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बहन के हत्यारे भाई को उम्रकैद

Sat, 13 May 2017 01:13 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Sat, 13 May 2017 01:13 AM IST
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Sister's killer brother gets life imprisonment
Demo Pic - फोटो : google
बेटी की हत्या के बाद एक मां ने बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। दो साल तक न्यायालय में लड़ाई चली, हालांकि परिवार के सारे लोगों ने बयान बदल दिए, मां ने भी बेटा खोने के डर से बचाने की कोशिश की लेकिन अन्य सबूतों और पड़ोसी के बयान के आधार पर बेटे को उम्रकैद हो गई। जब सजा सुनाई जा रही थी तो मां कोर्ट में मौजूद थी। सजा सुनते ही फफक कर रो पड़ी।
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थाना सीबीगंज के महेशपुरा में मकदूमी मस्जिद के पास रहने वाली भूरी देवी के मुताबिक पहली जनवरी 2015 की शाम सात बजे उनकी बेटी सरबीन (16) का भाई इश्त्याक से झगड़ा हुआ था। गुस्से में इश्त्याक ने गड़ासे से अपनी बहन सरबीन की गर्दन पर वार कर दिया था। इलाज के लिए अस्पताल ले जाते हुए सरबीन की मौत हो गई थी। वारदात के चश्मदीद गवाह मृतका का बड़ा भाई इशहाक और भाभी रुखसाना बने थे। दो जनवरी को भूरी देवी ने सीबीगंज थाने में बेटे इश्त्याक के खिलाफ बेटी की हत्या का मुकदमा दर्ज करवाया था। 
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एडीजीसी फौजदारी राजेंद्र गंगवार ने बताया कि अभियुक्त की मां भूरी देवी, भाई इशहाक, भाभी रुखसाना व अन्य ने अभियोजन की कहानी के पक्ष में बयान नहीं दिये थे। इसलिए उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। पड़ोसी शमीम अंसारी ने घटना को पुष्ट करते हुए गवाही दी थी। कुल नौ गवाह पेश किए गए थे। अपर सत्र न्यायाधीश प्रीति श्रीवास्तव ने इश्त्याक को बहन सरबीन की हत्या का दोषी पाते हुए उसको आजीवन कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुना दी। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह की सजा और भुगतनी होगी। इश्त्याक जेल में निरुद्ध है। 
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ऑनर किलिंग में हुई थी सरबीन की हत्या 
दो मंजिला घर में इश्त्याक ऊपर की मंजिल में रहता था। नीचे कमरे में सरबीन रहती थी। सरबीन का गांव के मुश्ताक से प्रेेम संबंध थे। वारदात की रात मुश्ताक उसके घर में घुस गया था। परिवार के लोग दावत में शामिल होने के लिए गए थे। ऊपर से इश्त्याक ने दोनों को बात करते हुए देख लिया था। नये साल की मुबारकबाद देते हुए मुश्ताक ने सरबीन को गले लगाया था तो इश्त्याक की आंखों में खून उतर आया था। इश्त्याक को आता देखकर मुश्ताक भाग गया। इश्त्याक ने पहले सरबीन की पिटाई की थी। अचानक उसने गड़ासा से गर्दन पर वार कर दिया था। बहन को मौत के  घाट उतारने के बाद भाई शव को लेकर देर रात तक भटकता रहा था। बाद में पुलिस ने उसे पकड़ लिया था। 


चाह कर भी नहीं बचा सके 
मां ने बेटी की हत्या के बाद बेटे के खिलाफ मुकदमा लिखवा दिया था। लेकिन बाद में बेटे को बचाने की कई जतन किये। वह गवाही से पलट गई थीं। उन्होंने चाहा की बेटा बच जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कोर्ट ने पड़ोसियों की गवाही पर सजा की घोषणा कर दी। 
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