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खून देने में देर कर दी, गर्भवती की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 09 May 2016 12:49 AM IST
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महिला की मौत
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मदर्स डे पर रविवार को जब सभी मंचों पर मां की महिमा का बखान हो रहा था तब जिला अस्पताल में एक जननी ने खून के अभाव में दम तोड़ दिया। यह हाल तब है जब जननी सुरक्षा को लेकर सेहत विभाग लगातार दावे कर रहा है। शाहजहांपुर जिला अस्पताल से रेफर होकर आई गर्भवती को बरेली जिला अस्पताल में खून पाने में साढ़े तीन घंटे लग गए। खून न मिलने से महिला का आपरेशन नहीं हो सका और प्रसव के दौरान ही उसकी मौत हो गई।
लखीमपुर के पसगवां ब्लाक के खरगापुर गांव में देवराम की पत्नी देवस्तुति (27) गर्भवती थी। परिवार वालाें के मुताबिक शनिवार शाम को 4 बजे उसने उलझन होने पर ओआरएस घोल और पुदीन हरा पी लिया था। इसके बाद उसका शरीर ठंडा पड़ गया। घर वाले देवस्तुति को लेकर प्राइवेट अस्पताल भागे जहां डॉक्टर ने तुरंत अल्ट्रासाउंड किया और यूरिन जांच की। इस दौरान बच्चा मरा बताया और जिला महिला अस्पताल शाहजहांपुर ले जाने को कहा।
अस्पताल पहुंचने पर उसे ट्रामा सेंटर शाहजहांपुर भेज दिया गया। यहां डॉक्टराें ने संसाधन की कमी बताकर उसे बरेली जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। सात बजे 102 पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस ने 9 बजकर 40 मिनट पर बरेली जिला महिला अस्पताल में देवस्तुति को भर्ती करा दिया। यहां मौजूद डॉ. अनीता धस्माना ने तुरंत खून की जरूरत बताई और खून लाने को कहा। लेकिन डेढ़ बजे तक खून नहीं मिल पाया था। जब तक खून लेकर पति आया तब तक देवस्तुति की मौत हो चुकी थी।
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- कहां- कहां हुई लापरवाही
लापरवाही 1
परिजनाें के मुताबिक गर्भवती महिला ने शनिवार को शाम चार बजे पुदीन हरा, ओआरएस घोल और कोई दवा खाई थी। इसके बाद शरीर ठंडा पड़ गया। बताया जा रहा है कि बिना डाक्टरी सलाह के उसे दवा नहीं लेनी चाहिए थी।
लापरवाही 2
परिजन क्लीनिक ले गए जहां डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड किया और बच्चे को मृत बताकर शाहजहांपुर सरकारी अस्पताल भेज दिया। यहां से ट्रामा सेंटर शाहजहांपुर भेजा गया। ट्रामा सेंटर से महिला को बरेली भेजा गया। जबकि इस मामले में महिला अस्पताल शाहजहांपुर में भी इलाज हो सकता था। वहां भी तीन महिला डॉक्टर हैं।
लापरवाही 3
बरेली के महिला अस्पताल में सुबह 9:40 पर देवस्तुति पहुंची। यहां खून मंगवाया गया। रविवार होने के चलते महिला की जांच की पूरी कवायद शुरू नहीं की गई। इलाज भी ढंग से शुरू नहीं हो पाया। हालांकि डॉक्टरों ने परिवार को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया। अस्पताल का दावा है कि इलाज शुरू कर दिया गया था।
लापरवाही 4
