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Bareilly News: घर के अचार को पहुंचाया बाजार, फिर चखा समृद्धि का स्वाद
Mon, 11 Sep 2023 01:31 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 11 Sep 2023 01:31 AM IST
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बरेली। फरीदपुर के खल्लपुर गांव की रहने वाली नेमवती ने घर के अचार को बाजार तक पहुंचाकर अपने जीवन में समृद्धि का स्वाद चखा है। नेमवती महज हाईस्कूल पास हैं। बहुत पढ़ी लिखी न होेने के बावजूद हुनर का इस्तेमाल कर अपनी पहचान बरेली से निकालकर नोएडा और प्रदेश के अन्य जिलों में बना ली। नेमवती अब अपने और आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
नेमवती ने बताया कि महिलाओं के लिए घर में अचार बनाना बहुत साधारण सी बात है। मां और दादी ने उन्हें भी अचार बनाना सिखाया था। घर-परिवार और रिश्तेदारी में सब उनके बनाए अचार की काफी तारीफ करते थे। इसी से उन्हें यह विचार आया कि क्यों न इस स्वाद को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए उन्होंने समूह के जरिये बड़े स्तर पर अचार का व्यवसाय करने का प्रशिक्षण लिया।
इसके बाद कच्चे आम, मिर्च, नींबू, अदरक, गाजर, गोभी आदि तरह तरह के अचार बनाकर छोटे स्तर पर काम शुरू किया। लोगों को स्वाद पसंद आया तो उन्हें बड़े स्तर पर ऑर्डर मिलने लगे। यहीं से उनके काम को विस्तार मिला। इसके बाद उन्होंने मेले व अन्य जगहों पर अपने अचार का स्टॉल भी लगाना शुरू किया।
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महिलाओं को रोजगार भी दिया
वक्त के साथ काम को विस्तार मिला। ऑर्डर पूरा करने के लिए नेमवती को मदद की जरूरत पड़ी। इसके लिए उन्होंने आस-पास की अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया। किसी को डिब्बे पर पर्ची चिपकाने, किसी को कटिंग और मसाले मिक्स करने का काम दिया। हालांकि स्वाद और मसालों का अनुपात नेमवती ही तय करती हैं। ऐसा करके नेमवती को मदद मिली और अन्य महिलाओं को रोजगार का जरिया। उनके साथ जुड़ी अन्य महिलाएं भी काम की बदौलत सात से आठ हजार रुपया महीना कमाती हैं। यह काम नेमवती की आय का प्रमुख साधन भी है।
सफलता का राज-
नेमवती का कहना है कि उनका बनाया अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता है। घर के मसालों और शुद्ध सरसों के तेल से तैयार होने की वजह से अचार की गुणवत्ता बेहतर रहती है। इसमें किसी भी तरह का परिरक्षक (प्रिजरवेटिव) या केमिकल का इस्तेमाल न करने की वजह से स्वाद में लोगों को घर जैसा अहसास मिलता है। इसी वजह से लोगों को खास पसंद आता है।
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नेमवती ने बताया कि महिलाओं के लिए घर में अचार बनाना बहुत साधारण सी बात है। मां और दादी ने उन्हें भी अचार बनाना सिखाया था। घर-परिवार और रिश्तेदारी में सब उनके बनाए अचार की काफी तारीफ करते थे। इसी से उन्हें यह विचार आया कि क्यों न इस स्वाद को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए उन्होंने समूह के जरिये बड़े स्तर पर अचार का व्यवसाय करने का प्रशिक्षण लिया।
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इसके बाद कच्चे आम, मिर्च, नींबू, अदरक, गाजर, गोभी आदि तरह तरह के अचार बनाकर छोटे स्तर पर काम शुरू किया। लोगों को स्वाद पसंद आया तो उन्हें बड़े स्तर पर ऑर्डर मिलने लगे। यहीं से उनके काम को विस्तार मिला। इसके बाद उन्होंने मेले व अन्य जगहों पर अपने अचार का स्टॉल भी लगाना शुरू किया।
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महिलाओं को रोजगार भी दिया
वक्त के साथ काम को विस्तार मिला। ऑर्डर पूरा करने के लिए नेमवती को मदद की जरूरत पड़ी। इसके लिए उन्होंने आस-पास की अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया। किसी को डिब्बे पर पर्ची चिपकाने, किसी को कटिंग और मसाले मिक्स करने का काम दिया। हालांकि स्वाद और मसालों का अनुपात नेमवती ही तय करती हैं। ऐसा करके नेमवती को मदद मिली और अन्य महिलाओं को रोजगार का जरिया। उनके साथ जुड़ी अन्य महिलाएं भी काम की बदौलत सात से आठ हजार रुपया महीना कमाती हैं। यह काम नेमवती की आय का प्रमुख साधन भी है।
सफलता का राज-
नेमवती का कहना है कि उनका बनाया अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता है। घर के मसालों और शुद्ध सरसों के तेल से तैयार होने की वजह से अचार की गुणवत्ता बेहतर रहती है। इसमें किसी भी तरह का परिरक्षक (प्रिजरवेटिव) या केमिकल का इस्तेमाल न करने की वजह से स्वाद में लोगों को घर जैसा अहसास मिलता है। इसी वजह से लोगों को खास पसंद आता है।