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सोमपाल ने पुलिस की रटी रटाई कहानी सुना दी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 02 Sep 2016 01:35 AM IST
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मीरगंज। सैंजना गांव की चार मौतों का रहस्य अभी बरकरार है। जबकि पुलिस जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चारों की मौत को आत्महत्या बताकर फाइल बंद करने की तैयारी में है। लापता राजू के दोस्त सोमपाल ने भी पुलिस की ही रटी-रटाई कहानी मीडिया को सुना दी। पुलिस इतनी जल्दबाजी में है कि पीड़ित परिवार की बात भी पुलिस सुनने को तैयार नहीं है। राजू की मौत के मामले में तो मुकदमा दर्ज लिखने की जरूर नहीं समझी। प्रधान की सूचना पर ही उसके शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद पालनहार पिता महेश शर्मा को सौंप दिया। पुलिस के मुताबिक सोमपाल गंगवार पुत्र परमानंद बुधवार रात लगभग नौ बजे रामपुर में दिल्ली से आ रही रोडवेज बस से पकड़ा गया। सोमपाल ने पत्रकारों को पुलिस की रटी-रटाई कहानी सुनी दी। उसने बताया कि जिस दिन पिंकी, शारदा और प्रीति गायब हुई थीं। उसी दिन वह राजू शर्मा के साथ दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके में अपनी ससुराल में था। उसके पत्नी-बच्चों का पता नहीं, कहां हैं?
बकौल सोमपाल, राजू की शारदा से डेढ़ साल से दोस्ती थी। तीन लड़कियों के गायब होने पर गांव के खिलेंद्र पुत्र सरनाम सिंह ने दिल्ली में राजू को फोन पर जानकारी दी थी। कहा था कि लड़कियों को गायब कर हत्या करने में तुम्हारा (राजू) का नाम आ रहा है। इस पर राजू डर गया था। 27 अगस्त की रात लगभग साढ़े नौ बजे वह राजू संग दिल्ली से सैंजना आकर प्रधान मो. युसुफ के भाई मो. नबी के घर की ऊपरी मंजिल पर ठहरा था। जानकारी मिलने पर कुछ देर बाद राजू की मुंह बोली मां त्रिवेणी देवी उर्फ सरोज भी वहीं आ गई थीं। सोमपाल, उसकी पत्नी शकुंतला, राजू, सरोज सब साथ-साथ सोए थे। बुधवार को जब सरोज से फोन पर पूछा गया कि 27-28 अगस्त की रात तो राजू प्रधान के भाई के घर उसके साथ ही था, तो वह इन्कार नहीं कर पाई। जबकि राजू की लाश मिलने वाले दिन पूछने पर भी वह कई दिन से राजू के गायब होने का राग ही अलापती रही थी। सोमपाल ने बताया: 27-28 अगस्त की पूरी रात कोई सो नहीं पाया। तड़के साढ़े चार बजे आंख लगी और घंटे भर बाद राजू वहां नहीं था। अगले दिन उसकी भी लाश गांव से दो किमी दूर उत्तर पश्चिम में भाखड़ा नदी से 100 मीटर दूरी पर परचवां के मक्खन लाल के तिल के खेत में मिली। बताया-मैं पुलिस के पकड़े जाने के डर से भाग गया था।
तीन नहीं चार लड़कियां थी
सोमपाल ने बताया कि तीन नहीं चार लड़कियां परचई के मेले से लौटते वक्त गांव से कुछ दूरी पर ईख के खेत में घुसी थीं। उनमें से एक ममता पुत्री दुर्गाप्रसाद कुछ देर बाद घर लौट आई थी। जबकि बाकी तीनों की अगले दिन भाखड़ा नदी में दस किमी के दायरे में लाशें मिली थीं। इसके आगे उसे कुछ जानकारी नहीं है। लड़कियों और राजू की मौत किस तरह हुई यह तो वह नहीं जानता है। एसओ सतेंद्र यादव ने बताया कि किसी बेगुनाह को हम जेल नहीं भेजेंगे। चारों ने आत्महत्या की है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इसका खुलासा पहले ही हो चुका है।
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न अपहरण की तहरीर की जांच की ने तहरीरें देखी
शराब माफिया और जमीन तो नहीं वजह!
