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तीन साल की मासूम को उठाकर बोले- बता कहां हैं चाबियां
बरेली
Updated Mon, 18 Sep 2017 01:44 AM IST
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कच्छा-बनियानधारी बदमाश खूनखराबा करने का इरादा लेकर प्रधानाध्यापक सुभाष चंद्र के घर में घुसे थे। शिक्षक दंपति के कमरे में घुसते ही उन्होंने दोनों ताबड़तोड़ डंडे बरसाने शुरू कर दिया। सुभाष तो बेहोश हो गए, बदमाशों ने उनकी पत्नी शालिनी से घर की चाबियां मांगीं। शालिनी थोड़ी हिचकिचाईं तो उन्होंने उनकी तीन साल की मासूम बेटी को कब्जे में ले लिया। कहा- चाबियां देती है या मार दिया जाए तेरी बेटी को। शालिनी ने चाबियां निकालकर बदमाशों के हाथ में रखीं तब उन्होंने उनकी बेटी को छोड़ा। शालिनी उसे अपने कलेजे से चिपकाकर बदमाशों से कहा जो लूटकर ले जाना है ले जाए लेकिन हमें जिंदा छोड़ दो।
हालांकि इसके बाद भी एक बदमाश लोहे की राड लेकर मां और बेटी के पास खड़ा रहा जबकि अन्य बदमाश अलमारियों के ताले खोलकर तिजोरी में रखी नगदी और जेवर लूटने में जुट गए। सारा सामान घर की एक चादर में बांधकर बदमाशों ने शालिनी को धमकी दी कि उनका एक साथी बाहर मौजूद रहेगा, अगर वह चिल्लाई तो वापस आकर वे उन्हें मार देंगे। बदमाशों ने भागने से पहले कमरे को बाहर से बंद करना चाहा। दरवाजे की कुंडी जल्दबाजी में ठीक से लग नहीं सकी। शालिनी ने देखा कि बदमाश दोबारा सीढ़ियों से छत पर चढ़े और फिर बाहर उतरकर भाग निकले।
सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंचे थे बदमाश
राधा रानी एन्क्लेव में सुभाष के मकान के आसपास बसाहट नहीं है। मकान में तीन तरफ से 20 फीट ऊंची दीवार बनी है। सामने की तरफ चैनल लगा था, दीवार भी ऐसी थी कि बदमाश इस रास्ते से आसानी से चढ़ सकते थे। हालांकि पुलिस के मुताबिक बदमाश दीवार पर सीढ़ी लगाकर ऊपर चढ़े थे। मजदूरों ने पुलिस को बताया कि निर्माण की साइट पर रात में छोड़ी गई सीढ़ी सुबह अपनी जगह से काफी दूर पड़ी थी।
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एक बदमाश नकाब में था और तीन बेनकाब, एक को पहचान लेंगी शालिनी
छत पर सीढ़ी के दरवाजे में कुंडी और ताला लगा था। माना जा रहा है कि कुंडे को सब्बल से उखाड़कर बदमाश नीचे उतर आए होंगे। बदमाशों को नीचे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। नीचे दो कमरों के दरवाजे खुले हुए थे। बदमाशों ने सुभाष के सिर पर वार करके मरणासन्न कर दिया जबकि शालिनी चेहरे पर गंभीर चोट आने के बाद वह होश में रही। शालिनी के मुताबिक बदमाशों ने बनियान और कच्छा पहना हुआ था। एक बदमाश का चेहरा अंगोछा से ढका हुआ था, जबकि तीन बदमाशों के चेहरे खुले हुए थे। एक बदमाश अंधेरे में था, जिसको शालिनी देख नहीं सकी। शालिनी ने दावा किया कि बदमाशों को पहले कभी नहीं देखा, लेकिन एक बदमाश को वह पहचान सकती हैं।
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आईजी ने 72 घंटे में खुलासे का दिया अल्टीमेटम
क्राइम ब्रांच समेत चार टीमें लगाई गईं
ब्यूरो
बरेली। सनसनीखेज वारदात के बाद आईजी एसके भगत खुद मौका-ए-वारदात पर पहुंचे। एसएसपी जोगेंद्र कुमार और एसपी देहात ख्याति गर्ग को 72 घंटों में खुलासे का निर्देश दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को सांत्वना भी दी। बदमाशों को पकड़ने के लिए एसपी क्राइम रमेश भारतीय की अगुवाई में क्राइम ब्रांच को लगा दिया गया है। नवाबगंज थाना की दो टीम एसपी देहात की अगुवाई में काम करेंगी। सभी टीमों को अलग-अलग टास्क सौंप दिया गया है। सर्विलांस की टीम को रात एक बजे से लेकर सुबह चार बजे तक मोबाइल टॉवर की रेंज में आए अंजान नंबरों को ट्रेस करने के लिए लगा दिया गया है।
