UP: इस जिले में डेंगू ने तोड़ा रिकॉर्ड, 48 घंटे में 43 नए मरीज मिले; दो और संदिग्धों की मौत
बरेली में इस साल डेंगू ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मरीजों का आंकड़ा 628 तक पहुंच गया है। इससे पहले वर्ष 2021 में 595 मरीज मिले थे। विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू का प्रकोप अभी डेढ़ महीने तक जारी रह सकता है।
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बरेली में रोकथाम के दावों के बीच डेंगू के मरीजों और संदिग्धों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। बुधवार को डेंगू संदिग्ध दो लोगों की मौत के बाद आंकड़ा 24 पहुंच गया है। वहीं 48 घंटे में डेंगू के 43 नए मरीज मिलने के बाद आंकड़ा 628 जा पहुंचा है। पिछले वर्षों का रिकॉर्ड भी टूट गया है। इससे पहले वर्ष 2021 में डेंगू के 595 मरीज सामने आए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू का सीजन अभी एक से डेढ़ माह तक और खिंच सकता है।
बुधवार को आलमपुर जाफराबाद के बभियाना में जोगेंद्र पाल की बेटी अल्पना (12) की मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक चार दिनों से उसे तेज बुखार आ रहा था। निजी लैब से जांच कराने पर रिपोर्ट एनएस-1 पॉजिटिव मिली थी। वहीं, मंगलवार देर रात भमोरा के फतेह की पत्नी सुदामा देवी (40) की मौत हो गई थी। वह 10 दिनों से बुखार से पीड़ित थीं। शहर के निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। परिजनों के मुताबिक डॉक्टर ने अचानक प्लेटलेट्स गिरने और शॉक लगने से मौत की बात कही है।
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तीन सौ बेड अस्पताल में डेंगू के चार मरीज भर्ती
जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में मरीज भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ने लगे तो बुधवार को तीन सौ बेड अस्पताल में इमरजेंसी की पहली मंजिल पर बने वार्ड में चार मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। एसीएमओ डॉ. भानु प्रकाश ने बताया कि इलाज के लिए दो पालियों में दो-दो नर्सिंग स्टाफ, एक सहायक कर्मी और डॉक्टर लगाए गए हैं।
दवा न डॉक्टर, सिर्फ नाम का हेल्थ सेंटर
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावों पर जिम्मेदारों की अनदेखी भारी पड़ रही है। पिछले दिनों शहर में शुरू हुए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थिति बदहाल है। सेंटर पर न डॉक्टर हैं, न दवा और न ही जांच के साधन। हालांकि, रखवाली के लिए एक स्टाफ तैनात है। वंशीनगला में करीब तीन माह पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोला गया है। यहां संविदा पर एक डॉक्टर और एक सहायक स्टाफ की तैनाती हुई थी, मगर पिछले दिनों डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया था। तब से केंद्र पर मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल रहा है।
यहां पहुंचने के बाद उन्हें यूपीएचसी तक की भागदौड़ करनी पड़ती है।बुधवार को वंशीनगला सेंटर पर स्थानीय निवासी शशांक सिंह पहुंचे थे। उन्हें बुखार की जांच करानी थी, लेकिन केंद्र पर मौजूद स्टाफ ने उन्हें कहीं और इलाज कराने का सुझाव देने लगा। बताया कि डॉक्टर हैं नहीं, दो-चार दवाएं ही हैं। जो बगैर डॉक्टर के परामर्श के नहीं दी जा सकती हैं। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने शासन से भर्ती की अनुमति मिलते ही डॉक्टर तैनाती की बात कही है।