बरेली। दस साल पहले दियोसास गांव में कच्ची-जहरीली शराब पीने से 29 लोगों की मौत के मामले में उम्रकैद की सजायाफ्ता छत्रपाल हाईकोर्ट से जमानत पर छूटा हुआ है। लड़कि यों के परिवार के बेनीराम ने छत्रपाल, सोनू, प्रेमपाल, बृजपाल समेत जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखाने को तहरीर दी थी। सभी मेहमान की तरह थाने में बैठकर घर चले गए।
लड़कियों के अपहरण के मुकदमे की विवेचना करना भी पुलिस ने जरूरी नहीं समझा। पहले ही दिन से जो कहानी चली पुलिस उसी को आगे बढ़ाती रही। लड़की के परिवार वालों से छत्रपाल का रोड किनारे की तालाब की जिस जमीन को लेकर विवाद था वह जमीन भी लाखों की है। छत्रपाल ने साल भर पहले ब्रजलाल से खरीदी थी। जिस दिन लड़कियां गायब हुईं, उसकी एडीजे-13 कोर्ट में पेशी थी और शाम चार बजे पेशी से घर पहुंचने पर जानकारी हुई थी। भाई राजेंद्र ने भी उसकी बात की तस्दीक की। पुलिस हिरासत में चौथे संदिग्ध कुंवरपाल ने भी बाकी चारों से मिलता-जुलता ही बयान देते हुए लड़कियों की मौत के कारणों की जानकारी से इन्कार किया है। राजू की मौत को तो पुलिस ने बेहद हल्के में निपटा दिया। लाश मिलने वाले दिन उसके पालनहार पिता महेश शर्मा और भाई शिवम को पुलिस ने थाने में बैठा रखा था, लेकिन प्रधान की सूचना पर राजू के शव का पोस्टमार्टम कराकर उसकी फाइल बंद करने की तैयारी कर ली गई। महेश की हत्या की तहरीर पर कोई बोलने को ही तैयार नहीं था। चारों में से किसी की भी बिसरा रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इसके बाद भी पुलिस की जल्दबाजी पूरे मामले पर सवाल खड़े कर रही है।
भाजपा नेता सैंजना पहुंचकर संवेदना जताई
-बृहस्पतिवार को भाजपा से जुड़े जिला पंचायत सदस्य भद्रसेन गंगवार, ममता गंगवार और मंजू कोरी सैंजना गांव पहुंचे और मृत लड़कियों, राजू के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया। न्यायोचित कार्रवाई कराने और नाइंसाफी न होने देने के दावे भी किए।
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बकौल सोमपाल, राजू की शारदा से डेढ़ साल से दोस्ती थी। तीन लड़कियों के गायब होने पर गांव के खिलेंद्र पुत्र सरनाम सिंह ने दिल्ली में राजू को फोन पर जानकारी दी थी। कहा था कि लड़कियों को गायब कर हत्या करने में तुम्हारा (राजू) का नाम आ रहा है। इस पर राजू डर गया था। 27 अगस्त की रात लगभग साढ़े नौ बजे वह राजू संग दिल्ली से सैंजना आकर प्रधान मो. युसुफ के भाई मो. नबी के घर की ऊपरी मंजिल पर ठहरा था। जानकारी मिलने पर कुछ देर बाद राजू की मुंह बोली मां त्रिवेणी देवी उर्फ सरोज भी वहीं आ गई थीं। सोमपाल, उसकी पत्नी शकुंतला, राजू, सरोज सब साथ-साथ सोए थे। बुधवार को जब सरोज से फोन पर पूछा गया कि 27-28 अगस्त की रात तो राजू प्रधान के भाई के घर उसके साथ ही था, तो वह इन्कार नहीं कर पाई। जबकि राजू की लाश मिलने वाले दिन पूछने पर भी वह कई दिन से राजू के गायब होने का राग ही अलापती रही थी। सोमपाल ने बताया: 27-28 अगस्त की पूरी रात कोई सो नहीं पाया। तड़के साढ़े चार बजे आंख लगी और घंटे भर बाद राजू वहां नहीं था। अगले दिन उसकी भी लाश गांव से दो किमी दूर उत्तर पश्चिम में भाखड़ा नदी से 100 मीटर दूरी पर परचवां के मक्खन लाल के तिल के खेत में मिली। बताया-मैं पुलिस के पकड़े जाने के डर से भाग गया था।
