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दुबई में बंधक इमरान को छुड़ा लाए सरदार गुरमुख सिंह
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 01 Apr 2016 01:45 AM IST
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गुरमुख के साथ इमरान
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विदेश में नौकरी के सपने संजोये बैठा नगर का पढ़ा लिखा युवक बरेली के कबूतरबाजों का शिकार हो गया। उन्होंने मोटी रकम लेकर दुबई भेजा तो वहां मजदूरी करने का फरमान सुना दिया गया। युवक को क्षेत्र के ही गुरमुख सिंह फरिश्ता बनकर मिले और 82 हजार रुपये जमाकर उसे मुक्त करा लाए।
अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमीन संस्था के पूर्व सदर शफीक अहमद खां के बेटे इमरान खां यहां रजा एक्शन कमेटी के नगर अध्यक्ष भी हैं। इमरान को विदेश में नौकरी का शौक लगा और किला निवासी एक एजेंट से संपर्क साधा। दुबई का वीजा मंगवाने के बदले 90 हजार रुपये लिए। दिल्ली एजेंट के ने इमरान को एसी मैकेनिक का अनुबंध पत्र दिया गया, जबकि दुबई भेजे गए अनुबंध में धोखाधड़ी करके उसे मजदूर दिखा दिया गया। इसी आधार पर इमरान को शारजहां दुबई भेज दिया गया। 22 मार्च को इमरान को मजदूरी करने का फरमान सुना दिया गया। इससे उसने साफ इंकार कर दिया।
उदास बैठे इमरान पर इसी कंपनी में काम करने वाले गजरौला निवासी सरदार गुरमुख सिंह की नजर पड़ी। वह साल का अनुबंध पूरा कर घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। गुरुमुख सिंह ने इमरान के घरवालों से बात कराई। इसके बाद गुरुमुख सिंह ने 82 हजार रुपये जमा करके उसे मुक्त कराया और गुरुवार दोपहर बाद इमरान को लेकर उसके घर नवाबगंज पहुंचे। इमरान के घर में जश्न का माहौल था। इमरान ने बताया कि करीब दो दर्जन पढ़े लिखे युवक उसी कंपनी में बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं। उसने कभी भी विदेश न जाने की बात कहते हुए अपने देश में ही मेहनत से काम करने का बात कही। शफीक अहमद ने बताया कि कबूतरबाजों के विरुद्ध रिपोर्ट कराएंगे।
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अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमीन संस्था के पूर्व सदर शफीक अहमद खां के बेटे इमरान खां यहां रजा एक्शन कमेटी के नगर अध्यक्ष भी हैं। इमरान को विदेश में नौकरी का शौक लगा और किला निवासी एक एजेंट से संपर्क साधा। दुबई का वीजा मंगवाने के बदले 90 हजार रुपये लिए। दिल्ली एजेंट के ने इमरान को एसी मैकेनिक का अनुबंध पत्र दिया गया, जबकि दुबई भेजे गए अनुबंध में धोखाधड़ी करके उसे मजदूर दिखा दिया गया। इसी आधार पर इमरान को शारजहां दुबई भेज दिया गया। 22 मार्च को इमरान को मजदूरी करने का फरमान सुना दिया गया। इससे उसने साफ इंकार कर दिया।
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उदास बैठे इमरान पर इसी कंपनी में काम करने वाले गजरौला निवासी सरदार गुरमुख सिंह की नजर पड़ी। वह साल का अनुबंध पूरा कर घर लौटने की तैयारी कर रहे थे। गुरुमुख सिंह ने इमरान के घरवालों से बात कराई। इसके बाद गुरुमुख सिंह ने 82 हजार रुपये जमा करके उसे मुक्त कराया और गुरुवार दोपहर बाद इमरान को लेकर उसके घर नवाबगंज पहुंचे। इमरान के घर में जश्न का माहौल था। इमरान ने बताया कि करीब दो दर्जन पढ़े लिखे युवक उसी कंपनी में बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं। उसने कभी भी विदेश न जाने की बात कहते हुए अपने देश में ही मेहनत से काम करने का बात कही। शफीक अहमद ने बताया कि कबूतरबाजों के विरुद्ध रिपोर्ट कराएंगे।
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