खून लेने गए परिवार वालों से डोनर लाने को कहा गया। उनके पास उस समय डोनर नहीं था। उन्होंने फोन कर डोनर को बुलाया लेकिन इमरजेंसी केस को देखते हुए ब्लड बैंक को तत्काल खून देना चाहिए था जो नहीं दिया गया। ब्लड बैंक के स्टॉफ ने तब तक खून नहीं दिया जब तक डोनर नहीं आया। साढ़े तीन घंटे बाद डोनर आया तो ब्लड दिया।
लापरवाही 5
महिला का हीमोग्लोबिन परिजन 10 प्वाइंट बता रहे हैं जो हाईरिस्क में है। महिला का कार्ड भी बना था और दो बार सरकारी अस्पताल में जांच भी हुई थी। फिर भी देवस्तुति का बच्चा मरने की बात किसी को पता नहीं चली।
वर्जन--
‘पुदीन हरा, ओआरएस या पैरासिटामोल खाने से बच्चा नहीं मरता। खून की कमी से भी बच्चा मरने की संभावना नहीं है। अगर सेप्टिक बताया जा रहा है तो संभव है कि बच्चा 4 या 5 दिन पहले मर चुका हो। या फिर प्वाइजनिंग का मामला हो। एक दिन का मरा बच्चा अगर पेट में है तो उससे सेप्टिक नहीं होता, गर्भवती महिला को बचाया जा सकता है।’
-डॉ. भारती सरन, स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ
‘महिला की मौत का कारण प्रथम दृष्टया सेप्टिक दिख रहा है। महिला को खून की भी कमी थी। उसका इलाज शुरू कर दिया गया था लेकिन उसकी मौत हो गई। ’
-डॉ. अनीता धस्माना, जिला महिला अस्पताल
‘डोनर नहीं होते हैं तो सीएमएस से फोन पर बात कर फ्री में खून दे देते हैं। जांच करने के बाद आधे से एक घंटे में रक्त दे देते हैं। जब डोनर नहीं था तो स्टाफ फोन कर पूछ लेना चाहिए था। इंतजार क्याें किया।’
-डॉ. यूवी सिंह, प्रभारी, ब्लड बैंक
‘आखिर शाहजहांपुर महिला अस्पताल से गर्भवती रेफर क्यों की गई, वहीं इलाज हो सकता था। ब्लड बैंक पर भी जेएसवाई मामलों पर ब्लड बैंक कर्मी ज्यादा इंतजार व बहस न करें। जानकारी के मुताबिक उसकी नार्मल डिलीवरी की कोशिश की गई लेकिन डाक्टर सफल नहीं रहे। खून की वजह से आपरेशन शुरू नहीं हो सका था। शाहजहांपुर अस्पताल की सीएमएस को पत्र भेजकर जवाब मांगूंगा।’
-डॉ. सुबोध शर्मा, जेडी हेल्थ
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लखीमपुर के पसगवां ब्लाक के खरगापुर गांव में देवराम की पत्नी देवस्तुति (27) गर्भवती थी। परिवार वालाें के मुताबिक शनिवार शाम को 4 बजे उसने उलझन होने पर ओआरएस घोल और पुदीन हरा पी लिया था। इसके बाद उसका शरीर ठंडा पड़ गया। घर वाले देवस्तुति को लेकर प्राइवेट अस्पताल भागे जहां डॉक्टर ने तुरंत अल्ट्रासाउंड किया और यूरिन जांच की। इस दौरान बच्चा मरा बताया और जिला महिला अस्पताल शाहजहांपुर ले जाने को कहा।
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अस्पताल पहुंचने पर उसे ट्रामा सेंटर शाहजहांपुर भेज दिया गया। यहां डॉक्टराें ने संसाधन की कमी बताकर उसे बरेली जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। सात बजे 102 पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस ने 9 बजकर 40 मिनट पर बरेली जिला महिला अस्पताल में देवस्तुति को भर्ती करा दिया। यहां मौजूद डॉ. अनीता धस्माना ने तुरंत खून की जरूरत बताई और खून लाने को कहा। लेकिन डेढ़ बजे तक खून नहीं मिल पाया था। जब तक खून लेकर पति आया तब तक देवस्तुति की मौत हो चुकी थी।
