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62 साल के ठाकुर दास कर रहे बीए
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Wed, 01 Jun 2016 01:52 AM IST
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रिटायरमेंट के बाद जिंदगी को अंतिम पड़ाव मानने वालों के लिए ठाकुरदास प्रेरणा हैं। ओएनजीसी (आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन) में डिप्टी सुप्रिटेंडेट पद से पिछले साल रिटायर हुए ठाकुरदास बीए कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यायल से उन्होंने फार्म भरा और मंगलवार को बरेली कालेज के सेंटर पर जब वह हिंदी का पहला पेपर दे रहे थे तो बाकी परीक्षार्थी उनको हैरत की निगाहों से देखते रहे।
शहर के कर्मचारी नगर में रह रहे ठाकुरदास ने 1981 में इंटरमीडिएट किया और उसके बाद फिटर ट्रेड से आईटीआई करके वर्ष 1985 में ओएनजीसी में रिगमैन (ब्रिलिंग) के पद से नौकरी की शुरुआत की और 30 साल की नौकरी में प्रमोशन पाकर डिप्टी सुप्रिंटेंडेंट के पद तक पहुंच गए लेकिन ग्रेजुएट पूरा करने की इच्छा को उन्होंने रिटायरमेंट के बाद पूरा करने की ठानी और बीए का फार्म हिंदी, राजनीतिक विज्ञान और समाजशास्त्र विषय से भर दिया है। इस साल उनका प्रथम वर्ष है। उन्होंने कहा कि अब स्नातक करके मैं उन नौजवानों को संदेश देना चाहता हूं जो पढ़ाई का महत्व नहीं समझते। नौजवानों को यह भी बताना चाहता हूं कि पढ़ाई सिर्फ कैरियर बनाने के लिए नहीं होती बल्कि वह जीवनशैली भी सिखाती है और यह भी कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती। ठाकुरदास ने कहा कि हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि जिंदगी कभी नहीं रुकती। जब भी मौका लगे, व्यक्ति को अपनी सकारात्मक इच्छाओं को पूरा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सर्विस टाइम में ग्रेजुएशन करने के लिए उन्होंने दो बार बीए का फार्म भरा था लेकिन परीक्षा के लिए टाइम नहीं निकाल सके। बीए के बाद वह एमए करके हिंदी में पीएचडी करना चाहते हैं।
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शहर के कर्मचारी नगर में रह रहे ठाकुरदास ने 1981 में इंटरमीडिएट किया और उसके बाद फिटर ट्रेड से आईटीआई करके वर्ष 1985 में ओएनजीसी में रिगमैन (ब्रिलिंग) के पद से नौकरी की शुरुआत की और 30 साल की नौकरी में प्रमोशन पाकर डिप्टी सुप्रिंटेंडेंट के पद तक पहुंच गए लेकिन ग्रेजुएट पूरा करने की इच्छा को उन्होंने रिटायरमेंट के बाद पूरा करने की ठानी और बीए का फार्म हिंदी, राजनीतिक विज्ञान और समाजशास्त्र विषय से भर दिया है। इस साल उनका प्रथम वर्ष है। उन्होंने कहा कि अब स्नातक करके मैं उन नौजवानों को संदेश देना चाहता हूं जो पढ़ाई का महत्व नहीं समझते। नौजवानों को यह भी बताना चाहता हूं कि पढ़ाई सिर्फ कैरियर बनाने के लिए नहीं होती बल्कि वह जीवनशैली भी सिखाती है और यह भी कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती। ठाकुरदास ने कहा कि हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि जिंदगी कभी नहीं रुकती। जब भी मौका लगे, व्यक्ति को अपनी सकारात्मक इच्छाओं को पूरा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सर्विस टाइम में ग्रेजुएशन करने के लिए उन्होंने दो बार बीए का फार्म भरा था लेकिन परीक्षा के लिए टाइम नहीं निकाल सके। बीए के बाद वह एमए करके हिंदी में पीएचडी करना चाहते हैं।
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