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अनजान कॉल नेे तोड़ दी गृहस्थी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 20 Mar 2016 02:05 AM IST
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अनजान कॉल ने एक हंसते-खिलते परिवार में दरार पैदा कर दी। शक होने पर पति ने बुरा भला कहना शुरू किया तो पत्नी को ससुराल ही छोड़ना पड़ा। शनिवार को मामला परामर्श केंद्र पहुंचा। काउंसलर सुलह की कोशिश करते रहे मगर पति जिद पर अड़ा रहा।
स्रमिता और सोनू की शादी को अभी एक साल हुआ है। स्रमिता के अनुसार उसके फोन पर अनजान नंबर से कॉल आती थी। कॉल करने वाला व्यक्ति उसे अपनी गर्ल फ्रेंड कहता था। उसने इस बारे में जब पति को बताया तो वह शक करने लगा। कॉल डिटेल भी निकलवाई गई लेकिन पति का शक कम नहीं हुआ। वह बात-बात पर परेशान करने लगा। विवाद बढ़ने पर दोनों के परिवार वालों ने समझौते की कोशिश भी की। बीए तक पढ़ी स्रमिता चार महीने से अपने मायके तिलक कॉलोनी, सुभाषनगर रह रही है। काउंसलर के सामने सोनू शक करने के आरोपों से इंकार करता रहा। उसका कहना है कि पत्नी ससुराल कांधरपुर में नहीं रहना चाहती, इस वजह से उन दोनों के बीच विवाद है। काउंसलर एसडी तिवारी ने दोनों को सोचने के लिए वक्त देते हुए अगली तारीख में आने को कहा।
दस रिश्तों ने तोड़ा नाता
परामर्श केंद्र में शनिवार को 35 मामलों की काउंसिलिंग कराई गई। 15 में समझौते हुए। 10 केसों में पति-पत्नी को सोचने के लिए वक्त दिया गया। हालांकि 10 केसों में पति-पत्नी के बीच समझौता नहीं हो सका, जिस कारण उनकी फाइल बंद कर दी गई।
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स्रमिता और सोनू की शादी को अभी एक साल हुआ है। स्रमिता के अनुसार उसके फोन पर अनजान नंबर से कॉल आती थी। कॉल करने वाला व्यक्ति उसे अपनी गर्ल फ्रेंड कहता था। उसने इस बारे में जब पति को बताया तो वह शक करने लगा। कॉल डिटेल भी निकलवाई गई लेकिन पति का शक कम नहीं हुआ। वह बात-बात पर परेशान करने लगा। विवाद बढ़ने पर दोनों के परिवार वालों ने समझौते की कोशिश भी की। बीए तक पढ़ी स्रमिता चार महीने से अपने मायके तिलक कॉलोनी, सुभाषनगर रह रही है। काउंसलर के सामने सोनू शक करने के आरोपों से इंकार करता रहा। उसका कहना है कि पत्नी ससुराल कांधरपुर में नहीं रहना चाहती, इस वजह से उन दोनों के बीच विवाद है। काउंसलर एसडी तिवारी ने दोनों को सोचने के लिए वक्त देते हुए अगली तारीख में आने को कहा।
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दस रिश्तों ने तोड़ा नाता
परामर्श केंद्र में शनिवार को 35 मामलों की काउंसिलिंग कराई गई। 15 में समझौते हुए। 10 केसों में पति-पत्नी को सोचने के लिए वक्त दिया गया। हालांकि 10 केसों में पति-पत्नी के बीच समझौता नहीं हो सका, जिस कारण उनकी फाइल बंद कर दी गई।
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