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जेलर और डिप्टी जेलर समेत चार निलंबित
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 27 May 2016 01:17 AM IST
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डीएम दफ्तर पर बंदी के घरवाले
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जिला जेल में हत्या के आरोपी की आत्महत्या के मामले में जेलर (प्रशासन) कमलेश मिश्र और डिप्टी जेलर संजय कुमार शाही समेत चार को लापरवाही के आरोप में एडीजी जेल डीएस चौहान ने निलंबित कर दिया है। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि अभी कुछ कर्मचारी और नप सकते हैं।
कस्बा शीशगढ़ के मोहल्ला बिलासपुर बस अड्डा के अखलास उर्फ गुड्डू ने बुधवार को जेल के शौचालय में आत्महत्या कर ली थी। एक मई को दूसरी पत्नी तरन्नुम की चाकुआें से गोदकर हत्या करने के आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। जेल में आने के पहले ही दिन से गुड्डू डिप्रेशन में था। इसलिए उसे डॉक्टर की निगरानी में जेल से अस्पताल में रखा गया था। आत्महत्या करने वाले दिन गुड्डू अंडरवियर और बनियान में अंगोछा बांधकर शौचालय जाने के लिए निकला था। उसने अपने ही अंगोछे से शौचालय में फंदा लगा लिया। बुधवार की दोपहर को गुड्डू के शौचालय में आत्महत्या करने की सूचना से कारागार विभाग के आला अफसरों में हड़कंप मच गया।
डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिक जांच करने के बाद रिपोर्ट एडीजी को भेज दी। एडीजी ने गुड्डू की आत्महत्या में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में जेलर (प्रशासन) कमलेश मिश्र और डिप्टी जेलर संजय कुमार शाही के अलावा प्रधान बंदी रक्षक रामौतार सिंह और बंदी रक्षक अनिल कुमार चौहान को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में हत्या के समय ड्यूटी पर तैनात बंदी रक्षक और हवलदारों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
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अवसाद में हत्यारा बना फिर जान ही दे बैठा
घर के हालात ने गुड्डू को चोर बना दिया। टायर चोरी के आरोप में कन्नौज जेल में रहने के बाद जब वह घर लौटा तो उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर लौटे कुछ दिन ही हुए थे कि दूसरी पत्नी से जिरह हो गई और आवेश में वह उसकी जान ही ले बैठा। बरेली जेल में जब पहुंचा तो बुरी तह अवसादग्रस्त था इसलिए उसे अस्पताल में रखा गया था। यही अवसाद उसकी खुदकुशी की वजह बना।
गुड्डू पहले ही टायर चोरी के आरोप में मामले मे कन्नौज जेल में बंद था। छूट कर आया तो घर में दो पत्नियां और छह बच्चों का बोझ उसे भारी पड़ने लगा था। जिसके कारण आये दिन कलह होता था। पत्नी की चाकू से गोदकर हत्या करने के बाद अखलास उर्फ गुड्डू डिप्रेशन में था। उसकी हालत देखकर जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया था। कई जेलों में शौचालयों में बंदी आत्महत्याएं कर चुके हैं। ऐसे में उस पर बंदी रक्षकों की निगाह होनी चाहिए थी।
जेल में स्टाफ का हाल
स्टाफ वर्तमान में होने चाहिए
बंदी रक्षक -52 122
प्रधान बंदी रक्षक 04 15
डिप्टी जेलर 02 06
जेलर 02 02
जेलर कमलेश मिश्रा के निलंबन के बाद एक ही रह गए हैं।
जेल में आठ आहते और 24 बैरक हैं। स्टाफ की कमी की वजह से हर बंदी पर नजर रखना मुश्किल है। एक सिपाही 700 बंदियों की सुरक्षा कैसे करता है, यह देखने की बात है। जेल की बुराईयां सभी को दिखाई देती हैं। स्टाफ की कमी पर किसी का ध्यान नहीं है- दधिराम मौर्य, जेल अधीक्षक
सीबीआई जांच की मांग
ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी के पदाधिकारी उस्मान रजा खान ने जेल अधीक्षक को ज्ञापन देकर कहा है कि जिला जेल में गुड्डू की मौत की सूचना भी परिवार के लोगों को नहीं दी गई। किसी अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें गुड्डू की मौत के बारे में बताया। उसी सूचना पर जेल आकर जानकारी की तो गुड्डू की मौत हो चुकी थी। उस्मान रजा का कहना है कि यह बहुत गंभीर मामला है। जेल प्रशासन की लापरवाही से गुड्डू की मौत हुई है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होने के जेल में होने वाले खेल का भी खुलासा हो जाएगा। ज्ञापन पर मौलाना अदनान रजा खां, शुएब रजा, हाफिज इमरान, मोहम्मद जुनैद, ताज खां, एजाज अहमद, इस्लाम खां, मौलाना सैफुल रजा, मोहम्मद हलीम और इस्लाम के हस्ताक्षर हैं।
