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पटाखा बाजार: हजार-पांच सौ के पटाखों में भी बच्चों को मजा नहीं आता
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बरेली। भले ही मंदी का शोर हो लेकिन पटाखा बाजार में हजार-दो हजार रुपये की खरीद पता ही नहीं चल रही है। अभिभावकों के साथ बाजार जाने वाले बच्चाें को तो हजार-पांच सौ रुपये के पटाखों में मजा ही नहीं आ रहा है। सौ फुटा रोड पर लगी दुकानों से खरीददारी करने वालों को पटाखे बड़े से थैले में रखकर दिए जा रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या कम देखकर बच्चे और खरीद के लिए मचल जाते हैं।
पिछले वर्ष से पटाखा आइटम महंगे हैं। पैकिंग पर तो चार-पांच गुना तक एमआरपी लिखी है। विक्रेता 50 फीसदी तक छूट दे रहे हैं। बावजूद इसके पटाखों से थैला भरना आसान नहीं है। इससे बच्चों के साथ जाने वाले लोगों का बजट बिगड़ जा रहा है। सौ फुटा रोड पर खरीददारी करने आए वीर सावरकरनगर निवासी आरके गौड़ ने बताया कि घर से एक हजार रुपये के पटाखा खरीदने का बजट तय करके निकले थे, जब खरीदे तो पता चला कि इससे काम नहीं चलेगा। बाद में इतने ही रुपये के और पटाखे खरीद लिए। यही बात अनुभव महानगर निवासी सोनू खंडेलवाल ने कही।
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पिछले वर्ष से पटाखा आइटम महंगे हैं। पैकिंग पर तो चार-पांच गुना तक एमआरपी लिखी है। विक्रेता 50 फीसदी तक छूट दे रहे हैं। बावजूद इसके पटाखों से थैला भरना आसान नहीं है। इससे बच्चों के साथ जाने वाले लोगों का बजट बिगड़ जा रहा है। सौ फुटा रोड पर खरीददारी करने आए वीर सावरकरनगर निवासी आरके गौड़ ने बताया कि घर से एक हजार रुपये के पटाखा खरीदने का बजट तय करके निकले थे, जब खरीदे तो पता चला कि इससे काम नहीं चलेगा। बाद में इतने ही रुपये के और पटाखे खरीद लिए। यही बात अनुभव महानगर निवासी सोनू खंडेलवाल ने कही।
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