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सांड़ ने किसान को पटक-पटककर मार डाला
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बिल्सी (बदायूं)। इलाके में छुट्टा घूम रहे सांड़ ने मंगलवार को एक किसान पर हमला बोल दिया और उसे पटक-पटककर मार डाला। इससे खेत पर काम कर रहे किसान दौड़ पड़े। उन्होंने बमुश्किल लाठी-डंडे लेकर सांड़ को भगाया, लेकिन तब तक किसान की जान चली गई। इसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसान के शव का पोस्टमार्टम करा दिया है।
थाना क्षेत्र के ग्राम बैरमई बुजुर्ग निवासी ओमप्रकाश (35) पुत्र गोपाल मंगलवार सुबह करीब आठ बजे अपने खेत में धान की रोपाई कर रहे थे। उसी खेत में पानी भी चला रहे थे। उससे कुछ दूरी पर अन्य किसान अपने खेत में काम रहे थे। उसी दौरान एक घुमंतू सांड़ उनकी ओर दौड़ता हुआ आया। जब तक ओमप्रकाश को इसका पता चलता और वह संभलते, उससे पहले सांड़ ने आकर ओमप्रकाश को अपने सींगों पर उठा लिया और जमीन पर पटक दिया। ओमप्रकाश की चीख-पुकार सुनकर दर्जनों किसान लाठी-डंडे लेकर आ गए। काफी देर तक सांड़ ने उन्हें नजदीक नहीं फटकने दिया और वह ओमप्रकाश को उठाकर पटकता रहा। तब तक गांव से भी दर्जनों लोग मौके पर पहुंच गए। फिर उन्होंने एकजुट होकर सांड़ को भगाया लेकिन तब तक किसान की मौत हो गई। इसकी सूचना मिलते ही परिवार वाले रोते-बिलखते खेत पर पहुंच गए। परिवार वालों की सूचना पर पुलिस भी आ गई और किसान के शव का पोस्टमार्टम करा दिया। किसान के एक बेटी प्रीती (18) और बेटा आकेश (17) है। उसकी पत्नी रामबेटी की पांच साल पहले मौत हो चुकी है।
गांव में होती गोशाला तो नहीं मरता किसान
बदायूं। प्रदेश सरकार ने छुट्टा घूम रहे गोवंशीय पशुओं और किसानों की फसल बचाने के लिए गांव-गांव और शहर में गोशाला बनाए जाने के आदेश दिए थे। बाकायदा उनके चारा पानी के धनराशि मुहैया कराई गई है। इसके बावजूद कई गांव में कागजी गोशाला खोली गई हैं। अगर बैरमई बुजुर्ग में गोशाला होती तो शायद किसान की मौत नहीं होती।
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ग्राम बैरमई बुजुर्ग निवासी दाताराम ने बताया कि मंगलवार सुबह एक सांड़ ने उसके भाई को पटक-पटककर मार डाला। यह सांड़ काफी समय से गांव में घूम रहा है। कई लोगों पर हमला कर चुका है। कुछ समय पूर्व रिश्तेदारी में आए पप्पू को घायल कर दिया था। उनके गांव में अकेला सांड़ ही छुट्टा नहीं घूम रहा है। कम से कम 15-20 गाय और सांड़ हैं। वो जिधर निकल जाते हैं। फसल को चौपट कर देते हैं। उनके गांव में न तो कोई गोशाला है और न ही इस पर कभी विचार किया गया। जबकि गांव के लोग कई बार ग्राम प्रधान से कह चुके हैं। अगर गांव में गोशाला होती तो यह सांड़ उसमें बंद होता और उसके भाई की जान नहीं जाती।
बिल्सी में पटक कर मार दिया था बालक
