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पड़ोस के चाचा ने किशोरी को मां बना दिया
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 05 Aug 2016 01:13 AM IST
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धोखेबाज पड़ोसी ने एक परिवार से अच्छे संबंध बनाकर उनके घर की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म कर डाला। जो लड़की उसे चाचा कहती थी उसके साथ दरिंदगी के बाद वह धमकाकर पिछले छह माह से उसका यौन शोषण कर रहा था। लड़की तो इस राज को दबाए रही। शारीरिक बदलाव आने पर घर वालों को शक हुआ तो सख्ती से पूछताछ की गई। इस पर उसने सारी बात बता दी। घर वाले उसे थाने ले गए। वहां रिपोर्ट दर्ज कर मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। किशोरी यहां पहुंची तो प्रसव हो गया। अब परिवार वाले नवजात को अपने साथ ले जाने से इंकार कर रहे हैं। बदायूं रोड इलाके के एक ग्रामीण ने पुलिस को बताया कि उसके तीन लड़के और दो बेटियां हैं। एक बेटी की शादी कुछ महीने पहले ही की है। छोटी बेटी अक्सर चूल्हे की मिट्टी खाती थी। इससे उसका पेट अक्सर बड़ा हो जाता था। बुधवार रात वह बड़ी बहन के साथ लेटी थी। शारीरिक बदलाव आने पर बहन ने पूछा तो वह गोलमोल जवाब देने लगी। थप्पड़ जड़ने पर उसने बताया कि छह महीने पहले वह जंगल में चारा लेने गई थी। वहां गांव के श्याम सिंह ने उसके साथ दुराचार किया। इसके बाद भी वह धमकी देकर लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। धमकी और बदनामी के कारण उसने यह बात किसी को नहीं बताई। बृहस्पतिवार को परिवार के लोग लड़की को लेकर थाने पहुंचे और श्याम सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद उसे मेडिकल के लिए महिला अस्पताल भेज दिया गया। जांच के दौरान ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और डॉक्टराें की मदद से नार्मल बेटी पैदा हुई।
कैसे संभाले इस नन्हीं का बोझ
छह महीने में ही पैदा हुई बच्ची ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही है। उसे मशीन में रखा गया है। डॉक्टर उसका बचना चमत्कार मान रहे हैं। न कोई जांच, न कोई टीका। अचानक से प्रसव पीड़ा हुई और बेटी पैदा हो गई। वजन भी एक किलो से कम है। किशोरी के दादी और पिता का कहना है कि वे नवजात बच्ची को अपने साथ नहीं ले जाएंगे। आगे लड़की की शादी करनी है, इसका बोझ उनसे नहीं संभलेगा। अगर कोई दान में लेना चाहे तो ले सकता है।
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कैसे संभाले इस नन्हीं का बोझ
छह महीने में ही पैदा हुई बच्ची ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही है। उसे मशीन में रखा गया है। डॉक्टर उसका बचना चमत्कार मान रहे हैं। न कोई जांच, न कोई टीका। अचानक से प्रसव पीड़ा हुई और बेटी पैदा हो गई। वजन भी एक किलो से कम है। किशोरी के दादी और पिता का कहना है कि वे नवजात बच्ची को अपने साथ नहीं ले जाएंगे। आगे लड़की की शादी करनी है, इसका बोझ उनसे नहीं संभलेगा। अगर कोई दान में लेना चाहे तो ले सकता है।
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