सर्विस रोड बनाने, सड़क चौड़ीकरण, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सहित विकास की कई योजनाओं में प्रशासन को फॉरेस्ट सहित कई विभागों को दूसरी जगहों पर भूमि उपलब्ध करानी थी, लेकिन प्रशासन के पास सरकारी लैंड ही न उपलब्ध होने से विकास के प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई समस्याओं के साथ देरी भी हुई, जिसके चलते परियोजनाओं की लागत बढ़ने की भी संभावना बनी रही। यह सारी कवायद इसी समस्या से निपटने के लिए है।
रक्षा मंत्रालय ने एक ही जगह मांगी 25 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि
शासन ने रक्षा मंत्रालय से लेटर मिलने के बाद डीएम को प्रतिरक्षा विभाग से आठ विभिन्न परियोजनाओं के लिए ली गई भूमि के बदले एक ही जगह पर 25.579 हेक्टेयर जमीन मांगी है। डीएम ने एडीएम प्रशासन को भूमि चिह्नित कर उप भूमि व्यवस्था आयुक्त को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
विकास के प्रोजेक्ट के लिए सरकारी भूमि जल्द उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसे देखते हुए सरकारी जमीन को चिह्नित कर उसका रिजर्व पूल सभी तहसीलों में बनाया जा रहा है।
-नितीश कुमार, डीएम