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पुलिस कस्टडी से भागी युवती से रेप की कोशिश
बरेली।
Updated Mon, 08 May 2017 01:16 AM IST
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पुलिस कस्टडी से भागी युवती से रेप की कोशिश
- फोटो : पुलिस कस्टडी से भागी युवती से रेप की कोशिश
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महिला थानेेेे से भागी झारखंड की युवती को रेलवे स्टेशन से उठा ले जाने के बाद युवकों ने रेप की कोशिश की। उसके कपड़े भी फाड़ डाले, लेकिन पुलिस ने बिना कार्रवाई मामला निपटा दिया। युवती बोल नहीं पाती है, लेकिन सुन लेती है। उसने लिखकर अपना नाम पता और परिवार के लोगों के फोन नंबर बताए। कैंट पुलिस की पहल पर समाजसेवी ने युवती को भरतपुर के अपना घर आश्रम भिजवा दिया है।
घटना दो मई की रात की है। रानी लक्ष्मीबाई आशा ज्योति केंद्र की काउंसलर तनीशा दिवाकर के पास सुभाषनगर में एक युवती के भटकने की सूचना आई। पता लगा कि कुछ युवक उसे जबरन उठाकर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। दोपहर करीब पौने बारह बजे काउंसलर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंची और युवती को वह महिला थाने ले आई। इस दौरान मालूम हुआ कि युवती इससे पहले महिला थाने में दो बार आकर भाग चुकी है। काउंसलिंग के बाद तनीशा युवती को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल ले गईं। डॉक्टरों ने बिना मुकदमा युवती का आंतरिक मेडिकल करने से इनकार कर दिया। इस पर काउंसलर उसे वापस ले आईं।
युवती ने लिखकर दिया किउसे पुलिस कस्टडी में क्यों लिया गया है। वह अपने घर जाना चाहती है। ट्रेन आने वाली है, उसका बच्चा परेशान होगा। काउंसलर युवती से लिखित में लेकर उसे रेेलवे जंक्शन पर छोड़ आईं। इसके बाद आधी रात को युवती कैंट के चौबारी गांव के पास मिली। यहां उसके कपड़े फटे हुए थे। कुछ लोगों ने उसके साथ रेप की कोशिश की, लेकिन इसी बीच गश्त को निकली पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को थाने ले आई। कैंट पुलिस ने युवती को नए कपड़े दिलवाकर मनो समर्पण नामक सामाजिक संस्था के अध्यक्ष शैलेश कुमार शर्मा को बुला लिया। उन्होंने महिला सिपाही नीलम और मीना के साथ उसे भरतपुर (राजस्थान) के अपना घर आश्रम भेज दिया।
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माता-पिता और पति ने भी ठुकरा दिया
सीओ सिटी ने बताया युवती के मिलने के बाद उन्होंने उसी से नंबर पूछकर माता-पिता से बात की। माता-पिता का कहना था कि उनका युवती से कोई मतलब नहीं है। इसे जहां चाहो, भेज दो। इसके बाद युवती के पति से बात की तो उसने भी उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद युवती की सहेली ने भी उसे साथ रखने से मना कर दिया।
लड़की से बात की थी, वह बोल नहीं पाती है, लेकिन पढ़ी-लिखी है। लिखकर उसने सारी बात पुलिस को बताई, लेकिन लिखित में तहरीर नहीं दी। तहरीर मिलती तो मुकदमा लिखकर कार्रवाई की जा सकती थी। वह यहां से जाना चाहती थी, इसलिए लड़की को अपना घर आश्रम भेज दिया गया है। -कुलदीप सिंह, सीओ सिटी प्रथम
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घटना दो मई की रात की है। रानी लक्ष्मीबाई आशा ज्योति केंद्र की काउंसलर तनीशा दिवाकर के पास सुभाषनगर में एक युवती के भटकने की सूचना आई। पता लगा कि कुछ युवक उसे जबरन उठाकर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। दोपहर करीब पौने बारह बजे काउंसलर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंची और युवती को वह महिला थाने ले आई। इस दौरान मालूम हुआ कि युवती इससे पहले महिला थाने में दो बार आकर भाग चुकी है। काउंसलिंग के बाद तनीशा युवती को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल ले गईं। डॉक्टरों ने बिना मुकदमा युवती का आंतरिक मेडिकल करने से इनकार कर दिया। इस पर काउंसलर उसे वापस ले आईं।
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युवती ने लिखकर दिया किउसे पुलिस कस्टडी में क्यों लिया गया है। वह अपने घर जाना चाहती है। ट्रेन आने वाली है, उसका बच्चा परेशान होगा। काउंसलर युवती से लिखित में लेकर उसे रेेलवे जंक्शन पर छोड़ आईं। इसके बाद आधी रात को युवती कैंट के चौबारी गांव के पास मिली। यहां उसके कपड़े फटे हुए थे। कुछ लोगों ने उसके साथ रेप की कोशिश की, लेकिन इसी बीच गश्त को निकली पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को थाने ले आई। कैंट पुलिस ने युवती को नए कपड़े दिलवाकर मनो समर्पण नामक सामाजिक संस्था के अध्यक्ष शैलेश कुमार शर्मा को बुला लिया। उन्होंने महिला सिपाही नीलम और मीना के साथ उसे भरतपुर (राजस्थान) के अपना घर आश्रम भेज दिया।
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माता-पिता और पति ने भी ठुकरा दिया
सीओ सिटी ने बताया युवती के मिलने के बाद उन्होंने उसी से नंबर पूछकर माता-पिता से बात की। माता-पिता का कहना था कि उनका युवती से कोई मतलब नहीं है। इसे जहां चाहो, भेज दो। इसके बाद युवती के पति से बात की तो उसने भी उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद युवती की सहेली ने भी उसे साथ रखने से मना कर दिया।
लड़की से बात की थी, वह बोल नहीं पाती है, लेकिन पढ़ी-लिखी है। लिखकर उसने सारी बात पुलिस को बताई, लेकिन लिखित में तहरीर नहीं दी। तहरीर मिलती तो मुकदमा लिखकर कार्रवाई की जा सकती थी। वह यहां से जाना चाहती थी, इसलिए लड़की को अपना घर आश्रम भेज दिया गया है। -कुलदीप सिंह, सीओ सिटी प्रथम