फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   crime

सीओ ने प्रैक्टीकल करवाया तो खेल गया अर्जुन

Wed, 27 May 2015 02:25 AM IST
बरेली
बरेली Updated Wed, 27 May 2015 02:25 AM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
 बदायूं के दंपति के शहर से अगवा होने और फिर नाटकीय ढंग से पति के मिल जाने के मामले में मंगलवार को सीओ (प्रथम) मुकुल द्विवेदी ने प्रारंभिक जांच के दौरान खुलासा किया है कि अर्जुन के बयान और जुबान उसका साथ नहीं दे रहे हैं। आटो बुलाकर प्रैक्टीकल कराया तो उसके होश उड़ गए। रात तक वह कोतवाली में बैठा था।

अमर उजाला में अर्जुन की कहानी और उसकी झोल छपने के बाद एसपी सिटी ने उसे बदायूं से बरेली बुलवाया। उन्होंने सीओ  मुकुल द्विवेदी को उससे पूछताछ करके सच्चाई का पता लगाने को कहा।  अर्जुन ने सीओ को बताया कि 20 मई को साढ़े पांच बजे बदायूं से बस में बैठकर साढ़े छह बजे चौपुला उतरे। यहां से जंक्शन को टैंपो किया। वह पीछे पत्नी के साथ बैठा। एक युवक उसके पास बैठा था तो एक आगे ड्राइवर के पास। पोस्टमार्टम हाउस के पास इनमें से दो लोगों ने उसकी कमर पर चाकू लगा दिया। सीओ ने पूछा कि पीछे बैठा युवक ही तुम्हारी कमर पर चाकू लगा सकता था, फिर आगे वाले ने कैसे लगा दिया? इस पर अर्जुन हड़बड़ाया तो सीओ ने एक आटो बुला लिया और प्रैक्टीकल करके देखा। आसानी से ऐसा संभव नहीं हो सका तो अर्जुन का चेहरा फक पड़ गया। तब बोला कि इसी बीच वह बेहोश हो गया, आगे क्या हुआ उसे नहीं पता। सीओ ने उसे मेडिकल परीक्षण को भेज दिया। अर्जुन का यह बयान कल के बयान से बदला हुआ था।

विज्ञापन

 
वर्जन
हमने इतना तो पता लगा लिया कि अर्जुन सरासर झूठ बोल रहा है। उच्चाधिकारियों को इस स्थिति से अवगत भी करा दिया है। चूंकि उसकी गुमशुदगी कादरचौक में दर्ज है इसलिए यहां नया मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। जांच रिपोर्ट भेज दी जाएगी, आगे की कार्रवाई कादरचौक पुलिस ही करेगी। - मुकुल द्विवेदी, सीओ प्रथम
विज्ञापन
विज्ञापन


ससुर तो बेदाग मान रहे अर्जुन को
ऊषा की तलाश में जुटे उसके मायके वाले भी मंगलवार को अर्जुन के पिता के साथ सूरजपाल कोतवाली में जमा थे। लुधियाना निवासी ऊषा के पिता सत्यपाल ने बताया कि वे मूल रूप से परौर (शाहजहांपुर) के मुड़िया गांव के निवासी हैं। कई साल से लुधियाना जाकर बस गए हैं। अर्जुन और ऊषा वहीं जा रहे थे। बेटी की शादी करीब पांच साल पहले की थी, उस पर कोई बच्चा नहीं था। फिर भी ससुराल वालों या पति से कोई मनमुटाव नहीं था। अब तो इनके घर में शादी है, ऐसे में मेरी बेटी के साथ भला गलत क्यों करते। मेरी बेटी ससुराल का ही काफी जेवर पहने थी। अगर इनके दिल में कुछ होता तो उसे जेवर क्यों ले जाने देते। सूरजपाल ने कहा कि वे लोग तो बहू की तलाश में जुटे थे अब बेटे को पुलिस ने बैठा लिया है। समझ नहीं आता कि उसका क्या कसूर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed