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मां ने शिकायत पर ध्यान दिया होता तो ये न होता
बरेली
Updated Wed, 04 Jan 2017 12:37 AM IST
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ग्रीन पार्क कालोनी में हुई दिल दहला देने वाली वारदात से हर कोई सन्न है। लड़की और उसकी मां के बातों से ये बात साफ हो रही है कि 15 साल की बेटी पर पिता की नीयत पहले से खराब थी। लड़की के मुताबिक वह अक्सर टायलेट जाने से पहले उसे घूरता रहता था। उसकी अजीब सी नजरों से डर कर उसने मां से शिकायत भी कीं लेकिन मां ने हर बार उसे गलत फहमी मान कर चुप करा दिया। मां को पति की ऐसी हैवानियत का जरा भी अंदाजा नहीं था वरना यह वारदात न होती।
छात्रा ने बताया कि सोमवार को दिन में पापा ने मम्मी को बुरा भला कहा जिसपर उसका विवाद हो गया था। पापा उसके नाना-नानी को भी पसंद नहीं करते थे। उन्हें बिना वजह गालियां बक रहे थे। विरोध करने पर उसे बुरी तरह से डांट दिया था। शाम को मच्छरदानी के बहाने से पहले मम्मी को गालियां बकनी शुरू कर दीं। कहने लगे कि तेरी मच्छरदानी फटी है। तेरी मम्मी को तो इसे सिलने की फुरसत नहीं है। मेरी मच्छरदानी में आकर लेट जा। मच्छर ज्यादा थे, इसलिए पापा के बिस्तर पर जाकर लेट गई थी। मुझे नहीं पता था कि पापा की नीयत में खोट है। पहले तो मैंने यही सोचा कि उनका हाथ करवट लेते वक्त धोखे से उसके ऊपर आ गया होगा लेकिन हाथ हटाने के बाद हरकते बढ़ती देखकर सब समझ में आ गया।
मां बोली: क्या पता था ये हो जाएगा
प्रवक्ता की पत्नी का कहना है कि बेटी ने कई बार पापा के घूरने की शिकायत की थी, लेकिन उसने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। इसलिए मैं डांटकर चुप कर देती थी। बेटी की शिकायत को वह गंभीरता से ले लेतीं तो शायद उसे यह दिन नहीं देखना पड़ता।
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मैं न मारती तो पापा मार डालते
छात्रा ने बताया कि जिस स्टील की रॉड से उन पर हमला करके उसने रेप का विरोध किया, वह पापा के हाथ लग जाती तो उसे ही मार डालते। इसलिए उसने अपनी जान बचाने के लिए दोबारा से पापा पर हमला करना पड़ा और मार ही डाला। मैंने जब विरोध शुरू किया तो वह नाराज होने लगे और मुझे भी गालियां देते हुए हमला करने दौड़े। संयोग से मेरे हाथ रॉड लग गई थी।
उत्तराखंड से तबादला होकर आए थे
मूलरूप से शाहजहांपुर के बंडा इलाके के रहने वाले प्रवक्ता की नियुक्ति खटीमा(उत्तराखंड) के राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के तौर पर हुई थी। पांच साल पहले विकल्प मिलने पर प्रवक्ता ने बरेली तबादला करा लिया था। 1999 में उनकी पंत नंगर यूनिवर्सिटी के रिटायर कर्मचारी की बेटी से प्रवक्ता की शादी हुई। इसके बाद उनको बेटी पैदा हुई। दूसरे नंबर पर भी बेटी ही हुई। सबसे छोटा चार साल का बेटा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्रवक्ता बेटियों से चिढ़ते थे।
कुछ दिनों से चुप रहने लगी थी
प्रवक्ता की बेटी होनहार है। कक्षा छह में उसने शहर के प्रतिष्ठित स्कूल में दाखिला लिया था। उसकी क्लास की छात्राएं बताती हैं कि वह हंसमुख है। उसके मन में ऐसा कुछ चल रहा है यह पता नहीं चलता था। उसकी मां ने बताया कि पिछले कुछ दिन से वह चुप सी रहने लगी थी। हमने सोचा कि पढ़ाई का लोड है।
ससुराल वालों से अच्छे रिश्ते नहीं थे
