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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Sentenced to 15 years in prison

15 साल से फरार कैदी खुद पहुंचा जेल, बोला मुझे पकड़ लो  

Tue, 18 Apr 2017 01:28 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Tue, 18 Apr 2017 01:28 AM IST
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योगी सरकार ने पैरोल पर सालों से कारागार से छूटे हुए कैदियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का कारागार प्रशासन को निर्देश दिया था। बरेली केंद्रीय कारागार की सख्ती के बाद सोमवार को 15 साल से फरार चल रहे कैदी वीरपाल ने समर्पण किया। पहचान तस्दीक होने के बाद केंद्रीय कारागार प्रशासन ने वीरपाल को बैरक पहुंचा दिया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि बदायूं और सहारनपुर के दो कैदियों की तलाश चल रही है। दोनों जिलों के डीएम और एसएसपी को पत्र लिखे गए हैं। 
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कारागार प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार दिसंबर 1997 को शाहजहांपुर कारागार में वीरपाल पुत्र बहादुर निवासी चिकोरा थाना निगोही जनपद शाहजहांपुर दाखिल हुआ था। वीरपाल के खिलाफ अपहरण के बाद हत्या के केस में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वह दो महीने की पैरोल अवधि के लिए आवेदन किया था। शासनादेश मार्च 2002 के आदेशानुसार जून 2002 को वीरपाल को कारागार से रिहा किया गया था। इसके बाद कारागार प्रशासन ने शाहजहांपुर के एसएसपी और डीएम को कई पत्र लिखे, लेकिन उसका पता नहीं चल सका था। वह पंद्रह साल के बाद सोमवार को खुद कारागार पहुंच गया।  
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एक बंदी तो 39 साल से फरार
वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक चंद्रपाल यादव पुत्र चेतराम निवासी इचली जनपद सहारनपुर को भी तलाशा जा रहा है। उसका वर्तमान पता उसेड़ा थाना गुलाबरी जनपद बुलंद शहर है। उसको कमांडिंग अधिकारी 8 माउंटेन डिवीजन सिंगल रेजीमेंट ने अक्टूबर 1974 को आर्मी एक्ट के तहत हत्या के अपराध में मौत की सजा दी थी। चंद्रपाल ने भारत सरकार के डिप्टी सक्रेटरी से सजा कम करने की गुहार लगाई थी। इसके बाद सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। यह बंदी केंद्रीय कारावास इम्फाल मनीपुर से ट्रांसफर होकर जून 1976 में बरेली सेंट्रल जेल आया था। अक्टूबर 1978 में पैरोल पर बाहर आया था। उसके बाद से गायब है। इसी तरह कामेश्वर पुत्र श्यामसरन निवासी परियाली सराय जनपद बदायूं को सत्र न्यायालय ने अक्टूबर 1977 को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा दी थी। इस निर्णय को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। नवंबर 1985 में बंदी की सजा बहाल रखी गई थी। इसके बाद कैदी फतेहगढ़ की केंद्रीय कारागार से ट्रांसफर होकर फरवरी 1987 में बरेली सेंट्रल जेल आया था। मई 1990 को पैरोल पर छूटा था। 
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