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कच्छा-बनियान गिरोह की तलाश में डेरों पर छानबीन
रेलवे स्टेशन और गांव के बाहर स्थित डेरों से संदिग्ध उठाए
सटीक रेकी की थी बदमाशों ने, 10.30 बजे दिखे थे दो युवक
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बदमाशों ने वारदात से पहले सटीक रेकी की थी। नवाबगंज चौकी से सिर्फ 400 मीटर की दूरी पर वारदात करने वाले बदमाशों को घर के बारे में अधिकतर बातें पता थी। शालिनी ने पुलिस को दो दिन पहले भी सीढ़ी लगाकर लोगों की चढ़ने की कोशिश के बारे में बताया है। निर्माण का काम करने वाले मजदूर रिछोला के रहने वाले है। वारदात की रात 8.30 बजे टीईटी की तैयारी कर रही एक छात्रा पढ़ने के बाद अपने पिता के साथ गई थी। रात एक बजे दंपति सोया था। उस रात 10.30 बजे बाइक पर दो युवकों की मौजूदगी की बात पुलिस को पता चली।
कच्छा बनियान पहनकर आए बदमाशों ने रास्ते में यूक्लिप्टिस के पेड़ से डंडे तोड़े थे। इन्हीं डंडों से सुभाष के सिर व चेहरे पर वार किए गए। तकिये पर खून के साथ बिस्तर पर डाल की छाल मौजूद थी। पुलिस को घर के आंगन में एक लोहे की डेढ़ फुट लंबी सब्बल भी मिली जिसे जब्त किया गया है। माना जा रहा है कि इसी सब्बल से तिजोरियों को तोड़ा गया। घुमंतू गिरोह की तर्ज पर बदमाशों ने रास्ते से ही पेड़ की डाल तोड़कर हथियार बनाए थे। वहीं लूटपाट के दौरान बदमाशों ने फ्रिज खोलकर पानी पिया और कुछ खाया भी था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सुभाष के सिर पर पांच से छह वार किए गए, हेड इंजरी की वजह से उनकी मौत हुई।
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अपने मकान का सपना नहीं हो सका पूरा
नवाबगंज। डेढ़ दशक पहले पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारियां सुभाष ने अपने सिर ले ली थीं। छोटे भाई और बहन को शिक्षा दिलाई। मूल रूप से बरेली के लाल फाटक इलाके के निवासी शिक्षक सुभाष के पिता त्रिलोक चंद्र की नहर विभाग में अमीन थे। 30 साल पहले सब नवाबगंज में बस गए। किराये के मकान में रहते हुए सुभाष का सपना था कि वह खुद के मकान में रहें। सुभाष की मां सियादुलारी अपने बेटे अमर सूर्यवंशी और अंशुमाली, बेटी गीतांजलि के साथ जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक रहे सुरेश पाल के मकान में किराये पर रहते हैं। दो बेटियों राधा और अंजलि की शादी वह कर चुकी है। पिता की मृत्यु के बाद सुभाष पढ़ाई के साथ ही ट्यूशन पढ़ाई। एक निजी स्कूल में पढ़ाते हुए बीटीसी का प्रशिक्षण भी पूरा किया। वर्ष 2009 में सरकारी नौकरी मिली। 2012 में उन्होंने दिव्यांग शालिनी से शादी की और उन्हें भी बीटीसी करवाई। 2015 में शालिनी को भी शिक्षिका पद पर नौकरी मिल गई।
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दिव्यांग पत्नी को गोद में लेकर लिए थे फेरे
सुभाष और शालिनी का विवाह भी गांव में चर्चा में रहा था। सुभाष ने शालिनी को गोद में लेकर फेरे पूरे किए थे। शादी के बाद पत्नी को स्कूल ले जाने और वापस लाने का काम भी सुभाष करते थे। किसी कार्यक्रम में वह पत्नी को गोद में लेकर ही शरीक होते थे। शालिनी का एक भाई वारदात से एक दिन पहले जर्मनी गया जबकि दूसरा भाई सीए है।
