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Bareilly News: कम या ज्यादा उम्र में गर्भधारण से डाउन सिंड्रोम का संकट
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बरेली। नाबालिग या 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण से जन्मे नवजात डाउन सिंड्रोम की चपेट में आ सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादातर विवाह अब 30 वर्ष की उम्र के बाद हो रहे हैं। ऐसे में इस सिंड्रोम के चपेट में आने की आशंका ज्यादा है। वहीं, इसका कोई इलाज नहीं है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक डाउन सिंड्रोम को क्रोमोसोम 21 भी कहते हैं। क्योंकि इसमें क्रोमोसोम 21, दो की जगह तीन होते हैं। इसलिए इसे ट्राइसोमी या मंगोलिज्म के नाम से भी पुकारते हैं। बताया कि 21 वर्ष से 35 वर्ष के बीच गर्भधारण से बच्चों के जेनेटिक्स रोग होने की संभावना कम होती है। लेकिन नाबालिग अवस्था या 35 वर्ष के बाद गर्भधारण से गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित होने की आशंका रहती है। बताया कि डाउन सिंड्रोम के बच्चे स्वस्थ जीवन जीते हैं, पर मानसिक विकास प्रभावित होने से वह थोड़े सुस्त होते हैं।
कहा कि ओपीडी में हर वर्ष करीब 30-35 बच्चों में इसके लक्षण मिल रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान में अब तक इसका कोई इलाज या दवा नहीं बन सकी है। लिहाजा, इस रोग के दंश के साथ ही अभिभावक को बच्चों को पालन-पोषण करना होता है।
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वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक डाउन सिंड्रोम को क्रोमोसोम 21 भी कहते हैं। क्योंकि इसमें क्रोमोसोम 21, दो की जगह तीन होते हैं। इसलिए इसे ट्राइसोमी या मंगोलिज्म के नाम से भी पुकारते हैं। बताया कि 21 वर्ष से 35 वर्ष के बीच गर्भधारण से बच्चों के जेनेटिक्स रोग होने की संभावना कम होती है। लेकिन नाबालिग अवस्था या 35 वर्ष के बाद गर्भधारण से गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित होने की आशंका रहती है। बताया कि डाउन सिंड्रोम के बच्चे स्वस्थ जीवन जीते हैं, पर मानसिक विकास प्रभावित होने से वह थोड़े सुस्त होते हैं।
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कहा कि ओपीडी में हर वर्ष करीब 30-35 बच्चों में इसके लक्षण मिल रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान में अब तक इसका कोई इलाज या दवा नहीं बन सकी है। लिहाजा, इस रोग के दंश के साथ ही अभिभावक को बच्चों को पालन-पोषण करना होता है।
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