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कस्बा शीशगढ़ के मोहल्ला बिलासपुर बस अड्डा के अखलास उर्फ गुड्डू ने बुधवार को जेल के शौचालय में आत्महत्या कर ली थी। एक मई को दूसरी पत्नी तरन्नुम की चाकुआें से गोदकर हत्या करने के आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। जेल में आने के पहले ही दिन से गुड्डू डिप्रेशन में था। इसलिए उसे डॉक्टर की निगरानी में जेल से अस्पताल में रखा गया था। आत्महत्या करने वाले दिन गुड्डू अंडरवियर और बनियान में अंगोछा बांधकर शौचालय जाने के लिए निकला था। उसने अपने ही अंगोछे से शौचालय में फंदा लगा लिया। बुधवार की दोपहर को गुड्डू के शौचालय में आत्महत्या करने की सूचना से कारागार विभाग के आला अफसरों में हड़कंप मच गया।
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डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिक जांच करने के बाद रिपोर्ट एडीजी को भेज दी। एडीजी ने गुड्डू की आत्महत्या में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में जेलर (प्रशासन) कमलेश मिश्र और डिप्टी जेलर संजय कुमार शाही के अलावा प्रधान बंदी रक्षक रामौतार सिंह और बंदी रक्षक अनिल कुमार चौहान को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में हत्या के समय ड्यूटी पर तैनात बंदी रक्षक और हवलदारों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
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अवसाद में हत्यारा बना फिर जान ही दे बैठा
घर के हालात ने गुड्डू को चोर बना दिया। टायर चोरी के आरोप में कन्नौज जेल में रहने के बाद जब वह घर लौटा तो उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर लौटे कुछ दिन ही हुए थे कि दूसरी पत्नी से जिरह हो गई और आवेश में वह उसकी जान ही ले बैठा। बरेली जेल में जब पहुंचा तो बुरी तह अवसादग्रस्त था इसलिए उसे अस्पताल में रखा गया था। यही अवसाद उसकी खुदकुशी की वजह बना।
गुड्डू पहले ही टायर चोरी के आरोप में मामले मे कन्नौज जेल में बंद था। छूट कर आया तो घर में दो पत्नियां और छह बच्चों का बोझ उसे भारी पड़ने लगा था। जिसके कारण आये दिन कलह होता था। पत्नी की चाकू से गोदकर हत्या करने के बाद अखलास उर्फ गुड्डू डिप्रेशन में था। उसकी हालत देखकर जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया था। कई जेलों में शौचालयों में बंदी आत्महत्याएं कर चुके हैं। ऐसे में उस पर बंदी रक्षकों की निगाह होनी चाहिए थी।
जेल में स्टाफ का हाल
स्टाफ वर्तमान में होने चाहिए
बंदी रक्षक -52 122
प्रधान बंदी रक्षक 04 15
डिप्टी जेलर 02 06
जेलर 02 02
जेलर कमलेश मिश्रा के निलंबन के बाद एक ही रह गए हैं।
जेल में आठ आहते और 24 बैरक हैं। स्टाफ की कमी की वजह से हर बंदी पर नजर रखना मुश्किल है। एक सिपाही 700 बंदियों की सुरक्षा कैसे करता है, यह देखने की बात है। जेल की बुराईयां सभी को दिखाई देती हैं। स्टाफ की कमी पर किसी का ध्यान नहीं है- दधिराम मौर्य, जेल अधीक्षक
सीबीआई जांच की मांग
ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी के पदाधिकारी उस्मान रजा खान ने जेल अधीक्षक को ज्ञापन देकर कहा है कि जिला जेल में गुड्डू की मौत की सूचना भी परिवार के लोगों को नहीं दी गई। किसी अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें गुड्डू की मौत के बारे में बताया। उसी सूचना पर जेल आकर जानकारी की तो गुड्डू की मौत हो चुकी थी। उस्मान रजा का कहना है कि यह बहुत गंभीर मामला है। जेल प्रशासन की लापरवाही से गुड्डू की मौत हुई है। इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होने के जेल में होने वाले खेल का भी खुलासा हो जाएगा। ज्ञापन पर मौलाना अदनान रजा खां, शुएब रजा, हाफिज इमरान, मोहम्मद जुनैद, ताज खां, एजाज अहमद, इस्लाम खां, मौलाना सैफुल रजा, मोहम्मद हलीम और इस्लाम के हस्ताक्षर हैं।