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देवोत्थान एकादशी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, लगाई आस्था की डुबकी
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मेला ककोड़ा। देवोत्थान एकादशी पर शुक्रवार को मेला ककोड़ा में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। शुक्रवार से लोगों का यहां बड़ी संख्या में आना शुरू हो गया। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद सूर्य भगवान को गंगाजल अर्पित किया, साथ ही गंगा में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन और दान-पुण्य किया। कई श्रद्धालुओं ने श्री सत्यनारायण भगवान की कथा कराई। श्रद्धालुओं ने वहां पर बच्चों के मुंडन भी कराए। इधर कछला में भी श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।
एकादशी को सबसे ज्यादा भीड़ कुर्मियान बस्ती में रही। वहां पहुंचे परिवारों में शामिल बच्चों ने मेले का खूब आनंद लिया। दरअसल, देवोत्थान एकादशी को मान्यता है कि चर्तुमास के उपरांत भगवान विष्णु जागते हैं। विष्णु और लक्ष्मी के साथ तुलसी की पूजा और व्रत किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन सालिग्राम और तुलसी का विवाह हुआ था। ऐसे में इस दिन देवोत्थान से पूर्णिमा में गंगा तट पर प्रवास कर गंगा स्नान और दान पुण्य करने से सभी एकादशी के व्रत का फल मिलता है। भीष्म ने भी यही व्रत कर बैकुंठ धाम को प्राप्त किया। आज मेले में गन्ने, सिंघाड़े, शकरकंद आदि की खूब बिक्री हुई।
शनिवार तक जमा कर सकते हैं एतिहासिक फोटो
मेला ककोड़ा। जिले की एतिहासिक इमारतों, स्थलों के आकर्षक चित्रों को मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध रुहेलखंड के ककोड़ा मेले में फोटो प्रदर्शनी लगाकर ऐतिहासिक फोटो प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी अपने फोटो नौ नवंबर शाम पांच बजे तक कलक्ट्रेट स्थित जिला सूचना कार्यालय में जमा कर सकते हैं, अधिक जानकारी के लिए जिला सूचना अधिकारी बाबूराम के मोबाइल नंबर 94530054ं10 भी संपर्क कर सकते हैं। विजेता प्रतिभागियों को ककोड़ा मेले में 10 नवंबर को सम्मानित किया जाएगा।
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एकादशी को सबसे ज्यादा भीड़ कुर्मियान बस्ती में रही। वहां पहुंचे परिवारों में शामिल बच्चों ने मेले का खूब आनंद लिया। दरअसल, देवोत्थान एकादशी को मान्यता है कि चर्तुमास के उपरांत भगवान विष्णु जागते हैं। विष्णु और लक्ष्मी के साथ तुलसी की पूजा और व्रत किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन सालिग्राम और तुलसी का विवाह हुआ था। ऐसे में इस दिन देवोत्थान से पूर्णिमा में गंगा तट पर प्रवास कर गंगा स्नान और दान पुण्य करने से सभी एकादशी के व्रत का फल मिलता है। भीष्म ने भी यही व्रत कर बैकुंठ धाम को प्राप्त किया। आज मेले में गन्ने, सिंघाड़े, शकरकंद आदि की खूब बिक्री हुई।
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शनिवार तक जमा कर सकते हैं एतिहासिक फोटो
मेला ककोड़ा। जिले की एतिहासिक इमारतों, स्थलों के आकर्षक चित्रों को मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध रुहेलखंड के ककोड़ा मेले में फोटो प्रदर्शनी लगाकर ऐतिहासिक फोटो प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी अपने फोटो नौ नवंबर शाम पांच बजे तक कलक्ट्रेट स्थित जिला सूचना कार्यालय में जमा कर सकते हैं, अधिक जानकारी के लिए जिला सूचना अधिकारी बाबूराम के मोबाइल नंबर 94530054ं10 भी संपर्क कर सकते हैं। विजेता प्रतिभागियों को ककोड़ा मेले में 10 नवंबर को सम्मानित किया जाएगा।
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