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रिटायर्ड रेलवे कर्मी की अवसाद ग्रस्त पत्नी ने आग लगाकर दी जान
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- फोटो : अमर उजाला
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पहले नि:संतान होने का दंश झेला फिर दत्तकपुत्र भी दूर हो गया तो टूट र्गइं कामिनी
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बरेली। वर्षों नि:संतान होने का दंश झेला, फिर बहन के बेटे को गोद लेकर उस पर इस आस में अपनी ममता लुटा दी कि बड़ा होकर वह बुढ़ापे का सहारा बनेगा। पालन-पोसकर बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया, लेकिन वह भी नौकरी करने चला गया तो महिला को फिर अकेलेपन ने अवसाद की ओर धकेल दिया। इसके चलते महिला ने सोमवार दोपहर अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह कर लिया। चीख सुनकर रिटायर्ड रेलवे कर्मी पति ने बचाने की कोशिश की, लेकिन महिला की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजन को सौंप दिया। रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सुभाषनगर क्षेत्र के अशोकनगर निवासी संतोष कुमार सक्सेना रिटायर्ड रेलवे कर्मी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अपनी कोई संतान नहीं है। अकेले होने के कारण उन्होंने अपनी साली रेखा रानी के बेटे शिवम को गोद ले लिया था। पत्नी कामिनी ने बढ़े चाव से उसका पालन पोषण किया। एक पल के लिए भी कभी शिवम आंखों से ओझल होता तो कामिनी बेचैन हो जाती थीं। कुछ समय पहले शाहजहांपुर के तिलहर में शिवम की एलआईसी में नौकरी लग गई। इसके बाद शिवम वहीं रहने लगा। शिवम के जाने के बाद से कामिनी अकेलेपन से परेशान रहने लगीं और अवसाद ग्रस्त हो गईं। अक्सर शिवम को याद करके रोने लगती थीं। सोमवार दोपहर कामिनी छत से कपड़े उतारने गईं। कुछ देर बाद ही उनके चीखने की आवाज आई तो संतोष दौड़कर ऊपर पहुंचे। देखा, कामिनी आग की लपटों में घिरी थीं। मिट्टी के तेल की बदबू आ रही थी। संतोष ने पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। इस बीच आसपास के लोग भी आ गए। उन्होंने आग बुझाई, लेकिन तब तक कामिनी ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
सुभाषनगर क्षेत्र के अशोकनगर निवासी संतोष कुमार सक्सेना रिटायर्ड रेलवे कर्मी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अपनी कोई संतान नहीं है। अकेले होने के कारण उन्होंने अपनी साली रेखा रानी के बेटे शिवम को गोद ले लिया था। पत्नी कामिनी ने बढ़े चाव से उसका पालन पोषण किया। एक पल के लिए भी कभी शिवम आंखों से ओझल होता तो कामिनी बेचैन हो जाती थीं। कुछ समय पहले शाहजहांपुर के तिलहर में शिवम की एलआईसी में नौकरी लग गई। इसके बाद शिवम वहीं रहने लगा। शिवम के जाने के बाद से कामिनी अकेलेपन से परेशान रहने लगीं और अवसाद ग्रस्त हो गईं। अक्सर शिवम को याद करके रोने लगती थीं। सोमवार दोपहर कामिनी छत से कपड़े उतारने गईं। कुछ देर बाद ही उनके चीखने की आवाज आई तो संतोष दौड़कर ऊपर पहुंचे। देखा, कामिनी आग की लपटों में घिरी थीं। मिट्टी के तेल की बदबू आ रही थी। संतोष ने पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। इस बीच आसपास के लोग भी आ गए। उन्होंने आग बुझाई, लेकिन तब तक कामिनी ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
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