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तो कल्याण के इंकार पर कटा धर्मपाल का नाम
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 09 Apr 2016 01:06 AM IST
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए आंवला विधायक धर्मपाल सिंह का नाम खूब चला लेकिन कल्याण सिंह की रजामंदी न मिलने से बात बिगड़ गई। धर्मपाल पार्टी हाईकमान राजस्थान के राज्यपाल पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के विकल्प के तौर पर देख रही थी। इसी रणनीति के तहत धर्मपाल को बरेली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसान कल्याण रैली का संयोजक बनाया गया था।
सूत्रों ने बताया कि धर्मपाल के नाम के नाम पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह तैयार नहीं हुए। वह उत्तर प्रदेश के लोधी-राजपूत बिरादरी के बीच अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं ताकि उनकी राजनीतिक सक्रियता का संदेश बना रहे। उनके बेटे राजवीर सिंह राजू भैया भी सांसद हैं और भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। ऐसे में अगर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में धर्मपाल सिंह की ताजपोशी होती तो सूबे में लोधी-राजपूत-किसान बिरादरी को कल्याण सिंह परिवार के इतर एक नेता मिल जाता। सूत्रों ने बताया कि पार्टी हाईकमान विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर कल्याण सिंह को नाराज नहीं करना चाहता था। प्रदेश में मौर्य-शाक्य-कुशवाहा बिरादरी बहुत बड़ी तादात में है। केशव तेजतर्रार और कट्टर हिंदूवादी छवि के हैं इसलिए उनका नाम और मजबूत हो गया।
इंसेट...
उम्मीद अंत तक रही
बरेली। धर्मपाल सिंह सुबह संजयनगर पार्टी कार्यालय पहुंच गए। यहां क्षेत्रीय संगठन मंत्री भवानी सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। सबको दिल्ली से सूचना का इंतजार था, जैसे ही केशव प्रसाद मौर्य का नाम आया, धर्मपाल सिंह रुके नहीं। बाकी नेता भी चले गए। बाद में हुई बैठक में पहुंचे आंवला विधायक ने कहा कि मौर्य के नेतृत्व में सबमिलकर विधानसभा चुनाव का लक्ष्य पूरा करेंगे। इस मौके पर आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप, जिलाध्यक्ष रविंद्र राठौर, महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष पूरनलाल लोधी, राजकुमार शर्मा, प्रतेश पांडेय आदि मौजूद रहे। आतिशबाजी भी की गई। कैंट विधायक राजेश अग्रवाल ने कहा कि केशव संघर्षशील व्यक्तित्व हैं, उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से पार्टी और मजबूती से चुनाव लड़ेगी।
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सूत्रों ने बताया कि धर्मपाल के नाम के नाम पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह तैयार नहीं हुए। वह उत्तर प्रदेश के लोधी-राजपूत बिरादरी के बीच अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं ताकि उनकी राजनीतिक सक्रियता का संदेश बना रहे। उनके बेटे राजवीर सिंह राजू भैया भी सांसद हैं और भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। ऐसे में अगर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में धर्मपाल सिंह की ताजपोशी होती तो सूबे में लोधी-राजपूत-किसान बिरादरी को कल्याण सिंह परिवार के इतर एक नेता मिल जाता। सूत्रों ने बताया कि पार्टी हाईकमान विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर कल्याण सिंह को नाराज नहीं करना चाहता था। प्रदेश में मौर्य-शाक्य-कुशवाहा बिरादरी बहुत बड़ी तादात में है। केशव तेजतर्रार और कट्टर हिंदूवादी छवि के हैं इसलिए उनका नाम और मजबूत हो गया।
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उम्मीद अंत तक रही
बरेली। धर्मपाल सिंह सुबह संजयनगर पार्टी कार्यालय पहुंच गए। यहां क्षेत्रीय संगठन मंत्री भवानी सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। सबको दिल्ली से सूचना का इंतजार था, जैसे ही केशव प्रसाद मौर्य का नाम आया, धर्मपाल सिंह रुके नहीं। बाकी नेता भी चले गए। बाद में हुई बैठक में पहुंचे आंवला विधायक ने कहा कि मौर्य के नेतृत्व में सबमिलकर विधानसभा चुनाव का लक्ष्य पूरा करेंगे। इस मौके पर आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप, जिलाध्यक्ष रविंद्र राठौर, महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष पूरनलाल लोधी, राजकुमार शर्मा, प्रतेश पांडेय आदि मौजूद रहे। आतिशबाजी भी की गई। कैंट विधायक राजेश अग्रवाल ने कहा कि केशव संघर्षशील व्यक्तित्व हैं, उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से पार्टी और मजबूती से चुनाव लड़ेगी।
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