क्रिकेट और बैडमिंटन के खिलाड़ी भी थे सुभाष
सुभाष के भाई अमर एक निजी विद्यालय में शिक्षक हैं। छोटी बहन अंशुमाली बीटेक कर रही है, जबकि सबसे छोटी बहन गीताजंलि एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षिका है। सुभाष बैडमिंटन और क्रिकेट का खिलाड़ी भी था। उनकी कप्तानी में नवाबगंज की टीम ने चैंपियनशिप भी जीती थी।
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हालांकि इसके बाद भी एक बदमाश लोहे की राड लेकर मां और बेटी के पास खड़ा रहा जबकि अन्य बदमाश अलमारियों के ताले खोलकर तिजोरी में रखी नगदी और जेवर लूटने में जुट गए। सारा सामान घर की एक चादर में बांधकर बदमाशों ने शालिनी को धमकी दी कि उनका एक साथी बाहर मौजूद रहेगा, अगर वह चिल्लाई तो वापस आकर वे उन्हें मार देंगे। बदमाशों ने भागने से पहले कमरे को बाहर से बंद करना चाहा। दरवाजे की कुंडी जल्दबाजी में ठीक से लग नहीं सकी। शालिनी ने देखा कि बदमाश दोबारा सीढ़ियों से छत पर चढ़े और फिर बाहर उतरकर भाग निकले।
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सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंचे थे बदमाश
राधा रानी एन्क्लेव में सुभाष के मकान के आसपास बसाहट नहीं है। मकान में तीन तरफ से 20 फीट ऊंची दीवार बनी है। सामने की तरफ चैनल लगा था, दीवार भी ऐसी थी कि बदमाश इस रास्ते से आसानी से चढ़ सकते थे। हालांकि पुलिस के मुताबिक बदमाश दीवार पर सीढ़ी लगाकर ऊपर चढ़े थे। मजदूरों ने पुलिस को बताया कि निर्माण की साइट पर रात में छोड़ी गई सीढ़ी सुबह अपनी जगह से काफी दूर पड़ी थी।
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एक बदमाश नकाब में था और तीन बेनकाब, एक को पहचान लेंगी शालिनी
छत पर सीढ़ी के दरवाजे में कुंडी और ताला लगा था। माना जा रहा है कि कुंडे को सब्बल से उखाड़कर बदमाश नीचे उतर आए होंगे। बदमाशों को नीचे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। नीचे दो कमरों के दरवाजे खुले हुए थे। बदमाशों ने सुभाष के सिर पर वार करके मरणासन्न कर दिया जबकि शालिनी चेहरे पर गंभीर चोट आने के बाद वह होश में रही। शालिनी के मुताबिक बदमाशों ने बनियान और कच्छा पहना हुआ था। एक बदमाश का चेहरा अंगोछा से ढका हुआ था, जबकि तीन बदमाशों के चेहरे खुले हुए थे। एक बदमाश अंधेरे में था, जिसको शालिनी देख नहीं सकी। शालिनी ने दावा किया कि बदमाशों को पहले कभी नहीं देखा, लेकिन एक बदमाश को वह पहचान सकती हैं।
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आईजी ने 72 घंटे में खुलासे का दिया अल्टीमेटम
क्राइम ब्रांच समेत चार टीमें लगाई गईं
ब्यूरो
बरेली। सनसनीखेज वारदात के बाद आईजी एसके भगत खुद मौका-ए-वारदात पर पहुंचे। एसएसपी जोगेंद्र कुमार और एसपी देहात ख्याति गर्ग को 72 घंटों में खुलासे का निर्देश दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को सांत्वना भी दी। बदमाशों को पकड़ने के लिए एसपी क्राइम रमेश भारतीय की अगुवाई में क्राइम ब्रांच को लगा दिया गया है। नवाबगंज थाना की दो टीम एसपी देहात की अगुवाई में काम करेंगी। सभी टीमों को अलग-अलग टास्क सौंप दिया गया है। सर्विलांस की टीम को रात एक बजे से लेकर सुबह चार बजे तक मोबाइल टॉवर की रेंज में आए अंजान नंबरों को ट्रेस करने के लिए लगा दिया गया है।
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कच्छा-बनियान गिरोह की तलाश में डेरों पर छानबीन