प्रवक्ता के ससुराल वालों से अच्छे रिश्ते नहीं थे। इसलिए उनका बरेली में उनके पास आना-जाना नहीं था। पत्नी मायके जाने की जिद करती थीं तो उनसे विवाद हो जाता था। बच्चे भी रोज-रोज के झगड़े से परेशान थे। बच्चे अपने नानी और नाना से बात भी प्रवक्ता की अनुपस्थिति में करते थे। सामने किसी से बात करने की इजाजत नहीं थी।
हमले के बाद पापा को बचाने के लिए भटकी
पापा पर हमला करके लहूलुहान करने के बाद बेटी उसकी जान बचाने के लिए भी भटकती रही। उसने मम्मी और नाना के कहने पर घर के बाहर जाकर शोर मचाकर भी पड़ोसियों को बुलाने की कोशिश की। कई घरों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। पड़ोस में ही एक नर्स रहती हैं उनको बुलाने भी गई कि पापा को दिखा सके लेकिन वह घर से बाहर नहीं आईं। जब कोई मदद नहीं मिली तो वह घर पर ही मां और नाना का इंतजार करने लगी। जब पुलिस पहुंची तो उसे पता चला कि पापा की मौत हो चुकी है।
घर में बाहर तक बह गया खून
प्रवक्ता की हत्या के बाद घर में खून ही खून था लेकिन सुबह होने तक भी कालोनी के चंद लोग ही वहां थे। पुलिस की गाड़ियां सुबह सवेरे ही मौके पर पहुंचने के बाद भी मोहल्ले के चंद लोग ही मौके पर पहुंचे। पुलिस के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाने के बाद घर की धुलाई कराई गई।
पत्नी ने पुलिस को दी तहरीर
प्रवक्ता की पत्नी ने प्रभारी निरीक्षक को दी तहरीर में बताया कि सोमवार की रात करीब तीन बजे उनकी बेटी ने फोन करके बताया कि पापा ने मेरे साथ सोते समय छेड़खानी की। इसका मैंने विरोध किया और घर में रखे हुए लोहे की रॉड से अपने बचाव के लिए सिर पर हमला कर दिया। जिससे उनका सिर फट गया। जल्द आ जाओ। सूचना पर वह अपने पिता, बहन और ममेरे भाई के साथ मौके पर पहुंच गए। मेरे आयी घर में पति मृत अवस्था में जमीन पर पड़े थे। पुलिस ने इसी तहरीर पर प्रवक्ता की बेटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
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छात्रा ने बताया कि सोमवार को दिन में पापा ने मम्मी को बुरा भला कहा जिसपर उसका विवाद हो गया था। पापा उसके नाना-नानी को भी पसंद नहीं करते थे। उन्हें बिना वजह गालियां बक रहे थे। विरोध करने पर उसे बुरी तरह से डांट दिया था। शाम को मच्छरदानी के बहाने से पहले मम्मी को गालियां बकनी शुरू कर दीं। कहने लगे कि तेरी मच्छरदानी फटी है। तेरी मम्मी को तो इसे सिलने की फुरसत नहीं है। मेरी मच्छरदानी में आकर लेट जा। मच्छर ज्यादा थे, इसलिए पापा के बिस्तर पर जाकर लेट गई थी। मुझे नहीं पता था कि पापा की नीयत में खोट है। पहले तो मैंने यही सोचा कि उनका हाथ करवट लेते वक्त धोखे से उसके ऊपर आ गया होगा लेकिन हाथ हटाने के बाद हरकते बढ़ती देखकर सब समझ में आ गया।
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मां बोली: क्या पता था ये हो जाएगा
प्रवक्ता की पत्नी का कहना है कि बेटी ने कई बार पापा के घूरने की शिकायत की थी, लेकिन उसने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। इसलिए मैं डांटकर चुप कर देती थी। बेटी की शिकायत को वह गंभीरता से ले लेतीं तो शायद उसे यह दिन नहीं देखना पड़ता।
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मैं न मारती तो पापा मार डालते
