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सरकारी खजाने में अंधेरा कर गईं स्ट्रीट लाइट 

Wed, 09 May 2018 06:34 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Wed, 09 May 2018 06:34 PM IST
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street light scam: officials shows only 1600 solar lights after buying 4k
solar street lights
विधायक निधि के बाद 14वें वित्त आयोग से लगीं करीब 50 लाख रुपये की स्ट्रीट लाइटों में भी घोटाला सामने आया है। पिछले वित्तीय वर्ष में बड़ी तादाद में ग्राम पंचायतों ने जिन स्ट्रीट लाइटों की 4000 रुपये की दर से खरीद दिखाई गई है, उनका बाजार में रेट 1600 रुपये है। डीएम के आदेश के बाद जिन 56 गांवों की जांच कर रही हैं, उनमें स्ट्रीट लाइटों की खरीद का भी रिकार्ड चेक किया जा रहा है। इस जांच से अधिकारियों में खलबली मची हुई है। 
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स्ट्रीट लाइटों की खरीद में गबन से जुड़ा एक ऐसा ही मामला भोजीपुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मियांपुर का सामने आया है। यहां जिस फर्म से ग्राम पंचायत ने स्ट्रीट लाइट की खरीद चार हजार रुपये दिखाई है, उसी फर्म ने इस स्ट्रीट लाइट की बिक्री आम ग्राहक को महज 1600 रुपये में की है। यहां ज्यादा रेट पर करीब 20 स्ट्रीट लाइटें लगवाई गई हैं। डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने कमेटी गठित कर इसकी जांच शुरू करा दी है। इसी तरह मीरगंज ब्लॉक के मोहम्मदगंज, आलमपुर जाफराबाद के प्रेमराजपुर और मजनूपुर, दमखोदा ब्लॉक के हरपुर गनीमत सहित अन्य 56 ग्राम पंचायतें भी खरीद में घोटाला करने के मामले में निशाने पर हैं। डीएम के आदेश पर इन सभी ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइटों की खरीद के मामले की विभिन्न अधिकारियों से जांच कराई जा रही है।
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नेडा या सरकारी पोर्टल के बजाय सीधे बाजार से की खरीद  
ग्राम पंचायतों को सोलर संचालित स्ट्रीट लाइटों को लगवाने के लिए सरकारी विभाग नेडा से खरीद करनी चाहिए। इसके अलावा निर्धारित रेट पर खरीद के लिए सरकारी पोर्टल भी बना हुआ है, लेकिन इससे खरीद करने के बजाय ग्राम पंचायतों ने सीधे बाजार से मनमाने रेट पर लाइटें क्रय की और अधिकारियों की मिलीभगत से उसका भुगतान भी करा लिया। जिले की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइट खरीद को लेकर यही स्थिति सामने आई है। 
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तमाम ग्राम पंचायतों में बाजार से अधिक रेट पर स्ट्रीट लाइटों के खरीदने के मामले सामने आने हैं। इसमें एक ग्राम पंचायत की वह खुद जांच कर रहे हैं। जबकि बाकी 56 गांवों की जांच डीएम के आदेश पर अन्य अधिकारी कर रहे हैं। अगर एक फर्म ने सरकार को ज्यादा रेट पर स्ट्रीट लाइटें बेची हैं तो वे भी जिम्मेदार हैं। - विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ 
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