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तीन नहीं चार लड़कियां थी
सोमपाल ने बताया कि तीन नहीं चार लड़कियां परचई के मेले से लौटते वक्त गांव से कुछ दूरी पर ईख के खेत में घुसी थीं। उनमें से एक ममता पुत्री दुर्गाप्रसाद कुछ देर बाद घर लौट आई थी। जबकि बाकी तीनों की अगले दिन भाखड़ा नदी में दस किमी के दायरे में लाशें मिली थीं। इसके आगे उसे कुछ जानकारी नहीं है। लड़कियों और राजू की मौत किस तरह हुई यह तो वह नहीं जानता है। एसओ सतेंद्र यादव ने बताया कि किसी बेगुनाह को हम जेल नहीं भेजेंगे। चारों ने आत्महत्या की है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इसका खुलासा पहले ही हो चुका है।
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न अपहरण की तहरीर की जांच की ने तहरीरें देखी
शराब माफिया और जमीन तो नहीं वजह!
बरेली। दस साल पहले दियोसास गांव में कच्ची-जहरीली शराब पीने से 29 लोगों की मौत के मामले में उम्रकैद की सजायाफ्ता छत्रपाल हाईकोर्ट से जमानत पर छूटा हुआ है। लड़कि यों के परिवार के बेनीराम ने छत्रपाल, सोनू, प्रेमपाल, बृजपाल समेत जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखाने को तहरीर दी थी। सभी मेहमान की तरह थाने में बैठकर घर चले गए।
लड़कियों के अपहरण के मुकदमे की विवेचना करना भी पुलिस ने जरूरी नहीं समझा। पहले ही दिन से जो कहानी चली पुलिस उसी को आगे बढ़ाती रही। लड़की के परिवार वालों से छत्रपाल का रोड किनारे की तालाब की जिस जमीन को लेकर विवाद था वह जमीन भी लाखों की है। छत्रपाल ने साल भर पहले ब्रजलाल से खरीदी थी। जिस दिन लड़कियां गायब हुईं, उसकी एडीजे-13 कोर्ट में पेशी थी और शाम चार बजे पेशी से घर पहुंचने पर जानकारी हुई थी। भाई राजेंद्र ने भी उसकी बात की तस्दीक की। पुलिस हिरासत में चौथे संदिग्ध कुंवरपाल ने भी बाकी चारों से मिलता-जुलता ही बयान देते हुए लड़कियों की मौत के कारणों की जानकारी से इन्कार किया है। राजू की मौत को तो पुलिस ने बेहद हल्के में निपटा दिया। लाश मिलने वाले दिन उसके पालनहार पिता महेश शर्मा और भाई शिवम को पुलिस ने थाने में बैठा रखा था, लेकिन प्रधान की सूचना पर राजू के शव का पोस्टमार्टम कराकर उसकी फाइल बंद करने की तैयारी कर ली गई। महेश की हत्या की तहरीर पर कोई बोलने को ही तैयार नहीं था। चारों में से किसी की भी बिसरा रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इसके बाद भी पुलिस की जल्दबाजी पूरे मामले पर सवाल खड़े कर रही है।
भाजपा नेता सैंजना पहुंचकर संवेदना जताई
-बृहस्पतिवार को भाजपा से जुड़े जिला पंचायत सदस्य भद्रसेन गंगवार, ममता गंगवार और मंजू कोरी सैंजना गांव पहुंचे और मृत लड़कियों, राजू के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया। न्यायोचित कार्रवाई कराने और नाइंसाफी न होने देने के दावे भी किए।