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तीन शव एक साथ पहुंचे तो रो पड़ा बैरमनगर
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Fri, 25 Nov 2016 01:13 AM IST
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बैरमनगर गांव में चहेल्लुम के जुलूस के दौरान छज्जे की दीवार गिरने से मलबे में दबे तीन लोगों के शव बृहस्पतिवार देरशाम पहुंचे तो पूरा गांव रो पड़ा। मृतकों के घरों में ग्रामीणों का तांता लग गया। गमगीन माहौल में तीनों को सुपुर्देखाक कर दिया गया। उधर, एक और घायल साबिर ने भी दम तोड़ दिया है। अब मरने वालों की संख्या चार हो गई है। 24 से ज्यादा घायलों का अब भी विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
चहेल्लुम पर ताजियेदारों का मुकाबला देखने के लिए गांव के लोग बुधवार को मोबीन खां की छत जमा थे। इस बीच छत के छज्जे की करीब 15 मीटर लंबी दीवार ढह गई। हादसे में तस्लीम, जाकिर हुसैन और सरदार अहमद की मौत हो गई थी। देर रात साबिर रजा ने भी दम तोड़ दिया। विधायक सुल्तान बेग, सपा के जिला उपाध्यक्ष हाजी गुुड्डू, शाहिद रजा खां, पूर्व प्रमुख प्रमोद अग्रवाल, भूपेंद्र कुर्मी आदि ने मृतकों के परिवार वालों को सांत्वना दी। एसडीएम मीरगंज अर्चना द्विवेदी ने बताया कि मुआवजा दिलाने के लिए पीड़ित परिवारों की सूची तैयार की जा रही है।
चारों घरों में मचा कोहराम
शेरगढ़। हादसे मे मरे तस्लीम की तहेरी बहन रुखसार बी की 25 नवंबर को बारात आनी थी। घर में खुशी का माहौल था। तस्लीम हल्द्वानी में मिठाई कारीगरी का काम करता था। दो दिन पहले ही घर आया था। मां नथिया और पत्नी जैनब बी ने कहा कि उन्होंने जुलूस में न जाने को कहा था मगर वह नहीं माना और ढोल बजाने की बात कहकर चला गया। साबिर रजा खां गांव में ही कपडे़ सिलने का काम करता था। उसके तीन बच्चे हैं। मां नथिया और पत्नी नगीना बी का रो-रो बुरा हाल है। जाकिर हुसैन गुड़गांव में कबाड़ की दुकान चलाता था। वह भी चहेल्लुम पर गांव में लगने वाले मेले के लिए आया था। उसकी पत्नी मोबीन और मां रहीश बदहवास हो जा रही थीं। सरदार अहमद गांव में मजदूरी कर परिवार पाल रहा था। उसकी मां मजीदन और पत्नी हसीन बानो भी आंसू नहीं रोक पा रही हैं।
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चहेल्लुम पर ताजियेदारों का मुकाबला देखने के लिए गांव के लोग बुधवार को मोबीन खां की छत जमा थे। इस बीच छत के छज्जे की करीब 15 मीटर लंबी दीवार ढह गई। हादसे में तस्लीम, जाकिर हुसैन और सरदार अहमद की मौत हो गई थी। देर रात साबिर रजा ने भी दम तोड़ दिया। विधायक सुल्तान बेग, सपा के जिला उपाध्यक्ष हाजी गुुड्डू, शाहिद रजा खां, पूर्व प्रमुख प्रमोद अग्रवाल, भूपेंद्र कुर्मी आदि ने मृतकों के परिवार वालों को सांत्वना दी। एसडीएम मीरगंज अर्चना द्विवेदी ने बताया कि मुआवजा दिलाने के लिए पीड़ित परिवारों की सूची तैयार की जा रही है।
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चारों घरों में मचा कोहराम
शेरगढ़। हादसे मे मरे तस्लीम की तहेरी बहन रुखसार बी की 25 नवंबर को बारात आनी थी। घर में खुशी का माहौल था। तस्लीम हल्द्वानी में मिठाई कारीगरी का काम करता था। दो दिन पहले ही घर आया था। मां नथिया और पत्नी जैनब बी ने कहा कि उन्होंने जुलूस में न जाने को कहा था मगर वह नहीं माना और ढोल बजाने की बात कहकर चला गया। साबिर रजा खां गांव में ही कपडे़ सिलने का काम करता था। उसके तीन बच्चे हैं। मां नथिया और पत्नी नगीना बी का रो-रो बुरा हाल है। जाकिर हुसैन गुड़गांव में कबाड़ की दुकान चलाता था। वह भी चहेल्लुम पर गांव में लगने वाले मेले के लिए आया था। उसकी पत्नी मोबीन और मां रहीश बदहवास हो जा रही थीं। सरदार अहमद गांव में मजदूरी कर परिवार पाल रहा था। उसकी मां मजीदन और पत्नी हसीन बानो भी आंसू नहीं रोक पा रही हैं।
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