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बेटियां भी कर सकती हैं पितरों का श्राद्ध

Sat, 12 Sep 2020 02:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2020 02:47 AM IST
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Daughters can also worship fathers
demo pic - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

पहली बार सीता जी ने राजा दशरथ का किया था श्राद्ध

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बरेली। बेटियां या महिलाएं जब पिता या पति का अंतिम संस्कार कर सकती हैं तो श्राद्ध भी कर सकती है। हिंदू धर्म के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध जरूरी होता है। ऐसा करने से उनकी आत्माएं तृप्त होती हैं और हमें आशीर्वाद मिलता है।
धर्मगुरुओं का कहना है कि आमतौर पर श्राद्ध पुत्र या पौत्र करता है, यदि दोनों लोग न हो तो घर की महिला पितरों का तर्पण कर सकती है। कई बार ऐसा प्रश्न उठता है कि महिलाएं या पुत्रियां श्राद्ध कर सकती हैं या नहीं। पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महिलाओं को भी श्राद्ध और पिंडदान करने की अनुमति दी गई है। गरुण पुराण के अनुसार बड़े या छोटे पुत्र के अभाव में पत्नी, कन्या और पुत्रवधू भी श्राद्ध कर सकती है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान राम, सीता जी और लक्ष्मण वनवास में पितृ पक्ष के दौरान राजा दशरथ श्राद्ध करने के लिए गया जी पहुंचे। वहां पर भगवान राम और लक्ष्मण श्राद्ध का सामान लेने के लिए शहर की ओर चले गए, जहां उन्हें देर हो गई। थोड़ी देर बाद आकाशवाणी हुई कि श्राद्ध का समय निकल रहा है। उसी समय सीता जी को राजा दशरथ की आत्मा के दर्शन हुए जो उनसे पिंडदान के लिए कह रही थी। इसके बाद सीता जी ने गाय को साक्षी मानकर मिट्टी का पिंड बनाकर पिंडदान किया।
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पिंडदान या तर्पण से पितरों की आत्मा तृप्त होती है। जिन घरों में पुरुष सदस्य न हो, उन घरों में स्त्री भी श्राद्ध कर सकती हैं। - पंडित राजेंद्र पांडेय, ज्योतिषाचार्य

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