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Bareilly News: गला दबाकर हत्या की पुष्टि के बावजूद पुलिस ने बंद की फाइल
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बरेली। मानसिक अस्पताल के अति सुरक्षित जोन में टेलर महेश चंद्र की गला दबाकर हत्या और फिर शव जलाने की सनसनीखेज वारदात में बारादरी थाना पुलिस ने खामोशी से एफआर लगा दी। इससे परिवार हैरत में है। अब महेश की पत्नी कानूनी जंग लड़ने की तैयारी कर रही हैं ताकि पति के कातिलों को बेनकाब किया जा सके।
सीबीगंज के जौहरपुर निवासी महेश चंद्र मानसिक चिकित्सालय में अटेंडेंट थे। अच्छे दर्जी होने की वजह से भर्ती मरीजों की ड्रेस सिलने का काम भी करते थे। 19 अप्रैल 2022 को महेश का शव स्टोर रूम के पास जली अवस्था में मिला। परिसर के बाहर से ताला लगा था। पत्नी गुलमा देवी ने बताया कि पति सुबह साढ़े आठ बजे ड्यूटी गए थे। दोपहर में बेटे अखिलेश ने पिता को कॉल की तो फोन रिसीव नहीं हुआ। अस्पताल में ही कार्यरत परिजन को कॉल की तो उन्होंने खुद को छुट्टी पर होना बताया।
शाम तक बात न होने पर बेटा और कुछ लोग अस्पताल गए। किचिन अटेंडेंट ने ताला खोला। जिस कमरे में पति ड्रेस सिलते थे, उसके बाहर स्टोर रूम परिसर के पास उनका जला हुआ शव मिला। साथी कर्मचारियों ने ही शव पहचाना और जोर से कहा कि हाय ये तुमने क्या कर लिया। मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। मौके से पुलिस ने एक सुसाइड नोट बरामद दिखाया जिसमें बेटी की बीमारी की वजह से आत्महत्या की बात लिखी थी।
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हत्या के तमाम साक्ष्यों के बाद परिवार इस तथ्य को मान भी लेता पर तीन डॉक्टरों के पैनल ने गला दबाकर हत्या की पुष्टि कर सभी सवालों पर विराम लगा दिय। पुष्ट हुआ कि हत्या के बाद शव जलाया गया था। अज्ञात में हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें हाल ही में बारादरी पुलिस ने साक्ष्य न मिलने का तर्क देकर एफआर लगा दी है। गुलमा देवी को इस पर ऐतराज है। शनिवार को जब वह एसएसपी दफ्तर पहुंचीं तो अधिकारी नहीं मिल सके। उन्होंने बताया कि वह सोमवार को एसएसपी से मिलकर मामले की फिर से विवेचना की मांग करेंगी।
- गुलमा देवी ने बताया कि पति के कुछ साथी कर्मचारी सूद पर रुपया देते हैं। उन्हें पति की मौत के कुछ समय बाद पता लगा कि पति ने इन लोगों से कुछ कर्ज लिया था, कर्ज की काफी रकम लौटा भी दी थी पर सूदखोर लगातार कई गुना ब्याज बताकर रुपये मांग रहे थे। उनके पति इसका विरोध कर अधिकारियों से शिकायत की बात कह रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या हो गई। उन्हें शक है कि सूदखोर स्टाफ का ही ये काम है। उन्होंने पुलिस को ये बात बताई भी थी। उम्मीद थी कि कुछ गिरफ्तारी होंगी तो सच सामने आ जाएगा पर पुलिस ने बिना उन्हें कोई जानकारी दिए एफआर लगा दी।
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गहरी साजिश : सीसीटीवी हो गए थे बंद गुलमा देवी का आरोप है कि हत्या कर शव जलाने की घटना ऐसे स्थान पर हुई जहां बाहरी व्यक्ति या किसी मरीज के आने की गुंजाइश नहीं रहती। इसी दौरान सीसीटीवी कैमरे कुछ घंटों के लिए बंद मिले थे। कोई व्यक्ति खुद अपनी गला दबाकर हत्या करके खुद को नहीं जला सकता। इसके बाद भी केस बंद करना सोच से परे है। पुलिस ने अस्पताल के स्टाफ और अधिकारियों से लेकर पोस्टमार्टम टीम तक करीब 90 लोगों के बयान दर्ज किए। बावजूद खुलासा न होना समझ से परे है।
