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Bareilly News: वली मियां के कुल में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़
Tue, 28 Feb 2023 02:28 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 28 Feb 2023 02:28 AM IST
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बरेली। कुतुबुल अकताब हजरत मौलाना शाह वली मोहम्मद उर्फ वली मियां का तीन रोजा उर्स कुल की रस्म के साथ मुकम्मल हो गया। इसमें शिरकत करने के लिए दूर दराज प्रांतों और शहरों से जायरीन पहुंचे थे।
बाजार संदल खां स्थित दरगाह शरीफ पर सुबह से ही जायरीन की चहल पहल शुरू हो गई थी। आस्ताने और मेहमानखाने में लगतार जमावड़ा बना रहा। तमाम लोग इत्र, गुलाब और फूल पेश कर रहे थे। जिससे पूरा आस्ताना खुशबुओं से महक रहा था। वहीं जखीरा, जसोली, रेती, कटघर, हुसैन बाग, सराय, किला, ठिरिया आदि से चादरों के जुलूस आते रहे। दरगाह से लेकर आस-पास के तमाम इलाकों में चहल-पहल के बीच मोहल्लों में लंगर भी जारी रहे।
कार्यक्रम की कड़ी में दोपहर को सज्जादानशीन अल्हाज अनवर मियां की सदारत में जलसे की शुरुआत तिलावते कलाम से की गई। नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया गया। इसमें खास तौर से कारी गुलाम यासीन के कलाम - शाम सहर जो चांद तुम्हारे चैन से कटते हैं, शुक्र खुदा के रोज वली का सदका मिलता है.. इस शेर पर खूब दाद मिली। इसी तरह डॉ. शबाब कासगंजवी, हिलाल बदायूंनी, गुल मोहम्मद कदीरी, फराज वजीरगंजवी ने कलाम पेश किए। इस मौके पर तकरीर में सज्जादानशीन अनवर मियां ने कहा कि इंसान को हर वक्त तौबा करना चाहिए और झूठ से परहेज करना चाहिए। इससे पहले मौलाना तहीर अहमद ने नसीहत याफता तकरीर की। आखिर में शाम 4:50 बजे कुल शरीफ की फातिहा हुई। सलात-ओ-सलाम के बाद दुआ की गई। इस दौरान सैयद नाजिर अली उर्फ चांद, आरिफ उल्लाह, मोहसिन इरशाद, ताहिर शमसी, रूमान शमसी, मोहम्मद उस्मान, फैजी उल हक, हाफिज फाजिल आदि मौजूद रहे। संचालन हाफिज जानिसार मोहम्मदी ने किया।
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बाजार संदल खां स्थित दरगाह शरीफ पर सुबह से ही जायरीन की चहल पहल शुरू हो गई थी। आस्ताने और मेहमानखाने में लगतार जमावड़ा बना रहा। तमाम लोग इत्र, गुलाब और फूल पेश कर रहे थे। जिससे पूरा आस्ताना खुशबुओं से महक रहा था। वहीं जखीरा, जसोली, रेती, कटघर, हुसैन बाग, सराय, किला, ठिरिया आदि से चादरों के जुलूस आते रहे। दरगाह से लेकर आस-पास के तमाम इलाकों में चहल-पहल के बीच मोहल्लों में लंगर भी जारी रहे।
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कार्यक्रम की कड़ी में दोपहर को सज्जादानशीन अल्हाज अनवर मियां की सदारत में जलसे की शुरुआत तिलावते कलाम से की गई। नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया गया। इसमें खास तौर से कारी गुलाम यासीन के कलाम - शाम सहर जो चांद तुम्हारे चैन से कटते हैं, शुक्र खुदा के रोज वली का सदका मिलता है.. इस शेर पर खूब दाद मिली। इसी तरह डॉ. शबाब कासगंजवी, हिलाल बदायूंनी, गुल मोहम्मद कदीरी, फराज वजीरगंजवी ने कलाम पेश किए। इस मौके पर तकरीर में सज्जादानशीन अनवर मियां ने कहा कि इंसान को हर वक्त तौबा करना चाहिए और झूठ से परहेज करना चाहिए। इससे पहले मौलाना तहीर अहमद ने नसीहत याफता तकरीर की। आखिर में शाम 4:50 बजे कुल शरीफ की फातिहा हुई। सलात-ओ-सलाम के बाद दुआ की गई। इस दौरान सैयद नाजिर अली उर्फ चांद, आरिफ उल्लाह, मोहसिन इरशाद, ताहिर शमसी, रूमान शमसी, मोहम्मद उस्मान, फैजी उल हक, हाफिज फाजिल आदि मौजूद रहे। संचालन हाफिज जानिसार मोहम्मदी ने किया।
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