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- कहां- कहां हुई लापरवाही
लापरवाही 1
परिजनाें के मुताबिक गर्भवती महिला ने शनिवार को शाम चार बजे पुदीन हरा, ओआरएस घोल और कोई दवा खाई थी। इसके बाद शरीर ठंडा पड़ गया। बताया जा रहा है कि बिना डाक्टरी सलाह के उसे दवा नहीं लेनी चाहिए थी।
लापरवाही 2
परिजन क्लीनिक ले गए जहां डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड किया और बच्चे को मृत बताकर शाहजहांपुर सरकारी अस्पताल भेज दिया। यहां से ट्रामा सेंटर शाहजहांपुर भेजा गया। ट्रामा सेंटर से महिला को बरेली भेजा गया। जबकि इस मामले में महिला अस्पताल शाहजहांपुर में भी इलाज हो सकता था। वहां भी तीन महिला डॉक्टर हैं।
लापरवाही 3
बरेली के महिला अस्पताल में सुबह 9:40 पर देवस्तुति पहुंची। यहां खून मंगवाया गया। रविवार होने के चलते महिला की जांच की पूरी कवायद शुरू नहीं की गई। इलाज भी ढंग से शुरू नहीं हो पाया। हालांकि डॉक्टरों ने परिवार को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया। अस्पताल का दावा है कि इलाज शुरू कर दिया गया था।
लापरवाही 4
खून लेने गए परिवार वालों से डोनर लाने को कहा गया। उनके पास उस समय डोनर नहीं था। उन्होंने फोन कर डोनर को बुलाया लेकिन इमरजेंसी केस को देखते हुए ब्लड बैंक को तत्काल खून देना चाहिए था जो नहीं दिया गया। ब्लड बैंक के स्टॉफ ने तब तक खून नहीं दिया जब तक डोनर नहीं आया। साढ़े तीन घंटे बाद डोनर आया तो ब्लड दिया।
लापरवाही 5
महिला का हीमोग्लोबिन परिजन 10 प्वाइंट बता रहे हैं जो हाईरिस्क में है। महिला का कार्ड भी बना था और दो बार सरकारी अस्पताल में जांच भी हुई थी। फिर भी देवस्तुति का बच्चा मरने की बात किसी को पता नहीं चली।
वर्जन--
‘पुदीन हरा, ओआरएस या पैरासिटामोल खाने से बच्चा नहीं मरता। खून की कमी से भी बच्चा मरने की संभावना नहीं है। अगर सेप्टिक बताया जा रहा है तो संभव है कि बच्चा 4 या 5 दिन पहले मर चुका हो। या फिर प्वाइजनिंग का मामला हो। एक दिन का मरा बच्चा अगर पेट में है तो उससे सेप्टिक नहीं होता, गर्भवती महिला को बचाया जा सकता है।’
-डॉ. भारती सरन, स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ
‘महिला की मौत का कारण प्रथम दृष्टया सेप्टिक दिख रहा है। महिला को खून की भी कमी थी। उसका इलाज शुरू कर दिया गया था लेकिन उसकी मौत हो गई। ’
-डॉ. अनीता धस्माना, जिला महिला अस्पताल
‘डोनर नहीं होते हैं तो सीएमएस से फोन पर बात कर फ्री में खून दे देते हैं। जांच करने के बाद आधे से एक घंटे में रक्त दे देते हैं। जब डोनर नहीं था तो स्टाफ फोन कर पूछ लेना चाहिए था। इंतजार क्याें किया।’
-डॉ. यूवी सिंह, प्रभारी, ब्लड बैंक
‘आखिर शाहजहांपुर महिला अस्पताल से गर्भवती रेफर क्यों की गई, वहीं इलाज हो सकता था। ब्लड बैंक पर भी जेएसवाई मामलों पर ब्लड बैंक कर्मी ज्यादा इंतजार व बहस न करें। जानकारी के मुताबिक उसकी नार्मल डिलीवरी की कोशिश की गई लेकिन डाक्टर सफल नहीं रहे। खून की वजह से आपरेशन शुरू नहीं हो सका था। शाहजहांपुर अस्पताल की सीएमएस को पत्र भेजकर जवाब मांगूंगा।’
-डॉ. सुबोध शर्मा, जेडी हेल्थ