मानसिक अस्पताल में हत्या से जुड़े मामले में एफआर लगाए जाने की जानकारी नहीं है। ऐसा हुआ है तो पत्रावली दिखवाकर दोबारा विवेचना कराई जाएगी। पुलिस घटनाक्रम से जुड़ी सच्चाई सामने लाने में जुटेगी। - अनीता चौहान, सीओ तृतीय
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सीबीगंज के जौहरपुर निवासी महेश चंद्र मानसिक चिकित्सालय में अटेंडेंट थे। अच्छे दर्जी होने की वजह से भर्ती मरीजों की ड्रेस सिलने का काम भी करते थे। 19 अप्रैल 2022 को महेश का शव स्टोर रूम के पास जली अवस्था में मिला। परिसर के बाहर से ताला लगा था। पत्नी गुलमा देवी ने बताया कि पति सुबह साढ़े आठ बजे ड्यूटी गए थे। दोपहर में बेटे अखिलेश ने पिता को कॉल की तो फोन रिसीव नहीं हुआ। अस्पताल में ही कार्यरत परिजन को कॉल की तो उन्होंने खुद को छुट्टी पर होना बताया।
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शाम तक बात न होने पर बेटा और कुछ लोग अस्पताल गए। किचिन अटेंडेंट ने ताला खोला। जिस कमरे में पति ड्रेस सिलते थे, उसके बाहर स्टोर रूम परिसर के पास उनका जला हुआ शव मिला। साथी कर्मचारियों ने ही शव पहचाना और जोर से कहा कि हाय ये तुमने क्या कर लिया। मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। मौके से पुलिस ने एक सुसाइड नोट बरामद दिखाया जिसमें बेटी की बीमारी की वजह से आत्महत्या की बात लिखी थी।
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हत्या के तमाम साक्ष्यों के बाद परिवार इस तथ्य को मान भी लेता पर तीन डॉक्टरों के पैनल ने गला दबाकर हत्या की पुष्टि कर सभी सवालों पर विराम लगा दिय। पुष्ट हुआ कि हत्या के बाद शव जलाया गया था। अज्ञात में हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें हाल ही में बारादरी पुलिस ने साक्ष्य न मिलने का तर्क देकर एफआर लगा दी है। गुलमा देवी को इस पर ऐतराज है। शनिवार को जब वह एसएसपी दफ्तर पहुंचीं तो अधिकारी नहीं मिल सके। उन्होंने बताया कि वह सोमवार को एसएसपी से मिलकर मामले की फिर से विवेचना की मांग करेंगी।
- गुलमा देवी ने बताया कि पति के कुछ साथी कर्मचारी सूद पर रुपया देते हैं। उन्हें पति की मौत के कुछ समय बाद पता लगा कि पति ने इन लोगों से कुछ कर्ज लिया था, कर्ज की काफी रकम लौटा भी दी थी पर सूदखोर लगातार कई गुना ब्याज बताकर रुपये मांग रहे थे। उनके पति इसका विरोध कर अधिकारियों से शिकायत की बात कह रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या हो गई। उन्हें शक है कि सूदखोर स्टाफ का ही ये काम है। उन्होंने पुलिस को ये बात बताई भी थी। उम्मीद थी कि कुछ गिरफ्तारी होंगी तो सच सामने आ जाएगा पर पुलिस ने बिना उन्हें कोई जानकारी दिए एफआर लगा दी।
गहरी साजिश : सीसीटीवी हो गए थे बंद गुलमा देवी का आरोप है कि हत्या कर शव जलाने की घटना ऐसे स्थान पर हुई जहां बाहरी व्यक्ति या किसी मरीज के आने की गुंजाइश नहीं रहती। इसी दौरान सीसीटीवी कैमरे कुछ घंटों के लिए बंद मिले थे। कोई व्यक्ति खुद अपनी गला दबाकर हत्या करके खुद को नहीं जला सकता। इसके बाद भी केस बंद करना सोच से परे है। पुलिस ने अस्पताल के स्टाफ और अधिकारियों से लेकर पोस्टमार्टम टीम तक करीब 90 लोगों के बयान दर्ज किए। बावजूद खुलासा न होना समझ से परे है।
मानसिक अस्पताल में हत्या से जुड़े मामले में एफआर लगाए जाने की जानकारी नहीं है। ऐसा हुआ है तो पत्रावली दिखवाकर दोबारा विवेचना कराई जाएगी। पुलिस घटनाक्रम से जुड़ी सच्चाई सामने लाने में जुटेगी। - अनीता चौहान, सीओ तृतीय

अजुहा कस्बे में मॉ बेटे की मौत पर रोते बिलखते परिजन। संवाद