रेलवे स्टेशन और गांव के बाहर स्थित डेरों से संदिग्ध उठाए
सटीक रेकी की थी बदमाशों ने, 10.30 बजे दिखे थे दो युवक
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बदमाशों ने वारदात से पहले सटीक रेकी की थी। नवाबगंज चौकी से सिर्फ 400 मीटर की दूरी पर वारदात करने वाले बदमाशों को घर के बारे में अधिकतर बातें पता थी। शालिनी ने पुलिस को दो दिन पहले भी सीढ़ी लगाकर लोगों की चढ़ने की कोशिश के बारे में बताया है। निर्माण का काम करने वाले मजदूर रिछोला के रहने वाले है। वारदात की रात 8.30 बजे टीईटी की तैयारी कर रही एक छात्रा पढ़ने के बाद अपने पिता के साथ गई थी। रात एक बजे दंपति सोया था। उस रात 10.30 बजे बाइक पर दो युवकों की मौजूदगी की बात पुलिस को पता चली।
कच्छा बनियान पहनकर आए बदमाशों ने रास्ते में यूक्लिप्टिस के पेड़ से डंडे तोड़े थे। इन्हीं डंडों से सुभाष के सिर व चेहरे पर वार किए गए। तकिये पर खून के साथ बिस्तर पर डाल की छाल मौजूद थी। पुलिस को घर के आंगन में एक लोहे की डेढ़ फुट लंबी सब्बल भी मिली जिसे जब्त किया गया है। माना जा रहा है कि इसी सब्बल से तिजोरियों को तोड़ा गया। घुमंतू गिरोह की तर्ज पर बदमाशों ने रास्ते से ही पेड़ की डाल तोड़कर हथियार बनाए थे। वहीं लूटपाट के दौरान बदमाशों ने फ्रिज खोलकर पानी पिया और कुछ खाया भी था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सुभाष के सिर पर पांच से छह वार किए गए, हेड इंजरी की वजह से उनकी मौत हुई।
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अपने मकान का सपना नहीं हो सका पूरा
नवाबगंज। डेढ़ दशक पहले पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारियां सुभाष ने अपने सिर ले ली थीं। छोटे भाई और बहन को शिक्षा दिलाई। मूल रूप से बरेली के लाल फाटक इलाके के निवासी शिक्षक सुभाष के पिता त्रिलोक चंद्र की नहर विभाग में अमीन थे। 30 साल पहले सब नवाबगंज में बस गए। किराये के मकान में रहते हुए सुभाष का सपना था कि वह खुद के मकान में रहें। सुभाष की मां सियादुलारी अपने बेटे अमर सूर्यवंशी और अंशुमाली, बेटी गीतांजलि के साथ जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक रहे सुरेश पाल के मकान में किराये पर रहते हैं। दो बेटियों राधा और अंजलि की शादी वह कर चुकी है। पिता की मृत्यु के बाद सुभाष पढ़ाई के साथ ही ट्यूशन पढ़ाई। एक निजी स्कूल में पढ़ाते हुए बीटीसी का प्रशिक्षण भी पूरा किया। वर्ष 2009 में सरकारी नौकरी मिली। 2012 में उन्होंने दिव्यांग शालिनी से शादी की और उन्हें भी बीटीसी करवाई। 2015 में शालिनी को भी शिक्षिका पद पर नौकरी मिल गई।
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दिव्यांग पत्नी को गोद में लेकर लिए थे फेरे
सुभाष और शालिनी का विवाह भी गांव में चर्चा में रहा था। सुभाष ने शालिनी को गोद में लेकर फेरे पूरे किए थे। शादी के बाद पत्नी को स्कूल ले जाने और वापस लाने का काम भी सुभाष करते थे। किसी कार्यक्रम में वह पत्नी को गोद में लेकर ही शरीक होते थे। शालिनी का एक भाई वारदात से एक दिन पहले जर्मनी गया जबकि दूसरा भाई सीए है।
क्रिकेट और बैडमिंटन के खिलाड़ी भी थे सुभाष
सुभाष के भाई अमर एक निजी विद्यालय में शिक्षक हैं। छोटी बहन अंशुमाली बीटेक कर रही है, जबकि सबसे छोटी बहन गीताजंलि एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षिका है। सुभाष बैडमिंटन और क्रिकेट का खिलाड़ी भी था। उनकी कप्तानी में नवाबगंज की टीम ने चैंपियनशिप भी जीती थी।