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शाही पुलिस को मुर्दों से भी खतरा!
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 16 Jul 2016 12:38 AM IST
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पुलिस के खेल भी निराले हैं। सावन में कांवड़ यात्रा से पहले शाही पुलिस को माहौल खराब होने का इतना खतरा महसूस हो गया कि उसने मृत व्यक्ति को भी शांति भंग की आशंका में मुचलका में पाबंद कर दिया। पुलिस की यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
सावन में हर साल निकलने वाली कांवड़ यात्रा से पहले पुलिस झगड़ा फसाद करने वाले संदिग्धों को निजी मुचलके पर पाबंद करती है ताकि माहौल खराब न हो। हालांकि इसमें अधिकतर कार्रवाई एक पक्षीय होने की बात उठती रहती है। शुक्रवार को थाना शाही की पुलिस ने रम्पुरा गांव के 22 लोगों को निजी मुचलके पर पाबंद किया ताकि कांवड़ यात्रा में बवाल न हो। इनमें भूरा, अचल सक्सेना, अमन सक्सेना, श्याम लाल के साथ ही अशर्फीलाल पुत्र तोताराम का नाम भी शामिल है। अशर्फीलाल (80) का लंबी बीमारी के बाद फरवरी में मौत हो गई थी। सावन के पहले सोमवार में महज 48 घंटे बचे हैं। ऐसे में पुलिस मनमाने तरीके से लोगों को पाबंद कर अपने नंबर बढ़ाने में जुटी है। प्रभारी एसओ शिवकुमार शुक्ला से जब इस मामले में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विवेचक एचसीपी रघुवीर सिंह की गलती से ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि मृतक के खिलाफ 2012 में धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। तब से उसके खिलाफ मुचलका पाबंद किया जाता रहा है। शिक्षक नेता महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
कोट
मुचलका में पाबंद करने से पहले छानबीन होती है। इसकी लंबी प्रक्रिया है। अगर ऐसी बात है तो मामले की जांच कर जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- यमुना प्रसाद, एसपी देहात
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सावन में हर साल निकलने वाली कांवड़ यात्रा से पहले पुलिस झगड़ा फसाद करने वाले संदिग्धों को निजी मुचलके पर पाबंद करती है ताकि माहौल खराब न हो। हालांकि इसमें अधिकतर कार्रवाई एक पक्षीय होने की बात उठती रहती है। शुक्रवार को थाना शाही की पुलिस ने रम्पुरा गांव के 22 लोगों को निजी मुचलके पर पाबंद किया ताकि कांवड़ यात्रा में बवाल न हो। इनमें भूरा, अचल सक्सेना, अमन सक्सेना, श्याम लाल के साथ ही अशर्फीलाल पुत्र तोताराम का नाम भी शामिल है। अशर्फीलाल (80) का लंबी बीमारी के बाद फरवरी में मौत हो गई थी। सावन के पहले सोमवार में महज 48 घंटे बचे हैं। ऐसे में पुलिस मनमाने तरीके से लोगों को पाबंद कर अपने नंबर बढ़ाने में जुटी है। प्रभारी एसओ शिवकुमार शुक्ला से जब इस मामले में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विवेचक एचसीपी रघुवीर सिंह की गलती से ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि मृतक के खिलाफ 2012 में धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। तब से उसके खिलाफ मुचलका पाबंद किया जाता रहा है। शिक्षक नेता महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
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कोट
मुचलका में पाबंद करने से पहले छानबीन होती है। इसकी लंबी प्रक्रिया है। अगर ऐसी बात है तो मामले की जांच कर जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- यमुना प्रसाद, एसपी देहात