छात्रा ने बताया कि जिस स्टील की रॉड से उन पर हमला करके उसने रेप का विरोध किया, वह पापा के हाथ लग जाती तो उसे ही मार डालते। इसलिए उसने अपनी जान बचाने के लिए दोबारा से पापा पर हमला करना पड़ा और मार ही डाला। मैंने जब विरोध शुरू किया तो वह नाराज होने लगे और मुझे भी गालियां देते हुए हमला करने दौड़े। संयोग से मेरे हाथ रॉड लग गई थी।
उत्तराखंड से तबादला होकर आए थे
मूलरूप से शाहजहांपुर के बंडा इलाके के रहने वाले प्रवक्ता की नियुक्ति खटीमा(उत्तराखंड) के राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के तौर पर हुई थी। पांच साल पहले विकल्प मिलने पर प्रवक्ता ने बरेली तबादला करा लिया था। 1999 में उनकी पंत नंगर यूनिवर्सिटी के रिटायर कर्मचारी की बेटी से प्रवक्ता की शादी हुई। इसके बाद उनको बेटी पैदा हुई। दूसरे नंबर पर भी बेटी ही हुई। सबसे छोटा चार साल का बेटा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्रवक्ता बेटियों से चिढ़ते थे।
कुछ दिनों से चुप रहने लगी थी
प्रवक्ता की बेटी होनहार है। कक्षा छह में उसने शहर के प्रतिष्ठित स्कूल में दाखिला लिया था। उसकी क्लास की छात्राएं बताती हैं कि वह हंसमुख है। उसके मन में ऐसा कुछ चल रहा है यह पता नहीं चलता था। उसकी मां ने बताया कि पिछले कुछ दिन से वह चुप सी रहने लगी थी। हमने सोचा कि पढ़ाई का लोड है।
ससुराल वालों से अच्छे रिश्ते नहीं थे
प्रवक्ता के ससुराल वालों से अच्छे रिश्ते नहीं थे। इसलिए उनका बरेली में उनके पास आना-जाना नहीं था। पत्नी मायके जाने की जिद करती थीं तो उनसे विवाद हो जाता था। बच्चे भी रोज-रोज के झगड़े से परेशान थे। बच्चे अपने नानी और नाना से बात भी प्रवक्ता की अनुपस्थिति में करते थे। सामने किसी से बात करने की इजाजत नहीं थी।
हमले के बाद पापा को बचाने के लिए भटकी
पापा पर हमला करके लहूलुहान करने के बाद बेटी उसकी जान बचाने के लिए भी भटकती रही। उसने मम्मी और नाना के कहने पर घर के बाहर जाकर शोर मचाकर भी पड़ोसियों को बुलाने की कोशिश की। कई घरों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। पड़ोस में ही एक नर्स रहती हैं उनको बुलाने भी गई कि पापा को दिखा सके लेकिन वह घर से बाहर नहीं आईं। जब कोई मदद नहीं मिली तो वह घर पर ही मां और नाना का इंतजार करने लगी। जब पुलिस पहुंची तो उसे पता चला कि पापा की मौत हो चुकी है।
घर में बाहर तक बह गया खून
प्रवक्ता की हत्या के बाद घर में खून ही खून था लेकिन सुबह होने तक भी कालोनी के चंद लोग ही वहां थे। पुलिस की गाड़ियां सुबह सवेरे ही मौके पर पहुंचने के बाद भी मोहल्ले के चंद लोग ही मौके पर पहुंचे। पुलिस के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भिजवाने के बाद घर की धुलाई कराई गई।
पत्नी ने पुलिस को दी तहरीर
प्रवक्ता की पत्नी ने प्रभारी निरीक्षक को दी तहरीर में बताया कि सोमवार की रात करीब तीन बजे उनकी बेटी ने फोन करके बताया कि पापा ने मेरे साथ सोते समय छेड़खानी की। इसका मैंने विरोध किया और घर में रखे हुए लोहे की रॉड से अपने बचाव के लिए सिर पर हमला कर दिया। जिससे उनका सिर फट गया। जल्द आ जाओ। सूचना पर वह अपने पिता, बहन और ममेरे भाई के साथ मौके पर पहुंच गए। मेरे आयी घर में पति मृत अवस्था में जमीन पर पड़े थे। पुलिस ने इसी तहरीर पर प्रवक्ता की बेटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।