{"_id":"5e24a7f58ebc3e4b471b895f","slug":"developement-bareilly-news-bly3925719150","type":"story","status":"publish","title_hn":"नकटिया नदी प्रकरण- खेतों का रकबा तो कम हुआ मगर नदी की धार से या अतिक्रमण से.. ये पता नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकटिया नदी प्रकरण- खेतों का रकबा तो कम हुआ मगर नदी की धार से या अतिक्रमण से.. ये पता नहीं
विज्ञापन
नकटिया नदी
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जांच तो होनी थी नदी की धारा को मोड़ने की लेकिन राजस्व विभाग की जांच ही मुड़ गई
टीम को खेतों का आठ मीटर कम मिला रकबा, किसानों से तूदाबंदी कराने को कहा
चकबंदी विभाग के नक्शे में खामी मिलने की बात कहकर जताई स्पष्ट जांच में असमर्थता
बरेली। डोहरा रोड पर नकटिया नदी के पुल के पास कई किसानों के खेतों की खुदाई कर नदी का रुख ही मोड़ दिया गया है। अपनी जमीनों को हाथ से जाते देख किसानों ने शिकायत की तो राजस्व विभाग की टीम को नदी का रुख मोड़ने के मामले की जांच सौंप दी गई, लेकिन अब टीम की जांच की दिशा ही मुड़ गई है। राजस्व विभाग की टीम ने चकबंदी विभाग के नक्शे में खामी बताकर स्पष्ट जांच करने में ही असमर्थता जता दी है। हालांकि राजस्व विभाग की टीम ने यह माना है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर तक कम हुआ है, लेकिन रकबा नदी की धार से कम हुआ या अतिक्रमण से.. ये स्पष्ट नहीं हो पा रहा है, जबकि मौके पर साफ दिख रहा है कि नदी के बीच में मिट्टी डालकर उसकी धारा मोड़ी गई है। टीम ने किसानों से तूदाबंदी कराने को कहा है।
यूनिवर्सिटी के पास पिछले महीने बाढ़ खंड ने नकटिया नदी की सफाई कराई थी। कई किसानों ने एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से यह शिकायत की थी कि उनके खेतों की खुदाई करके नदी के प्रवाह की दिशा बदल दी गई है। तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की छह सदस्यीय टीम से इस प्रकरण की जांच कराई। खेतों की पैमाइश करने के बाद टीम ने रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि पूर्व में चकबंदी विभाग ने नदी का जो नक्शा तैयार किया है, उसमें कई जगह चौड़ाई अधिक दिखाई गई है। इसके नक्शे में खामी प्रतीत हो रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर कम मिला है, लेकिन यह नदी की धारा की ओर ही था, यह स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर अतिक्रमण की वजह से भी ऐसा होना मुमकिन हो सकता है। यह साफ करने के लिए किसानों को अपने खेतों की तूदाबंदी कराने का सुझाव दिया गया है। राजस्व विभाग की इस रिपोर्ट से फिलहाल किसानों को कोई राहत नहीं मिल सकी है।
भूमि अधिग्रहण के लिए पीडब्ल्यूडी ने मांगी रिपोर्ट
फैजनगर और मल्लपुर में पुल के लिए एप्रोच रोड बनाने को भूमि के अधिग्रहण के लिए कई किसानों को मुआवजा देना है। इसके लिए 1088 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण होना है। इस भूमि के गाटा नंबर पर हरीश कुमार, योगेश कुमार पुत्र रामधुन, सुमन पुत्री रामधुन और बसरुद्दीन आगा पुत्र अब्दुल हमीद निवासी फैजनगर ने इसके लिए प्रार्थना पत्र दिया है। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता शैलेंद्र अवस्थी ने चकबंदी विभाग से अधिकारियों से किसानों को मुआवजा देने के लिए जांच रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
‘किसानों का खेत काटकर नदी का प्रवाह बदलने की रिपोर्ट तैयार हो गई है। इसमें उच्चाधिकारियों से सुझाव लेने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई के बारे में कुछ कहा सकता है।’
- आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार सदर
विज्ञापन
टीम को खेतों का आठ मीटर कम मिला रकबा, किसानों से तूदाबंदी कराने को कहा
चकबंदी विभाग के नक्शे में खामी मिलने की बात कहकर जताई स्पष्ट जांच में असमर्थता
बरेली। डोहरा रोड पर नकटिया नदी के पुल के पास कई किसानों के खेतों की खुदाई कर नदी का रुख ही मोड़ दिया गया है। अपनी जमीनों को हाथ से जाते देख किसानों ने शिकायत की तो राजस्व विभाग की टीम को नदी का रुख मोड़ने के मामले की जांच सौंप दी गई, लेकिन अब टीम की जांच की दिशा ही मुड़ गई है। राजस्व विभाग की टीम ने चकबंदी विभाग के नक्शे में खामी बताकर स्पष्ट जांच करने में ही असमर्थता जता दी है। हालांकि राजस्व विभाग की टीम ने यह माना है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर तक कम हुआ है, लेकिन रकबा नदी की धार से कम हुआ या अतिक्रमण से.. ये स्पष्ट नहीं हो पा रहा है, जबकि मौके पर साफ दिख रहा है कि नदी के बीच में मिट्टी डालकर उसकी धारा मोड़ी गई है। टीम ने किसानों से तूदाबंदी कराने को कहा है।
यूनिवर्सिटी के पास पिछले महीने बाढ़ खंड ने नकटिया नदी की सफाई कराई थी। कई किसानों ने एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से यह शिकायत की थी कि उनके खेतों की खुदाई करके नदी के प्रवाह की दिशा बदल दी गई है। तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की छह सदस्यीय टीम से इस प्रकरण की जांच कराई। खेतों की पैमाइश करने के बाद टीम ने रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि पूर्व में चकबंदी विभाग ने नदी का जो नक्शा तैयार किया है, उसमें कई जगह चौड़ाई अधिक दिखाई गई है। इसके नक्शे में खामी प्रतीत हो रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किसानों के खेतों का रकबा सात से आठ मीटर कम मिला है, लेकिन यह नदी की धारा की ओर ही था, यह स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर अतिक्रमण की वजह से भी ऐसा होना मुमकिन हो सकता है। यह साफ करने के लिए किसानों को अपने खेतों की तूदाबंदी कराने का सुझाव दिया गया है। राजस्व विभाग की इस रिपोर्ट से फिलहाल किसानों को कोई राहत नहीं मिल सकी है।
विज्ञापन
भूमि अधिग्रहण के लिए पीडब्ल्यूडी ने मांगी रिपोर्ट
फैजनगर और मल्लपुर में पुल के लिए एप्रोच रोड बनाने को भूमि के अधिग्रहण के लिए कई किसानों को मुआवजा देना है। इसके लिए 1088 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण होना है। इस भूमि के गाटा नंबर पर हरीश कुमार, योगेश कुमार पुत्र रामधुन, सुमन पुत्री रामधुन और बसरुद्दीन आगा पुत्र अब्दुल हमीद निवासी फैजनगर ने इसके लिए प्रार्थना पत्र दिया है। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता शैलेंद्र अवस्थी ने चकबंदी विभाग से अधिकारियों से किसानों को मुआवजा देने के लिए जांच रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
‘किसानों का खेत काटकर नदी का प्रवाह बदलने की रिपोर्ट तैयार हो गई है। इसमें उच्चाधिकारियों से सुझाव लेने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई के बारे में कुछ कहा सकता है।’
- आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार सदर