इसी साल 11 जनवरी को बिल्सी में एक सांड़ ने खेत से लौट रहे बालक को पटककर मार दिया था। वह सांड़ अस्थाई गोशाला में बंद कर दिया गया था। फिर अचानक गेट तोड़कर भागा था। उसी दौरान धर्मवीर (12) पुत्र इंद्रपाल अपने पिता के पीछे-पीछे खेत से लौट रहा था। पिता आगे निकल गए थे लेकिन धर्मवीर पीछे रह गया था। इस पर सांड़ ने बालक को सींगों पर उठा लिया और पटककर मार दिया।
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थाना क्षेत्र के ग्राम बैरमई बुजुर्ग निवासी ओमप्रकाश (35) पुत्र गोपाल मंगलवार सुबह करीब आठ बजे अपने खेत में धान की रोपाई कर रहे थे। उसी खेत में पानी भी चला रहे थे। उससे कुछ दूरी पर अन्य किसान अपने खेत में काम रहे थे। उसी दौरान एक घुमंतू सांड़ उनकी ओर दौड़ता हुआ आया। जब तक ओमप्रकाश को इसका पता चलता और वह संभलते, उससे पहले सांड़ ने आकर ओमप्रकाश को अपने सींगों पर उठा लिया और जमीन पर पटक दिया। ओमप्रकाश की चीख-पुकार सुनकर दर्जनों किसान लाठी-डंडे लेकर आ गए। काफी देर तक सांड़ ने उन्हें नजदीक नहीं फटकने दिया और वह ओमप्रकाश को उठाकर पटकता रहा। तब तक गांव से भी दर्जनों लोग मौके पर पहुंच गए। फिर उन्होंने एकजुट होकर सांड़ को भगाया लेकिन तब तक किसान की मौत हो गई। इसकी सूचना मिलते ही परिवार वाले रोते-बिलखते खेत पर पहुंच गए। परिवार वालों की सूचना पर पुलिस भी आ गई और किसान के शव का पोस्टमार्टम करा दिया। किसान के एक बेटी प्रीती (18) और बेटा आकेश (17) है। उसकी पत्नी रामबेटी की पांच साल पहले मौत हो चुकी है।
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गांव में होती गोशाला तो नहीं मरता किसान
बदायूं। प्रदेश सरकार ने छुट्टा घूम रहे गोवंशीय पशुओं और किसानों की फसल बचाने के लिए गांव-गांव और शहर में गोशाला बनाए जाने के आदेश दिए थे। बाकायदा उनके चारा पानी के धनराशि मुहैया कराई गई है। इसके बावजूद कई गांव में कागजी गोशाला खोली गई हैं। अगर बैरमई बुजुर्ग में गोशाला होती तो शायद किसान की मौत नहीं होती।
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ग्राम बैरमई बुजुर्ग निवासी दाताराम ने बताया कि मंगलवार सुबह एक सांड़ ने उसके भाई को पटक-पटककर मार डाला। यह सांड़ काफी समय से गांव में घूम रहा है। कई लोगों पर हमला कर चुका है। कुछ समय पूर्व रिश्तेदारी में आए पप्पू को घायल कर दिया था। उनके गांव में अकेला सांड़ ही छुट्टा नहीं घूम रहा है। कम से कम 15-20 गाय और सांड़ हैं। वो जिधर निकल जाते हैं। फसल को चौपट कर देते हैं। उनके गांव में न तो कोई गोशाला है और न ही इस पर कभी विचार किया गया। जबकि गांव के लोग कई बार ग्राम प्रधान से कह चुके हैं। अगर गांव में गोशाला होती तो यह सांड़ उसमें बंद होता और उसके भाई की जान नहीं जाती।
बिल्सी में पटक कर मार दिया था बालक
इसी साल 11 जनवरी को बिल्सी में एक सांड़ ने खेत से लौट रहे बालक को पटककर मार दिया था। वह सांड़ अस्थाई गोशाला में बंद कर दिया गया था। फिर अचानक गेट तोड़कर भागा था। उसी दौरान धर्मवीर (12) पुत्र इंद्रपाल अपने पिता के पीछे-पीछे खेत से लौट रहा था। पिता आगे निकल गए थे लेकिन धर्मवीर पीछे रह गया था। इस पर सांड़ ने बालक को सींगों पर उठा लिया और पटककर मार दिया।